डीएवी छात्रनेता की हत्या मामले में SC ने बरकरार रखी 7 की उम्रकैद
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19 वर्ष पहले देहरादून के डीएवी कॉलेज कैंपस में हुई हिंसा में छात्र नेता की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
शीर्ष अदालत ने आरोपियों की उस दलील को नकार दिया कि उनका इरादा पीड़ित को चुनाव लड़ने से रोकना था न कि उसे मारने का था।
न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल की पीठ ने सौरभ, नितिन, धीरज कालरा, भगत सिंह, सोम प्रकाश, ऋषि और संजीव की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने और फिर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सातों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
24 सितंबर 1996 को सातों आरोपी देहरादून के डीएवी कॉलेज में एकत्रित हुए। उन्होंने विपिन सिंह नेगी और आलोक चंदाना को कॉलेज के कॉमर्स फैकल्टी के लिए होने वाले चुनाव से नाम वापस लेने के लिए कहा।
दोनों ने जब नाम वापस लेने से इनकार किया तो सातों ने चाकू, खुखरी, डंडे आदि से उन पर हमला कर दिया। हमले में विपिन नेगी की जान तो बच गई लेकिन आलोक की मौत हो गई।
चुनाव लड़ने से रोकने के लिए की थी हत्या
दोषियों की ओर से अलग-अलग दाखिल अपील पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि यह मान भी लिया जाए कि सभी दोषियों का इरादा मारने का नहीं था, वे सिर्फ दोनों को चुनाव लड़ने से रोकना चाहते थे लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अचानक उत्तेजना में आकर सातों ने सामूहिक तौर पर उसकी हत्या की।
हमलावरों की करतूत और पीड़ित के शरीर पर मिले जख्म यह बताते हैं कि उनका इरादा नेगी को मारने का था। अदालत ने सभी को दोषी ठहराने के लिए अभियोजन पक्ष के गवाहों और मेडिकल रिपोर्ट पर भी गौर किया।
पीठ ने कहा कि इसमें कोई विवाद नहीं है कि आरोपी छात्र वारदात के वक्त मौके पर मौजूद थे और वे खतरनाक हथियारों से लैस थे। सभी सामूहिक इरादे के साथ विपिन और आलोक को चुनाव लड़ने से रोकना चाहते थे।