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एमएसवीएच की निदेशक अनुराधा डालमिया ने दिया इस्तीफा

Tue, 21 Aug 2018 02:08 AM IST
Updated Tue, 21 Aug 2018 02:08 AM IST
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एमएसवीएच की निदेशक अनुराधा डालमिया ने दिया इस्तीफा
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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मॉडल स्कूल फॉर विजुअली हैंडीकैप्ड (एमएसवीएच) में दृष्टिबाधित छात्राओं से छेड़छाड़ और शारीरिक शोषण मामले में छात्रों के दबाव के बाद सोमवार देर शाम नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द इंपावरमेंट ऑफ पर्संस विद विजुअल डिसेबिलिटीज (एनआईईपीवीडी) की निदेशक अनुराधा डालमिया ने नैतिकता के आधार पर त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने ई-मेल और फैक्स के जरिए अपना त्यागपत्र दिल्ली मुख्यालय भेजा है। अब यह वहीं तय होगा कि उनका त्यागपत्र स्वीकार होता है या नहीं। मॉडल स्कूल फॉर विजुअली हैंडीकैप्ड, एनआईईपीवीडी के अंडर में संचालित है। वहीं, सोमवार शाम के इस घटनाक्रम को प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी जीत बताया है।
छात्रों का कहना है कि एनआईईपीवीडी (पूर्व में एनआईवीएच) की निदेशक ने उन्हें देर शाम बातचीत के लिए बुलाया था। पहले सभी कक्षाओं के प्रतिनिधियों से बातचीत की जानी थी, मगर सभी छात्र एकसाथ आने की बात पर अड़ गए। सोमवार शाम को बाल आयोग की अध्यक्षा ऊषा नेगी, सदस्या सीमा डोरा आदि के समक्ष छात्रों ने अपनी बातों को निदेशक के सामने रखा। इस दौरान छात्रों ने अपने पूर्व के आरोपों को दोहराया, जिनमें से कई पर निदेशक ने सफाई भी दी। इसके अलावा निदेशक ने उनकी मांगों में से कई मांग ऐसी बताई, जिनका पूरा होना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। ऐसे में उन्होंने नैतिकता के आधार पर अपने इस्तीफे की पेशकश छात्रों के सामने की। इस पर छात्रों ने एक दूसरे से वार्ता कर हामी भर दी। इसके बाद अनुराधा डालमिया ने अपना त्यागपत्र दिल्ली भेजा दिया। छात्रों के अनुसार, अब वे पुलिस कार्रवाई पर ही भरोसा करेंगे। उन्होंने लगभग एक सप्ताह से चले आ रहे प्रदर्शन को समाप्त करने की घोषणा कर दी।
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‘जो किया, बच्चों की खुशी के लिए किया’
देहरादून। मैं इस संस्थान को परिवार मानती हूं, मगर अब इस प्रकरण से बहुत आहत हो चुकी हैं। यह कहते हुए निदेशक अनुराधा डालमिया इस्तीफा लिखने अपने दफ्तर में चली गईं। वे जब बाहर आईं तो उनकी आंखों में आंसू थे, गला भर आया था। लौटकर जब उन्होंने छात्रों को इस बारे में बताया तो हॉल में शांति छा गई। कुछ देर बाद ही डालमिया वापस अपने आवास की तरफ चलीं गईं। दरअसल, नैतिकता के आधार पर वे इस्तीफा देने की बात रविवार से ही कर रहीं थी। इस बारे में संस्थान के प्रिंसिपल ने उन्हें मना किया था। शाम करीब चार बजे डालमिया से बातचीत के बाद प्रिंसिपल दिल्ली चले गए। इससे पहले डालमिया ने बताया कि वह पिछले 11 वर्षों से इस संस्थान में हैं। इतने लंबे समय से छात्रों के हर सुख-दुख में शरीक होती आ रहीं हैं। बच्चे जब खेलते थे तो उनके उल्लास की आवाज को सुनकर वे प्रफुल्लित होती थीं। अब भी मैंने यह फैसला छात्रों की खुशी के लिए ही किया।
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