{"_id":"5b33f1f34f1c1b264d8b8cdc","slug":"71530130931-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रेमनगर गैंगरेप प्रकरण: स्टे रद्द कराने में नाकाम रही पुलिस, 21 दिन और बढ़ी मियाद","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
प्रेमनगर गैंगरेप प्रकरण: स्टे रद्द कराने में नाकाम रही पुलिस, 21 दिन और बढ़ी मियाद
Updated Thu, 28 Jun 2018 01:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
प्रेमनगर गैंगरेप के दो आरोपियों को मिले स्टे को रद्द कराने में पुलिस नाकाम हो गई है। हाईकोर्ट नैनीताल ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर स्टे की मियाद 21 दिन के लिए और बढ़ा दी है। इससे पहले आरोपियों ने 13 से 27 जून तक हाईकोर्ट से गिरफ्तारी स्टे हासिल किया था। पुलिस अब तक कहती रही कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, लेकिन बुधवार को हाईकोर्ट ने पुलिस के इस तर्क को नकार दिया।
12 जून को गैंगरेप में नाम आने के बाद अगले ही दिन आरोपी कैंट सभासद जितेंद्र तनेजा और व्यापारी अजय अरोड़ा गिरफ्तारी पर स्टे लेने में कामयाब हो गए थे। हाईकोर्ट ने उन्हें सशर्त स्टे देते हुए जांच में सहयोग करने और डीएनए टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराने के साथ अन्य जांचें भी कराई। इस बीच पुलिस का कहना था कि आरोपियों को बुलाने व जांच के लिए जरूरी चीजों को मंगाने के लिए बार-बार नोटिस देने पड़ रहे हैं। इसी बात को आधार बनाकर प्रेमनगर पुलिस ने स्टे रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी। चूंकि, बुधवार को स्टे का अंतिम दिन था तो आरोपियों की ओर से भी स्टे की मियाद बढ़ाने की अपील की गई। आरोपियों के अधिवक्ता (देहरादून में) जतिन दुग्गल ने बताया कि हाईकोर्ट ने स्टे की अवधि को 21 दिन के लिए बढ़ा दिया है। उन्होंने बताया कि तनेजा और अरोड़ा जांच में सहयोग कर रहे हैं। जब उनसे कोई चीज मांगी जाती है वे तत्काल पुलिस को उपलब्ध कराते हैं। अंत: वस्त्र, फिंगर प्रिंट्स, डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल और अब पोटेंसी टेस्ट के लिए भी दोनों तैयार हैं।
विज्ञापन
प्रेमनगर गैंगरेप के दो आरोपियों को मिले स्टे को रद्द कराने में पुलिस नाकाम हो गई है। हाईकोर्ट नैनीताल ने आरोपियों की गिरफ्तारी पर स्टे की मियाद 21 दिन के लिए और बढ़ा दी है। इससे पहले आरोपियों ने 13 से 27 जून तक हाईकोर्ट से गिरफ्तारी स्टे हासिल किया था। पुलिस अब तक कहती रही कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं, लेकिन बुधवार को हाईकोर्ट ने पुलिस के इस तर्क को नकार दिया।
12 जून को गैंगरेप में नाम आने के बाद अगले ही दिन आरोपी कैंट सभासद जितेंद्र तनेजा और व्यापारी अजय अरोड़ा गिरफ्तारी पर स्टे लेने में कामयाब हो गए थे। हाईकोर्ट ने उन्हें सशर्त स्टे देते हुए जांच में सहयोग करने और डीएनए टेस्ट कराने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराने के साथ अन्य जांचें भी कराई। इस बीच पुलिस का कहना था कि आरोपियों को बुलाने व जांच के लिए जरूरी चीजों को मंगाने के लिए बार-बार नोटिस देने पड़ रहे हैं। इसी बात को आधार बनाकर प्रेमनगर पुलिस ने स्टे रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में अपील की थी। चूंकि, बुधवार को स्टे का अंतिम दिन था तो आरोपियों की ओर से भी स्टे की मियाद बढ़ाने की अपील की गई। आरोपियों के अधिवक्ता (देहरादून में) जतिन दुग्गल ने बताया कि हाईकोर्ट ने स्टे की अवधि को 21 दिन के लिए बढ़ा दिया है। उन्होंने बताया कि तनेजा और अरोड़ा जांच में सहयोग कर रहे हैं। जब उनसे कोई चीज मांगी जाती है वे तत्काल पुलिस को उपलब्ध कराते हैं। अंत: वस्त्र, फिंगर प्रिंट्स, डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल और अब पोटेंसी टेस्ट के लिए भी दोनों तैयार हैं।
विज्ञापन