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उतराखंड वन विकास निगम में लाखों का गड़बड़झाला , जांच के आदेश
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। उत्तराखंड वन विकास निगम में वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 में अधिकारियों के खानपान पर 47 लाख रुपये हजम किए गए। इसके अलावा लाखों रुपये की सामग्री कौड़ियों के भाव नीलाम करने और गाड़ियों की मरम्मत व पेट्रोल-डीजल में लाखों रुपये की हेराफेरी करने का मामला सामने आया है। शिकायत पर अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। मामले की जांच सचिव वन एवं पर्यावरण को सौंपी गई है।
आरटीआई क्लब के अध्यक्ष डॉक्टर बीपी मैठाणी ने अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह को दर्ज करायी शिकायत में बताया कि उत्तराखंड वन विकास निगम के अधिकारियों ने खानपान पर ही 47 लाख रुपये डकारे दिए। इसके अलावा वन विकास निगम में कार्यरत स्टोर कीपर को चेक के माध्यम से 50,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया। अधिकारियों ने गाड़ियों की मरम्मत और तेल की खरीद में भी बड़े पैमाने पर हेराफेरी की है। स्टेशनरी खरीद में लाखों रुपये हजम कर लिए। शिकायत में कहा गया कि निगम अधिकारियों ने साठगांठ कर लाखों रुपये की सामग्री कौड़ियों में नीलाम कर दी है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने जांच कर तीन माह के भीतर रिपोर्ट देने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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देहरादून। उत्तराखंड वन विकास निगम में वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 में अधिकारियों के खानपान पर 47 लाख रुपये हजम किए गए। इसके अलावा लाखों रुपये की सामग्री कौड़ियों के भाव नीलाम करने और गाड़ियों की मरम्मत व पेट्रोल-डीजल में लाखों रुपये की हेराफेरी करने का मामला सामने आया है। शिकायत पर अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। मामले की जांच सचिव वन एवं पर्यावरण को सौंपी गई है।
आरटीआई क्लब के अध्यक्ष डॉक्टर बीपी मैठाणी ने अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह को दर्ज करायी शिकायत में बताया कि उत्तराखंड वन विकास निगम के अधिकारियों ने खानपान पर ही 47 लाख रुपये डकारे दिए। इसके अलावा वन विकास निगम में कार्यरत स्टोर कीपर को चेक के माध्यम से 50,000 रुपये का भुगतान कर दिया गया। अधिकारियों ने गाड़ियों की मरम्मत और तेल की खरीद में भी बड़े पैमाने पर हेराफेरी की है। स्टेशनरी खरीद में लाखों रुपये हजम कर लिए। शिकायत में कहा गया कि निगम अधिकारियों ने साठगांठ कर लाखों रुपये की सामग्री कौड़ियों में नीलाम कर दी है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने जांच कर तीन माह के भीतर रिपोर्ट देने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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