{"_id":"5b5cd6fe4f1c1bb24b8b58ac","slug":"153281100111-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"...तो लोकल पुलिस से क्यों नहीं की शिकायत","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
...तो लोकल पुलिस से क्यों नहीं की शिकायत
Updated Sun, 29 Jul 2018 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
वेदांशा इंटरनेशनल योग अकादमी संचालक को एनडीपीएस और नारकोटिक्स के केस में फंसाने के मामले में पीड़ित ने स्थानीय पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की? यह सवाल लगातार बना हुआ है। हालांकि, अभी रंगदारी के प्रकरण में यह पहली परत उखड़ी है। मुकदमे में सिर्फ छह लोग ही नहीं, बल्कि अन्य भी शामिल होने की संभावना है। खास बात यह है कि अन्य में किस-किस के नाम सामने आते हैं, यह भी देखना दिलचस्प होगा।
मुनिकीरेती स्थित तपोवन में योग विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए योगाचार्य संजीव कुमार पांडे ने अकादमी खोली। बकौल, संजीव मकसद अकादमी के माध्यम से योग का प्रचार-प्रसार करना है। अकादमी के संचालन के दौरान 12 जुलाई को उनके साथ हुई घटना ने लोगों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वालों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मुकदमे में महिला दारोगा दीपा शर्मा, राकेश कुमार, नितिन ठाकुर और अकादमी के निष्कासित कर्मचारी अभिषेक, प्रदीप व दीपिका के अलावा और अन्य भी शामिल हैं। अभी अन्य में कौन-कौन हैं, उनके नामों को उजागर होना बाकी है।
कौन हैं राकेश और नितिन
योग अकादमी के संचालक संजीव कुमार पांडेय ने बताया कि स्पेशल ब्रांच की महिला दारोगा दीपा शर्मा के साथ दो लोग और थे, लेकिन वह कौन थे, यह अभी पता नहीं है। दारोगा ने उन्हें भी अधीनस्थ अधिकारी बताया था। हालांकि, इस पर अभी कोई भी अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। दीपा के साथ राकेश और नितिन ठाकुर नामक दो व्यक्ति थे। सवाल यह भी आखिर राकेश व नितिन कौन हैं? पुलिस दोनों के ही संबंध में फिलहाल किसी भी जानकारी के होने से इनकार रही है।
विज्ञापन
निष्कासित कर्मचारियों तक क्यों पहुंचा मामला
वेदांशा अकादमी में कार्यरत कर्मचारी अभिषेक, प्रदीप कुमार और दीपिका संचालक योगाचार्य संजीव कुमार पांडे ने कुछ समय पहले निकाल दिया था। मामले में संलिप्तता होने की आशंका के बाद उनके नाम भी शिकायत में दर्ज किए गए। संजीव ने बताया कि कर्मचारियों को लापरवाही के चलते निकाल दिया गया था।
दवाइयों की शीशी के साथ खींची थी फोटो
योगाचार्य संजीव कुमार पांडे की अकादमी में फिल्मी स्टाइल में स्पेेशल ब्रांच की महिला दारोगा दीपा शर्मा दो लोगों के साथ पहुंची थी। पांडे का दावा है कि दारोगा के पास पहले से कई दवाईयां और जहरीले पदार्थ की शीशियां थी, जिसके साथ उन्होंने मेरी फोटो खींची। विदेशियों को नशा बेचने के आरोप में नारकोटिक्स और एनडीपीएस में फंसाने की धमकी दी। मामला दबाने के लिए डील 10 लाख में तय हुई। पांच लाख रुपये लेने के बाद बाकी रकम के लिए दारोगा व अन्य लगातार फोन कर दबाव बनाते रहे थे, जिस पर संजीव ने तंग आकर सीधे मुनिकीरेती पुलिस से नहीं, बल्कि राज्य पुलिस के मुखिया डीजीपी से शिकायत कर दी।
कोट्स
