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अधिकारियों का दावा सर्वेक्षण के दौरान बंजर थी भूमि
Updated Wed, 10 Jan 2018 02:09 AM IST
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अधिकारियों का दावा सर्वेक्षण के दौरान बंजर थी भूमि
ब्यूरो/अमर उजाला
त्यूनी।
भ्यूलाड़ा-हनोल मोटर मार्ग का निर्माण कर रही कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग, प्रखंड देहरादून ने भी स्वीकार किया है कि जिस भूमि पर सड़क की कटिंग की गई है वह बंजर है। ऐसे में बंजर भूमि की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सहायक अभियंता (पंचम) डीपी ढौंढियाल ने उपजिलाधिकारी त्यूनी को पत्र लिखा है।
पत्र में सहायक अभियंता ने बताया गया है कि उक्त ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए डीपीआर सर्वेक्षण कार्य वर्ष 2014 में पूर्ण कर लिया गया था। तब उक्त भूमि बंजर भूमि के रूप में दर्ज थी, लेकिन वर्ष 2016 में वह बंजर भूमि किसी व्यक्ति के नाम पंजीकृत की जा चुकी है। जिसके विभाग के पास साक्ष्य नहीं हैं। सड़क का कटिंग कार्य वर्ष 2015-16 में पूर्ण किया जा चुका है। ऐसे में उन्होंने उपजिलाधिकारी से सड़क निर्माण को अभिलेखों के अनुसार स्पष्ट कराने कराने का अनुरोध किया है, ताकि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी हो सके।
बता दें कि कुछ दिन पूर्व बंजर भूमि को एक व्यक्ति के नाम किए जाने पर हनोल निवासी संगीता देवी ने इसकी शिकायत जनता दरबार में जिलाधिकारी से शिकायत की थी। जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे। महिला का आरोप है कि मुआवजा हड़पने के लिए बंजर भूमि को एक व्यक्ति के नाम दर्ज किया गया।
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जिस समय निर्माण कार्य के लिए सर्वेक्षण हुआ, उस दौरान भूमि बंजर दर्ज थी। ऐसे में बंजर भूमि किसी व्यक्ति के नाम किया जाना कई तरह के सवाल और संदेह उत्पन्न करता है। इस मामले में मुआवजे की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में सरकारी अभिलेखों के अनुसार स्थिति का स्पष्ट होना जरूरी है। स्थिति स्पष्ट होने पर भी मुआवजे का भुगतान किया जाएगा।
- डीपी ढौंढियाल, एसडीओ
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ब्यूरो/अमर उजाला
त्यूनी।
भ्यूलाड़ा-हनोल मोटर मार्ग का निर्माण कर रही कार्यदायी संस्था ग्रामीण निर्माण विभाग, प्रखंड देहरादून ने भी स्वीकार किया है कि जिस भूमि पर सड़क की कटिंग की गई है वह बंजर है। ऐसे में बंजर भूमि की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सहायक अभियंता (पंचम) डीपी ढौंढियाल ने उपजिलाधिकारी त्यूनी को पत्र लिखा है।
पत्र में सहायक अभियंता ने बताया गया है कि उक्त ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए डीपीआर सर्वेक्षण कार्य वर्ष 2014 में पूर्ण कर लिया गया था। तब उक्त भूमि बंजर भूमि के रूप में दर्ज थी, लेकिन वर्ष 2016 में वह बंजर भूमि किसी व्यक्ति के नाम पंजीकृत की जा चुकी है। जिसके विभाग के पास साक्ष्य नहीं हैं। सड़क का कटिंग कार्य वर्ष 2015-16 में पूर्ण किया जा चुका है। ऐसे में उन्होंने उपजिलाधिकारी से सड़क निर्माण को अभिलेखों के अनुसार स्पष्ट कराने कराने का अनुरोध किया है, ताकि मुआवजा वितरण की प्रक्रिया पूरी हो सके।
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बता दें कि कुछ दिन पूर्व बंजर भूमि को एक व्यक्ति के नाम किए जाने पर हनोल निवासी संगीता देवी ने इसकी शिकायत जनता दरबार में जिलाधिकारी से शिकायत की थी। जिलाधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे। महिला का आरोप है कि मुआवजा हड़पने के लिए बंजर भूमि को एक व्यक्ति के नाम दर्ज किया गया।
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जिस समय निर्माण कार्य के लिए सर्वेक्षण हुआ, उस दौरान भूमि बंजर दर्ज थी। ऐसे में बंजर भूमि किसी व्यक्ति के नाम किया जाना कई तरह के सवाल और संदेह उत्पन्न करता है। इस मामले में मुआवजे की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में सरकारी अभिलेखों के अनुसार स्थिति का स्पष्ट होना जरूरी है। स्थिति स्पष्ट होने पर भी मुआवजे का भुगतान किया जाएगा।
- डीपी ढौंढियाल, एसडीओ