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बंदियों की कानूनी लड़ाई में हाथ बंटाते हैं रणवीर के हत्यारे
Updated Wed, 07 Feb 2018 02:04 AM IST
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बंदियों की कानूनी लड़ाई में हाथ बंटाते हैं रणवीर के हत्यारे
ब्यूरो/राकेश शर्मा
देहरादून।
रणवीर हत्याकांड में सजा काट रहे निलंबित इंस्पेक्टर एसके जायसवाल और जीडी भट्ट कारागार में बंदियों की कानूनी लड़ाई में हाथ बंटा रहे हैं। जेल से बाहर भले ही उनकी भूमिका खलनायक की हो, मगर अंदर वह बंदियाें के कानूनी सलाहकार की भूमिका में हैं। सुनवाई और पैरोल को बंदियाें की तरफ से दिए जाने वाले प्रार्थना-पत्र का ड्रॉफ्ट भी वे ही तैयार करते हैं। इसके बदले उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से हर माह मेहनताना भी दिया जाता है।
रणवीर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे डालनवाला कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर एसके जायसवाल और आराघर के चौकी प्रभारी जीडी भट्ट भले ही अपनी कानूनी लड़ाई में लगातार हार रहे हों, मगर बंदियों की नजर में वह बेहतर लीगल एडवाइजर बने हुए हैं। समाज में भले ही मुठभेड़ में रणवीर की हत्या को लेकर उनकी छवि बदरंग हो गई है, लेकिन बंदियाें की नजर में उनकी छवि कानूनी विशेषज्ञाें से कम नहीं है। लंबे समय पुलिस से जुड़े रहने के कारण उन्हें कानून के हर दाव-पेंच की जानकारी है।
दरअसल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से प्रत्येक जेल में बंदियों को विधिक परामर्श के लिए पैरा विधिक कार्यकर्ता उपलब्ध कराए जाते हैं। रणवीर हत्याकांड में जेल में बंद जायसवाल और जीडी भट्ट काफी समय से लीगल कार्यकर्ता के रूप मेें अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। विभिन्न अपराधों में जेल जाने वाले बंदियाें को लीगल टीम कानूनी जानकारी उपलब्ध कराती है। केस में सुनवाई के दौरान बंदियाें द्वारा दिए जाने वाले प्रार्थना-पत्र भी उनकी तरफ से ही तैयार होते हैं। यही नहीं धाराओं को लेकर उनके द्वारा बंदियाें और उनकी वकीलों को राय दी जाती है। पैरोल और परिजनों को भेजे जाने वाली चिट्ठी भी उनके द्वारा लिखी जाती है। जायसवाल और भट्ट के अलावा लीगल टीम में कई अन्य बंदी भी है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उन्हें प्रतिमाह चार हजार रुपये का मेहनताना दिया जाता है।
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ब्यूरो/राकेश शर्मा
देहरादून।
रणवीर हत्याकांड में सजा काट रहे निलंबित इंस्पेक्टर एसके जायसवाल और जीडी भट्ट कारागार में बंदियों की कानूनी लड़ाई में हाथ बंटा रहे हैं। जेल से बाहर भले ही उनकी भूमिका खलनायक की हो, मगर अंदर वह बंदियाें के कानूनी सलाहकार की भूमिका में हैं। सुनवाई और पैरोल को बंदियाें की तरफ से दिए जाने वाले प्रार्थना-पत्र का ड्रॉफ्ट भी वे ही तैयार करते हैं। इसके बदले उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से हर माह मेहनताना भी दिया जाता है।
रणवीर हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे डालनवाला कोतवाली के तत्कालीन इंस्पेक्टर एसके जायसवाल और आराघर के चौकी प्रभारी जीडी भट्ट भले ही अपनी कानूनी लड़ाई में लगातार हार रहे हों, मगर बंदियों की नजर में वह बेहतर लीगल एडवाइजर बने हुए हैं। समाज में भले ही मुठभेड़ में रणवीर की हत्या को लेकर उनकी छवि बदरंग हो गई है, लेकिन बंदियाें की नजर में उनकी छवि कानूनी विशेषज्ञाें से कम नहीं है। लंबे समय पुलिस से जुड़े रहने के कारण उन्हें कानून के हर दाव-पेंच की जानकारी है।
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दरअसल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से प्रत्येक जेल में बंदियों को विधिक परामर्श के लिए पैरा विधिक कार्यकर्ता उपलब्ध कराए जाते हैं। रणवीर हत्याकांड में जेल में बंद जायसवाल और जीडी भट्ट काफी समय से लीगल कार्यकर्ता के रूप मेें अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। विभिन्न अपराधों में जेल जाने वाले बंदियाें को लीगल टीम कानूनी जानकारी उपलब्ध कराती है। केस में सुनवाई के दौरान बंदियाें द्वारा दिए जाने वाले प्रार्थना-पत्र भी उनकी तरफ से ही तैयार होते हैं। यही नहीं धाराओं को लेकर उनके द्वारा बंदियाें और उनकी वकीलों को राय दी जाती है। पैरोल और परिजनों को भेजे जाने वाली चिट्ठी भी उनके द्वारा लिखी जाती है। जायसवाल और भट्ट के अलावा लीगल टीम में कई अन्य बंदी भी है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण उन्हें प्रतिमाह चार हजार रुपये का मेहनताना दिया जाता है।
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