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कोरोना: हाईकोर्ट में होगी केवल अति आवश्यक मामलों की सुनवाई, कैदियों, वकीलों और गवाहों को भी राहत

Mon, 16 Mar 2020 08:30 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 16 Mar 2020 08:30 PM IST
सार

  • अधिवक्ता की गैर मौजूदगी में पारित नहीं किया जाएगा कोई भी एडवर्स आदेश
  •  

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Coronavirus: Only Urgent case Hearing will Done in Uttarakhand High court, Big Relief to Prisoners
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

कोरोना को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट भी सतर्क हो गया है। इसी क्रम में सोमवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन के साथ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और महाधिवक्ता की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब तक कोरोना वायरस की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती तब तक कोर्ट में अति आवश्यक मामलों की सुनवाई होगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि अधिवक्ता की गैर मौजूदगी में कोई भी एडवर्स आदेश पारित नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में वादकारियों के प्रवेश पर रोक लग सकती है। 

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हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से दिन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की और इसके बाद बार को अवगत कराया कि अधिवक्ता इसमें सहयोग करें और अति आवश्यक मामले ही फाइल करें। यदि कोई अधिवक्ता इस दौरान कोर्ट में सुनवाई के दौरान अनुपस्थित रहता है तो उनके मामलों में एडवर्स आदेश पारित नहीं किए जाएंगे।
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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सचिव जयवर्धन कांडपाल ने बताया कि अभी उत्तराखंड में कोरोना वायरस का केवल एक मामला ही सामने आया है। इसलिए इससे डरने की आवश्यकता नहीं है लेकिन नैनीताल एक पर्यटन नगरी है, इसलिए यहां भी वायरस फैल सकता है। इसके लिए सभी को मिलकर कार्य करना चाहिए। सचिव ने यह भी बताया कि मुख्य न्यायाधीश से वार्ता के दौरान ये बातें भी निकल कर आईं कि तात्कालिक व अत्यावश्यक मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसमें विशेषत: क्रिमिनल और सिविल के डिमोलिशन आदि के मामले प्राथमिकता पर सुने जाएंगे। इसलिए उन्होंने अधिवक्ताओं से अपेक्षा की है कि वे अति आवश्यक मामले ही फाइल करें। 

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कैदियों, वकीलों और गवाहों को राहत 

कोरोना के चलते नैनीताल हाईकोर्ट ने वकीलों से लेकर कैदियों तक को राहत दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि आगामी 31 मार्च तक कोर्ट में केवल आवश्यक काम ही किए जाएंगे। कोई कैदी न रिमांड के लिए आएगा और न ही किसी गवाह की गवाही की बाध्यता होगी। ऐसी स्थिति में किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। 

हाईकोर्ट के इन आदेशों की जानकारी सोमवार को देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल ने दी है। उन्होंने बताया कि कोर्ट परिसर में हर रोज हजारों की तादात में लोग इकट्ठा होते हैं। हर रोज सैकड़ों कैदियों को लेकर पुलिसकर्मी रिमांड व पेशी पर लेकर आते हैं। इन सब स्थिति को देखते हुए एसोसिएशन की ओर से एक मेल हाईकोर्ट नैनीताल को भेजी गई थी। इस पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश रंगनाथन ने सोमवार को आदेश जारी किए हैं। 

एडवोकेट कंडवाल ने बताया कि अधीनस्थ कोर्ट में केवल आवश्यक काम ही किए जाएंगे। इस दौरान कोई गवाह नहीं आएगा। आमतौर पर किसी भी गवाह के न आने पर कोर्ट कार्रवाई कर सकता है, लेकिन 31 मार्च तक कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस दौरान किसी वकील का आना भी अनिवार्य नहीं होगा। कैदियों की वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेशी की जा सकती है। हालांकि, इस दिशा में अभी कोई आदेश या निर्देश नहीं मिला है। 

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