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परिवार ही करता है बेटा और बेटी में भेद

Fri, 08 Mar 2019 01:50 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 08 Mar 2019 01:50 AM IST
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परिवार ही करता है बेटा और बेटी में भेद
एसएसपी निवेदिता कुकरेती
ब्यूरो/अमर उजाला।
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देहरादून। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग (आईआईआरएस) में बृहस्पतिवार को महिला दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित कार्यक्रम में एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने कहा कि बेटा-बेटी के बीच भेद परिवार ही करता है। आगे बढ़कर यह भेद बड़ा अंतर बन जाता है। जिसकी वजह से महिलाओं को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

कार्यक्रम की बतौर मुख्य अतिथि एसएसपी निवेदिता कुकरेती ने कहा कि लोग अपनी बेटियों को बेटों की तरह पालने का दावा करते हैं। यहीं से अंतर की शुरूआत होती है। बेटी को बेटों की तरह पालने की क्या जरूरत है? बेटियां, बेटियां ही होती हैं, उनकी जगह कोई और क्यों ले? बेटियों को अपना रास्ता चुनने की आजादी होनी चाहिए। उन पर ये बात नहीं थोपी जानी चाहिए कि उन्हें नौकरी ही करनी है। वे गृहणी बनकर परिवार और समाज को सुदृढ़ बना सकती हैं। साथ ही यदि कारोबार में आना चाहती हैं तो वे देश की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देने में सक्षम हैं। लेकिन, दुख तब होता है जब परिवार ही बेटा और बेटी में फर्क बताता है। जन्म के कुछ दिन तक तो यह फर्क नहीं होता, लेकिन उसके बाद परिवार ही बताता है कि बेटा और बेटी क्या है।
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