नकरौंदा डकैती के पीछे डकैत नहीं, MA की छात्रा!
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राजधानी देहरादून की नकरौंदा डकैती और हत्या के खुलासे में पुलिस एक मोबाइल नंबर को संदिग्ध मानकर 72 घंटे तक खंगालती रही। उसमें एक बड़ी कड़ी हाथ लगी है।
घटना के दिन आईएसबीटी पर लोकेशन मिलने के बाद इस नंबर से लगातार पश्चिमी बंगाल, सिक्किम और दिल्ली के नंबरों पर कॉल की जाती रही तो पुलिस का शक और गहरा गया। लेकिन तीन दिन के सर्विलांस के बाद पता चला कि यह मोबाइल किसी डकैत का नहीं, बल्कि दून में एमए कर रही सिक्किम निवासी एक छात्रा का है।
नकरौंदा डकैती में पुलिस अब तक पांच लाख से अधिक फोन खंगाल चुकी है। इस माथापच्ची के दौरान कई दिलचस्प किस्से भी सामने आए हैं। घटना के दिन सिक्किम के एक मोबाइल की लोकेशन आईएसबीटी के पास थी।
घटना के तरीके में बांग्लादेशी गैंग का हाथ होने की आशंका के चलते पुलिस मान रही थी कि इस नंबर से मदद मिल सकती है।
मोबाइल सर्विलांस से खुले सारे राज
पुलिस ने उन नंबरों को भी सर्विलांस पर लगा दिया, जिन पर इससे बात की जा रही थी। जांच में साफ हुआ कि यह नंबर छात्रा का है और वह अपने परिजनों, रिश्तेदारों से बातचीत कर रही थी। नाम, पता, कॉलेज की तस्दीक के बाद पुलिस की 72 घंटे की मेहनत पर पानी फिर गया।
नकरौंदा में सहायक कृषि अधिकारी के घर डकैती के दौरान उनके बेटे को मौत के घाट उतारने वाले बदमाश किस्मत से पुलिस के हाथ आ गए हैं। बिजनौर एसओजी ने नगीना में हुई लूट के मामले में दो बदमाशों को दबोचा था।
दोनों ने नकरौंदा कांड में हाथ की बात स्वीकार ली है। बदमाशों को पूरी दुनिया में ढूंढ कर निराश हो चुकी दून पुलिस के लिए यह खबर संजीवनी साबित हुई। दोनों बदमाशों से हुई पूछताछ के आधार पर पुलिस ने घटना में घायल हुए तीसरे बदमाश नदीम को हरिद्वार से दबोच लिया।
बाकी बदमाशों की तलाश में सहारनपुर, शामली, मंगलौर और भगवानपुर के आरोपियों की तलाश में पुलिस की दबिश चलती रही। पुलिस सोमवार को इस मामले का खुलासा कर सकती है। देर रात तक दोनों जिलों के अधिकारी कार्रवाई का खाका तैयार करने में जुटे थे।
जेल में बना था गैंग
शुक्रवार रात को यह खुशखबरी मिली तो दून पुलिस की बांछें खिल गई। फिर क्या था अलग-अलग दिशाओं में दौड़ रही कई टीमें बिजनौर पहुंच गईं। देर रात तक कड़ी पूछताछ के बाद वारदात में शामिल बदमाशों के चेहरे बेनकाब हो गए।
शनिवार सुबह से ही दून और बिजनौर पुलिस फरार बदमाशों की धरपकड़ और माल बरामदगी के लिए दबिश देती रही। बिजनौर की एसपी सिटी कल्पना सक्सेना और देहरादून के एसपी सिटी अजय सिंह पुलिस टीम के साथ शनिवार रात दून लौट आए। इसके बाद पूरी कार्रवाई की जानकारी एसएसपी अजय रौतेला को दी गई।
सूत्रों की मानें तो इस गैंग में यूपी सहारनपुर निवासी साजिद और साजिद उर्फ मोटा, साजिद का साला इखलाक निवासी भगवानपुर हरिद्वार, अनीस निवासी मंगलौर रुड़की, मुच्छड़ निवासी शामली और बिजनौर का एक बदमाश शामिल था। हरिद्वार निवासी नदीम को पुलिस ने दबोच लिया। नदीम सहायक कृषि अधिकारी के घर से भागते वक्त घायल हो गया था।
नकरौंदा में वारदात को अंजाम देने वाला यह गैंग हरिद्वार कारागार में रहतेे हुए बना था। यूपी और उत्तराखंड के यह अपराधी आपस में परिचित नहीं थे। एक साथ जेल में रहते हुए उनकी मुलाकात हुई थी। बाहर आने के बाद इन बदमाशों ने मिलकर गैंग चलाने का फैसला किया।
क्या हुआ था
दस सितंबर को तड़के साढ़े तीन बजे सात बदमाश नकरौंदा में विवेक विहार निवासी सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र सिंह थपलियाल के घर में घुस गए थे। बदमाशों ने रॉड से हमला कर सुरेंद्र सिंह और उनकी पत्नी अंजनि को लहूलुहान कर दिया था।
मां-बाप को बचाने के लिए बेटा अंकित बदमाशों से भिड़ गया था। इसी बीच एक बदमाश ने अंकित को गोली मार दी थी। बदमाशों ने मकान के एक हिस्से में किराए पर रहने वाले एलआईयू सिपाही रघुबीर सिंह की पत्नी शांति की भी पिटाई की थी और नकदी और जेवरात लूटकर फरार हो गए थे।
एक बदमाश की शनाख्त परेड
सूत्रों की मानें तो पुलिस ने डकैती में शामिल रहे बदमाश नदीम की शनाख्त परेड भी कराई है। इस कार्रवाई को बेहद गोपनीय रूप से अंजाम दिया गया। यह वहीं बदमाश था जो घटना के बाद घायल हो गया था। परिजनों ने भी शनिवार को घटना के बारे में कुछ भी बोलने से परहेज किया।
पुलिस ने साधी चुप्पी
नकरौंदा डकैती में कामयाबी के सवाल से बचने के लिए थाना प्रभारी के अलावा पुलिस अधिकारी भी फोन रिसीव करने से बचते रहे। कई अधिकारियों के मोबाइल लगातार बजते रहे। एक आला अफसर के अलावा टीम के शामिल पुलिस कर्मियों ने अपने मोबाइल स्विच ऑफ कर दिए थे।