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गुलदार के हमले से 35 बकरियां मरीं
Updated Sat, 30 Dec 2017 01:25 AM IST
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गुलदार के हमले से 35 बकरियां मरीं
ब्यूरो/अमर उजाला
चकराता।
दाबला गांव स्थित छानी में गुलदार के हमले से 35 बकरियों की मौत के बाद पीड़ित पशुपालक किशन सिंह के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उसने वन विभाग से मुआवजे की गुहार लगाई है। वहीं गुलदार के हमले से लोगों में भी दहशत है।
बुधवार की रात गुलदार ने छानी में घुस 35 बकरियों को मार डाला था जबकि आठ बकरियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इतनी बड़ी संख्या में बकरियों की मौत से पशुपालकों में दहशत है।
गांव निवासी सरदार सिंह, सूरत सिंह, दौलत सिंह आदि का कहना है कि लंबे समय से गुलदार को गांव के आसपास देखा जा रहा है। बकरियों की मौत के बाद अन्य पशुपालकों को भी डर सताने लगा है। बृहस्पतिवार की रात भी पशुपालकों को रातभर जागकर छानियों में पहरा देना पड़ा।
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वहीं पीड़ित का कहना है कि पशुपालन ही उसकी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया है। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से उसके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उधर डीएफओ दीपचंद आर्य ने कहा कि वनकर्मियों को गांव में भेजा गया है। विभागीय नियमों के अनुसार पीड़ित को मुआवजा दिया जाएगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
चकराता।
दाबला गांव स्थित छानी में गुलदार के हमले से 35 बकरियों की मौत के बाद पीड़ित पशुपालक किशन सिंह के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उसने वन विभाग से मुआवजे की गुहार लगाई है। वहीं गुलदार के हमले से लोगों में भी दहशत है।
बुधवार की रात गुलदार ने छानी में घुस 35 बकरियों को मार डाला था जबकि आठ बकरियों को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इतनी बड़ी संख्या में बकरियों की मौत से पशुपालकों में दहशत है।
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गांव निवासी सरदार सिंह, सूरत सिंह, दौलत सिंह आदि का कहना है कि लंबे समय से गुलदार को गांव के आसपास देखा जा रहा है। बकरियों की मौत के बाद अन्य पशुपालकों को भी डर सताने लगा है। बृहस्पतिवार की रात भी पशुपालकों को रातभर जागकर छानियों में पहरा देना पड़ा।
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वहीं पीड़ित का कहना है कि पशुपालन ही उसकी रोजी-रोटी का एकमात्र जरिया है। इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की मौत से उसके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उधर डीएफओ दीपचंद आर्य ने कहा कि वनकर्मियों को गांव में भेजा गया है। विभागीय नियमों के अनुसार पीड़ित को मुआवजा दिया जाएगा।