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डूबती टिहरी का दर्द बयां किया
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:45 AM IST
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डूबती टिहरी का दर्द बयां किया
ब्यूरो/अमर उजाला
विकासनगर। टिहरी के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में वरिष्ठ साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी ने तिलक भवन में बांध में डूबती टिहरी पर लिखी उत्तराखंड के साहित्यकारों की मार्मिक कविताओं की प्रदर्शनी लगाई।
शुभारंभ पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात ने किया। उन्होंने कहा कि सभ्यता से जुड़े किसी भी शहर का डूबना बड़ा दुखद होता है, लेकिन समय परिवर्तनशील होता है, जो समय के साथ नही चलते वे उन्नति और विकास की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। प्रदर्शनी में प्रसिद्ध साहित्यकार गंगा प्रसाद विमल, मंगलेश डबराल, श्रीदेव सुमन, श्रीराम शर्मा प्रेम, लोकेश नवानी, हेमचंद्र सकलानी, नरेंद्र सिंह नेगी समेत 50 से अधिक साहित्यकार, कवियों और गीतकारों की रचनाओं को प्रस्तुत किया गया। कविताओं के माध्यम से डूबती हुई टिहरी के दर्द को समझने का प्रयास किया गया।
पूर्व पालिकाध्यक्ष नीरज अग्रवाल ने कहा कि आज बढ़ती हुई जनसंख्या के दुष्परिणामों से जनता को सचेत करने की जरूरत है। संचालन करते हुए सुरेश रावत ने टिहरी के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 28 दिसंबर 1815 में आज के ही दिन टिहरी वजूद में आया। इस मौके पर पूरन प्रसाद भट्ट, जीत सिंह नेगी, विमलकांत नौटियाल, ओपी राणा, जीवन सिंह सजवाण, रवि अग्रवाल, रविंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।
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विकासनगर। टिहरी के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में वरिष्ठ साहित्यकार हेमचंद्र सकलानी ने तिलक भवन में बांध में डूबती टिहरी पर लिखी उत्तराखंड के साहित्यकारों की मार्मिक कविताओं की प्रदर्शनी लगाई।
शुभारंभ पूर्व कैबिनेट मंत्री नवप्रभात ने किया। उन्होंने कहा कि सभ्यता से जुड़े किसी भी शहर का डूबना बड़ा दुखद होता है, लेकिन समय परिवर्तनशील होता है, जो समय के साथ नही चलते वे उन्नति और विकास की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। प्रदर्शनी में प्रसिद्ध साहित्यकार गंगा प्रसाद विमल, मंगलेश डबराल, श्रीदेव सुमन, श्रीराम शर्मा प्रेम, लोकेश नवानी, हेमचंद्र सकलानी, नरेंद्र सिंह नेगी समेत 50 से अधिक साहित्यकार, कवियों और गीतकारों की रचनाओं को प्रस्तुत किया गया। कविताओं के माध्यम से डूबती हुई टिहरी के दर्द को समझने का प्रयास किया गया।
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पूर्व पालिकाध्यक्ष नीरज अग्रवाल ने कहा कि आज बढ़ती हुई जनसंख्या के दुष्परिणामों से जनता को सचेत करने की जरूरत है। संचालन करते हुए सुरेश रावत ने टिहरी के इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 28 दिसंबर 1815 में आज के ही दिन टिहरी वजूद में आया। इस मौके पर पूरन प्रसाद भट्ट, जीत सिंह नेगी, विमलकांत नौटियाल, ओपी राणा, जीवन सिंह सजवाण, रवि अग्रवाल, रविंद्र वर्मा आदि मौजूद रहे।
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