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अमर उजाला एक्सक्लूसिव : अब बाहर नहीं जाना चाहते कोरोना काल में घर आए  65% ‘माटी के लाल’

Fri, 16 Oct 2020 09:43 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 16 Oct 2020 09:43 AM IST
सार

  • पलायन आयोग की रिपोर्ट : प्रदेश सरकार की रिवर्स पलायन की योजना को भी मिल सकता है सहारा

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coronavirus in uttarakhand latest news : uttarakhandi do not want to go out from state who come back in lockdown
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : net

विस्तार

रिवर्स पलायन के मामले में उत्तराखंड को बड़ी राहत मिलने के संकेत मिले हैं। कोरोना काल में गांवों को लौटे प्रवासियों में से करीब 35 प्रतिशत प्रवासी ही वापस जाने के इच्छुक हैं। बाकी 65 फीसदी लोग अब सदा के लिए अपनी जड़ों और माटी से जुड़ा रहना चाहते हैं। टिहरी जिले के अध्ययन में पलायन आयोग ने यह भी पाया है कि करीब 25 प्रतिशत प्रवासी तो सीधे तौर पर खेती से जुड़े हैं।

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कोरोना के कारण घर लौटे प्रवासियों से पलायन आयोग संपर्क भी साध रहा है। लॉकडाउन के दौरान आयोग को फीडबैक मिला था कि अधिकतर प्रवासी लॉकडाउन के हटते ही वापस लौटने की कोशिश भी करेंगे। यह मामला सीधे तौर पर प्रदेश की ओर से रिवर्स पलायन की योजना से जुड़ा हुआ है।

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करीब 65 प्रतिशत प्रवासी वापस जाने के इच्छुक नहीं

अब पलायन आयोग का अध्ययन बता रहा है कि इसमें इतने भी बुरे हालात नहीं हैं। आयोग इस समय दूसरे दौर का अध्ययन कर रहा है और अनलॉक-5 में यह भी सामने आया है कि कई जिलों में प्रवासी वापस अपनी जड़ों से जुड़ने की कोशिश में हैं।

टिहरी जिले में ही आयोग ने पाया कि करीब 65 प्रतिशत प्रवासी वापस जाने के इच्छुक नहीं हैं। इनमें से 25 प्रतिशत प्रवासी तो खेती से जुड़ भी चुके हैं। पौड़ी में यह तस्वीर अलग है। यहां करीब एक तिहाई प्रवासी ही रुकने का मन बना रहे हैं। पौड़ी जिला ही देश के उन चुनिंदा जिलों में शामिल है, जहां पलायन होने की वजह से जनसंख्या दशकीय वृद्धि दर शून्य से नीचे है।

15 दिन में रिपोर्ट होेगी तैयार

पलायन आयोग के मुताबिक प्रवासियों से दूसरे दौर की बातचीत के आधार पर रिपोर्ट 15 दिन में तैयार हो जाएगी। पलायन आयोग विकासखंड स्तर पर इस रिपोर्ट को तैयार कर रहा है। पौड़ी में 15 विकास खंड हैं और इस वजह से इसमें समय लग रहा है।

सरकार के लिए भी रिपोर्ट महत्वपूर्ण, इसी आधार पर तय होंगी योजनाएं

प्रदेश सरकार वैसे प्रवासियों को रोकने के लिए कई तरह से कोशिश कर रही है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और सौर ऊर्जा को आधार भी बनाया जा रहा है। इतना होने पर भी अभी यह पूरी तरह से साफ नहीं है कि प्रवासी किस तरह के काम में खुद को शामिल करना चाहते हैं। आयोग के मुताबिक 25 प्रतिशत प्रवासी अगर सीधे खेती से जुड़े हैं तो यह आगे का रोड मैप भी तैयार करता है।

पलायन आयोग ने रिपोर्ट करीब-करीब तैयार कर ली है। यह 15 दिन में जारी भी हो जाएगी। सबसे उत्साहजनक तस्वीर टिहरी से सामने आई है। यहां करीब 35 प्रतिशत प्रवासी ही वापस लौटने के इच्छुक हैं। प्रवासियों की इस स्थिति को देखते हुए प्रदेश सरकार को आगे की योजना भी तैयार करनी होगी।
- डा. एसएस नेगी, अध्यक्ष, राज्य पलायन आयोग

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