Uttarakhand LockDown: शादी के बाद घर लौटी बरात, दूल्हा-दुल्हन परिवार समेत पहुंचे क्वारंटीन सेंटर
- देहरादून के डोईवाला गई थी बरात, देरी से लौटी
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उत्तराखंड के उत्तरकाशी में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए लॉकडाउन अवधि में बाहरी क्षेत्रों से लौट रहे लोगों को भी 14 दिन तक संस्थागत क्वारंटीन में रखा जा रहा है। बीते दिनों देहरादून से शादी कर लौटे एक जोड़े और उनके परिजनों को भी 14 दिन के लिए क्वारंटीन किया गया है।
बीते मंगलवार को उत्तरकाशी से एक बारात प्रशासन से अनुमति लेकर डोईवाला गई थी। शादी की रस्में पूरी कर विदा होकर उत्तरकाशी लौटने में बरात को विलंब हुआ, तो उत्तरकाशी पहुंचने पर जिला प्रशासन ने दूल्हा-दुल्हन और उनके छह परिजनों को 14 दिन के लिए आयुर्वेदिक अस्पताल में क्वारंटीन कर दिया। बेटी को विदा करने साथ आई उसकी मां को भी क्वारंटीन होना पड़ गया।
डीएम डा. आशीष चौहान ने बताया कि लॉकडाउन के शुरूआती दौर में उत्तरकाशी लौटने वालों को उनके घरों में होम क्वारंटीन किया गया था। उस दौरान बेहद जरूरी नहीं होने पर भी बड़ी संख्या में लोग यहां आ रहे थे, जिससे कोरोना संक्रमण का खतरा बना हुआ था। हालांकि इनमें से अधिकांश 14 दिन का क्वारंटीन पीरियड पूरा कर चुके हैं और किसी में भी कोरोना वायरस के लक्षण नहीं पाए गए हैं। अप्रैल के पहले हफ्ते से जिले में लौटने वालों को संस्थागत क्वारंटीन में रखा जा रहा है, जिससे जिले में प्रवेश करने वालों की संख्या में कमी आई है। इसमें कतई ढील नहीं दी जा रही है।
11 बाहरी मजदूरों के पहुंचने से मचा हड़कंप
गुरुवार देर शाम नौगांव प्रखंड के स्यालना गांव में 11 बाहरी मजदूरों के पहुंचने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। ग्राम प्रधान ने इन मजदूरों को गांव के बाहर स्कूल में ही रोककर पूछताछ की। पता चला कि यह मजदूर गंगा घाटी में गंगोरी संगम चट्टी मोटर मार्ग पर काम कर रहे थे।
वहां से अपने घर मिर्जापुर उत्तर प्रदेश जाने के लिए वह गजोली से जंगल के रास्ते होते हुए स्यालना पहुंचे। लॉकडाउन के दौरान इस तरह मजदूरों के जंगल के रास्ते एक जगह से दूसरी जगह जाने की कोशिश पर सवाल उठ रहे हैं।
थानाध्यक्ष बड़कोट डीएस कोहली ने बताया कि ग्राम प्रधान शीशपाल की सूचना पर पुलिस टीम स्यालना गांव के लिए रवाना कर दी गई है। पड़ताल करने के बाद इस मामले में अग्रिम कार्यवाई की जाएगी। इन मजदूरों के ठेकेदार से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल ग्रामीणों ने इन मजदूरों को गांव में ही रोककर इनके लिए भोजन की व्यवस्था कर दी है।