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एम्स में सिर्फ नाम की पुलिस चौकी
Updated Sat, 26 May 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में पुलिस चौकी खोल तो दी है लेकिन चौकी में पर्याप्त पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं है। यहां तैनात दारोगा भी चौकी में बैठने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में पीड़ित लोगों को एम्स चौकी से मदद नहीं मिलने पर आईडीपीएल पुलिस चौकी के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। एम्स संस्थान परिसर में बीती 13 फरवरी को विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, निदेशक प्रोफेसर डॉ. रवि कांत और एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने संयुक्त रूप से पुलिस चौकी का उद्घाटन किया था।
पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि एम्स में चिकित्सकों, कर्मचारियों, मरीजों और उनके तीमारदारों को सुरक्षा मुहैय्या कराई जाएगी। लेकिन तीन महीने के भीतर ही पुलिस के इस दावे का दम निकलता दिख रहा है। चौकी में चार पुलिसकर्मी व एक दारोगा की तैनाती की बात पुलिस अधिकारियों ने कही थी, लेकिन वर्तमान में चौकी में महज दो पुलिसकर्मी ही तैनात दिखाई पड़ते हैं, जिसमें एक महिला पुलिसकर्मी है। चौकी का जिम्मा संभालने वाले उपनिरीक्षक चौकी में कभी कबार ही बैठते हैं। लिहाजा न्याय की गुहार लगाने को चौकी पहुंचने वाले पीड़ितों को आईडीपीएल भेज दिया जाता है।
एम्स प्रशासन उठा चुका है सवाल
एम्स में किसी दुर्घटना या फिर अन्य मामले में मौत के मामले में संस्थान के कर्मचारियों को इसकी लिखित सूचना देने के लिए आईडीपीएल पुलिस चौकी जाना पड़ता है। जबकि संस्थान परिसर में पुलिस चौकी स्थापित है। इसके अलावा विवाद व अन्य मामले भी आईडीपीएल में निपटाए जाते हैं। इसकी पुष्टि एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल कर चुके हैं। उन्होंने इस बाबत महकमे के आला अधिकारियों से शिकायत की बात भी कही है।
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क्या कहती हैं एसएसपी
जिले में दारोगाओं की कमी के चलते इस प्रकार की दिक्कत पेश आ रही है। भर्ती से नए उपनिरीक्षक जल्द मिल रहे हैं, जिसके बाद एम्स चौकी में नियमित रूप से एसआई की तैनाती की जाएगी।
- निवेदिता कुकरेती, एसएसपी, देहरादून
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अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश में पुलिस चौकी खोल तो दी है लेकिन चौकी में पर्याप्त पुलिसकर्मियों की तैनाती नहीं है। यहां तैनात दारोगा भी चौकी में बैठने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में पीड़ित लोगों को एम्स चौकी से मदद नहीं मिलने पर आईडीपीएल पुलिस चौकी के चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है। एम्स संस्थान परिसर में बीती 13 फरवरी को विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, निदेशक प्रोफेसर डॉ. रवि कांत और एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने संयुक्त रूप से पुलिस चौकी का उद्घाटन किया था।
पुलिस की ओर से दावा किया गया था कि एम्स में चिकित्सकों, कर्मचारियों, मरीजों और उनके तीमारदारों को सुरक्षा मुहैय्या कराई जाएगी। लेकिन तीन महीने के भीतर ही पुलिस के इस दावे का दम निकलता दिख रहा है। चौकी में चार पुलिसकर्मी व एक दारोगा की तैनाती की बात पुलिस अधिकारियों ने कही थी, लेकिन वर्तमान में चौकी में महज दो पुलिसकर्मी ही तैनात दिखाई पड़ते हैं, जिसमें एक महिला पुलिसकर्मी है। चौकी का जिम्मा संभालने वाले उपनिरीक्षक चौकी में कभी कबार ही बैठते हैं। लिहाजा न्याय की गुहार लगाने को चौकी पहुंचने वाले पीड़ितों को आईडीपीएल भेज दिया जाता है।
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एम्स प्रशासन उठा चुका है सवाल
एम्स में किसी दुर्घटना या फिर अन्य मामले में मौत के मामले में संस्थान के कर्मचारियों को इसकी लिखित सूचना देने के लिए आईडीपीएल पुलिस चौकी जाना पड़ता है। जबकि संस्थान परिसर में पुलिस चौकी स्थापित है। इसके अलावा विवाद व अन्य मामले भी आईडीपीएल में निपटाए जाते हैं। इसकी पुष्टि एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल कर चुके हैं। उन्होंने इस बाबत महकमे के आला अधिकारियों से शिकायत की बात भी कही है।
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क्या कहती हैं एसएसपी
जिले में दारोगाओं की कमी के चलते इस प्रकार की दिक्कत पेश आ रही है। भर्ती से नए उपनिरीक्षक जल्द मिल रहे हैं, जिसके बाद एम्स चौकी में नियमित रूप से एसआई की तैनाती की जाएगी।
- निवेदिता कुकरेती, एसएसपी, देहरादून