Coronavirus: उत्तराखंड में अभी नहीं खोला जाएगा अंतरराज्यीय परिवहन, लागू हो सकता है ये नया नियम
- प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए शासन ने प्रस्ताव किया स्थगित
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया निर्णय
- यूपी रोडवेज की ओर से बसों के संचालन का आया था प्रस्ताव
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड में फिलहाल दूसरे राज्यों की बसों के संचालन पर प्रतिबंध बना रहेगा। सरकार ने राज्य में अंतरराज्यीय परिवहन को खोलने का प्रस्ताव स्थगित कर दिया है। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की ओर से उत्तराखंड में बसों के संचालन का प्रस्ताव भेजा गया था।
मंगलवार को सचिवालय में मुख्य सचिव ओम प्रकाश की अध्यक्षता में हुई बैठक में यूपी रोडवेज की बसों के उत्तराखंड में संचालित करने के प्रस्ताव को स्थगित करने का निर्णय लिया गया। कोविड-19 महामारी से बचाव के लिए प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने के लिए प्रतिदिन दो हजार लोगों की सीमा तय है। बसों के संचालन की अनुमति देने से यह सीमा बढ़ जाएगी। दूसरी वजह राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी है, रिकवरी रेट भी अभी अच्छा नहीं है।
तीसरी वजह यूपी रोडवेज की बसों में अभी 100 प्रतिशत सवारी और सामान्य किराया लिया जा रहा है। जबकि उत्तराखंड में संचालित हो रहीं बसों में 50 फीसदी सवारी और दोगुना किराया लागू है। इस विरोधाभासी स्थिति को देखते हुए प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया है। सचिव परिवहन शैलेश बगौली ने प्रस्ताव स्थगित करने की पुष्टि की है।
बसों में 75 प्रतिशत सवारी, डेढ़ गुना किराया संभव
राज्य के भीतर संचालित हो रहीं बसों में जल्द 75 प्रतिशत सवारी और डेढ़ गुना किराये का नियम लागू किया जा सकता है। अभी सरकार ने बसों में दोगुने के किराये पर 50 प्रतिशत सवारी बैठाने की अनुमति दे रखी है, लेकिन परिवहन से जुड़े तमाम संगठनों की ओर से बसों की सवारियों की संख्या में बढ़ोतरी की मांग की जा रही है।
इस प्रस्ताव पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में विचार-विमर्श हुआ। बैठक में 75 प्रतिशत सवारी और डेढ़ गुना किराया करने पर सहमति बनी। अब यह प्रस्ताव परिवहन विभाग की ओर से 26 अगस्त को होने वाली कैबिनेट में लाया जाएगा। कैबिनेट की मंजूरी के बाद नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।