विदेश का फंडा देश में फेल, CPU की खुली पोल
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व्यवस्थाएं सुधारने को विदेशी फंडा तो अपनाया गया लेकिन वह देश में फेल हो गया। विदेश की तर्ज पर हाईटेक संसाधन से लैस कर सड़क पर उतारी गई सीपीयू केवल देसी शराब के तस्कर दबोचने तक ही सिमटकर रह गई। सीपीयू की यह पोल सूचना के अधिकार के तहत खुली है। सीपीयू एक भी संगीन वारदात के खुलासे में सीपीयू अपना कोई योगदान नहीं दिखा पाई। यही नहीं यातायात व्यवस्था में भी कोई करिश्मा अब तक सीपीयू ने नहीं किया है। वर्ष 2014 में हरिद्वार की सड़क पर सीपीयू को उतारते वक्त डीजीपी बीएस सिद्धू ने बड़े बड़े दावे किए थे, लेकिन एक भी दावे को सीपीयू हकीकत में नहीं बदल पाई।
हां, हेलमेट अनिवार्य कराने में सीपीयू ने जरूर मेहनत की है। इसके अलावा सीपीयू के खाते में कोई उपलब्धि नहीं है। शहर की यातायात व्यवस्था की हालत किसी से छिपी नहीं है। कोई ऐसा चौराहा तिराहा नहीं है, जहां जाम न लगता हो। न ही सीपीयू किसी लुटेरे, चोर को रंगे हाथ दबोच पाई है। एक के बाद एक कई घटनाएं शहर में घट चुकी हैं और सीपीयू की मौजूदगी शहर में अधिक रहती है। सिर्फ और सिर्फ सीपीयू ने अब तक वजूद में आने के बाद से सात बार देसी शराब जरूर पकड़ी है। ये ही केवल सीपीयू की एकमात्र उपलब्धि है।
कहीं है तो, कहीं बिलकुल नहीं
सीपीयू भी शहर में क हीं दिखाई देती है तो कहीं-कहीं वह नदारद है। केवल शहर के अंदर से लेकर भेल मुख्य मार्ग या हाईवे पर सीपीयू सक्रिय रहती है। बहादराबाद, सिडकुल, कनखल, ज्वालापुर एवं मुख्य शहर में भी सीपीयू दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती है।
चंद्राचार्य चौक ही सुधार लो कम से कम
शहर का दिल कहे जाने वाले चंद्राचार्य चौक का ही सबसे बुरा हाल है। यहां दिन भर जाम की स्थिति बनी रहती है, उसकी मुख्य वजह पार्किंग न होना है। वाहन सड़क पर ही पार्क होते हैं, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं होती है। जब चंद्राचार्य चौक की व्यवस्था ही नहीं सुधार पाई है तब शहर के यातायात व्यवस्था में सुधार की उम्मीद भला क्या की जा सकती है।