Coronavirus in Uttarakhand: टिहरी मूल के 18 लोगों को किया क्वारंटीन, भारत में फंसे 350 से ज्यादा नेपाली मजदूरों में आक्रोश
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लॉकडाउन के कारण भारत-नेपाल सीमा पर बने झूला पुलों पर भी आवाजाही बंद कर दी गई है। इसके चलते उत्तराखंड में धारचूला काम करने आए करीब 350 से ज्यादा नेपाली मजदूर भी यहां फंसे हुए हैं।
मजदूर अपने वतन वापस लौटना चाहते हैं लेकिन नेपाल की ओर से झूलापुर न खुलने के कारण वे वहां नहीं लौट पा रहे हैं। ऐसे में एसएसबी सभी मजदूरों को खाना पीना खिला रही है।
रविवार को मजदूरों में आक्रोश दिखाई दिया। नेपाली नागरिकों का कहना था कि वह कोरोना की आशंका से भयभीत हैं। इसके बावजूद नेपाल सरकार पुल के गेट खोलने को लेकर गंभीर नहीं है। हम वापस जाना चाहते हैं। सरकार को इस बात पर ध्यान देना चाहिए।
18 लोगों को मुनिकीरेती में किया क्वारंटीन
ऋषिकेश वीरभद्र मार्ग स्थित काली कमली आश्रम में ठहरे टिहरी जिले के 18 लोगों को मुनिकीरेती स्थित जीएमवीएन के ऋषिलोक गेस्ट हाउस में क्वारंटीन कर दिया गया है। बीते शनिवार शाम ऋषिकेश प्रशासन ने इन सभी लोगों को नरेंद्रनगर प्रशासन के सुपुर्द किया गया।
घटनाक्रम के अनुसार शनिवार शाम के समय ऋषिकेश प्रशासन को वीरभद्र मार्गस्थित काली कमली आश्रय में कुछ पहाड़ी मूल के लोगों के ठहरने की सूचना मिली। सूचना पाकर मौके पर पहुंची तहसीलदार रेखा आर्य ने पाया कि टिहरी जिले के 18 लोग यहां ठहरे हुए थे। पूछने पर उन्होंने बताया कि वह सभी बाहरी प्रदेशों में होटलों में काम करते हैं। देशभर में लॉकडाउन के चलते होटल बंद हो गए हैं। इससे उनके लिए रोजी रोटी की खासी समस्या पैदा हो गई है। उन्होंने बताया कि किसी तरह से वह यहां तो पहुंच गए हैं, मगर यहां वाहन सेवा उपलब्ध न होने के कारण अपने गंतव्यों तक पहुंचने की खासी समस्या पैदा हो गई है।
इस पर तहसीलदार ने नरेंद्रनगर प्रशासन को सूचित किया और सभी को मुनिकीरेती स्थित जीएमवीएन के ऋषिलोक गेस्ट हाउस पहुंचाया। यहां स्वास्थ्य विभाग फकोट की टीम डॉ. जगदीश जोशी के नेतृत्व में सभी लोगों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया गया। नरेंद्रनगर तहसीलदार मंजू राजपूत ने बताया कि स्वास्थ्य परीक्षण में सभी लोग सही पाए गए हैं। कोरोना की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षा के एहतियात सभी को क्वारंटीन किया गया है। इस दौरान सीओ नरेंद्रनगर उत्तम सिंह और मुनिकीरेती थाना प्रभारी आरके सकलानी ने भी मौके का निरीक्षण किया।
इलाहाबाद में फंसे जौनसार बावर के 45 छात्र
वहां पर मैस को बंद कर दिया गया है। टिफिन सर्विस को भी बंद कर दिया गया है। जिसके चलते इन छात्रों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। लॉकडाउन के चलते अभिभावक अपने छात्रों के पास पैसे भी नहीं भेज पा रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों ने मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है। अभिभावक चतर सिंह चौहान, दीवान सिंह चौहान, दीप सिंह पंवार, देवी सिंह, अजब सिंह राय, मान सिंह चौहान, राजेंद्र सिंह राय, अर्जुन सिंह राय, भगवान चौहान, गंगा सिंह, नरेंद्र सिंह तोमर, जालम सिंह चौहान, अर्जुन सिंह तोमर, दिनेश चौहान, प्रताप सिंह, बलवंत सिंह पंवार, जगत सिंह चौहान मुन्ना चौहान, दर्मियान सिंह पंवार, तोलाराम, ज्ञान सिंह तोमर, अतर सिंह रावत, सियाराम रावत आदि का कहना है कि सरकार को इन छात्रों को वापस लाने का इंतजाम करना चाहिए। लॉकडाउन के चलते कई मकान मालिक छात्रों को वहां से निकाल रहे हैं।