मामले की जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। रिपोर्ट में क्या-क्या था यह सब गोपनीय है। इससे आगे फिल्हाल में कुछ नहीं बता सकता।
- हरीश वर्मा, एएसपी, कोटद्वार
विज्ञापन
वेदांशा इंटरनेशनल योग अकादमी संचालक को एनडीपीएस और नारकोटिक्स के केस में फंसाने के मामले में पीड़ित ने स्थानीय पुलिस से शिकायत क्यों नहीं की? यह सवाल लगातार बना हुआ है। हालांकि, अभी रंगदारी के प्रकरण में यह पहली परत उखड़ी है। मुकदमे में सिर्फ छह लोग ही नहीं, बल्कि अन्य भी शामिल होने की संभावना है। खास बात यह है कि अन्य में किस-किस के नाम सामने आते हैं, यह भी देखना दिलचस्प होगा।
मुनिकीरेती स्थित तपोवन में योग विद्या के प्रचार-प्रसार के लिए योगाचार्य संजीव कुमार पांडे ने अकादमी खोली। बकौल, संजीव मकसद अकादमी के माध्यम से योग का प्रचार-प्रसार करना है। अकादमी के संचालन के दौरान 12 जुलाई को उनके साथ हुई घटना ने लोगों की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वालों पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मुकदमे में महिला दारोगा दीपा शर्मा, राकेश कुमार, नितिन ठाकुर और अकादमी के निष्कासित कर्मचारी अभिषेक, प्रदीप व दीपिका के अलावा और अन्य भी शामिल हैं। अभी अन्य में कौन-कौन हैं, उनके नामों को उजागर होना बाकी है।
विज्ञापन
कौन हैं राकेश और नितिन
योग अकादमी के संचालक संजीव कुमार पांडेय ने बताया कि स्पेशल ब्रांच की महिला दारोगा दीपा शर्मा के साथ दो लोग और थे, लेकिन वह कौन थे, यह अभी पता नहीं है। दारोगा ने उन्हें भी अधीनस्थ अधिकारी बताया था। हालांकि, इस पर अभी कोई भी अधिकारी कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। दीपा के साथ राकेश और नितिन ठाकुर नामक दो व्यक्ति थे। सवाल यह भी आखिर राकेश व नितिन कौन हैं? पुलिस दोनों के ही संबंध में फिलहाल किसी भी जानकारी के होने से इनकार रही है।
विज्ञापन
निष्कासित कर्मचारियों तक क्यों पहुंचा मामला
वेदांशा अकादमी में कार्यरत कर्मचारी अभिषेक, प्रदीप कुमार और दीपिका संचालक योगाचार्य संजीव कुमार पांडे ने कुछ समय पहले निकाल दिया था। मामले में संलिप्तता होने की आशंका के बाद उनके नाम भी शिकायत में दर्ज किए गए। संजीव ने बताया कि कर्मचारियों को लापरवाही के चलते निकाल दिया गया था।
दवाइयों की शीशी के साथ खींची थी फोटो
योगाचार्य संजीव कुमार पांडे की अकादमी में फिल्मी स्टाइल में स्पेेशल ब्रांच की महिला दारोगा दीपा शर्मा दो लोगों के साथ पहुंची थी। पांडे का दावा है कि दारोगा के पास पहले से कई दवाईयां और जहरीले पदार्थ की शीशियां थी, जिसके साथ उन्होंने मेरी फोटो खींची। विदेशियों को नशा बेचने के आरोप में नारकोटिक्स और एनडीपीएस में फंसाने की धमकी दी। मामला दबाने के लिए डील 10 लाख में तय हुई। पांच लाख रुपये लेने के बाद बाकी रकम के लिए दारोगा व अन्य लगातार फोन कर दबाव बनाते रहे थे, जिस पर संजीव ने तंग आकर सीधे मुनिकीरेती पुलिस से नहीं, बल्कि राज्य पुलिस के मुखिया डीजीपी से शिकायत कर दी।
कोट्स
मामले की जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है। रिपोर्ट में क्या-क्या था यह सब गोपनीय है। इससे आगे फिल्हाल में कुछ नहीं बता सकता।
- हरीश वर्मा, एएसपी, कोटद्वार