Corona in Uttarakhand: शुक्रवार को मिले 868 संक्रमित, ठीक होने वाले मरीजों का बना रिकॉर्ड
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उत्तराखंड में शुक्रवार को 24 घंटे में 868 कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं। वहीं, प्रदेश में संक्रमितों का आंकड़ा 38 हजार के पार हो गया है। आज 1285 मरीज स्वस्थ होकर घर लौटे हैं।
उत्तराखंड में पहली बार ठीक होने वाले मरीजों का रिकॉर्ड बना है। एक दिन में नए कोरोना मरीजों से ज्यादा संक्रमित मरीज ठीक हुए हैं। कोरोना के 188 दिन (छह माह) में पहली बार नए कोरोना मामलों से ज्यादा संक्रमित मरीज ठीक हुए हैं। इससे पहले 16 सितंबर को ठीक होने वाले मरीजों की संख्या 1192 थी, लेकिन कोरोना संक्रमित मामले 1540 थे।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी हेल्थ बुलेटिन के अनुसार, आज 11267 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। आज देहरादून जिले में सबसे अधिक 359 मरीज मिले हैं। ऊधमसिंह नगर में 161, हरिद्वार में 106, नैनीताल में 83, पौड़ी में 32, बागेश्वर में 29, अल्मोड़ा में 26, चमोली में 21, उत्तरकाशी में 19, टिहरी में 10, पिथौरागढ़ 9, चंपावत में सात, रुद्रप्रयाग में 6 लोग कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं। मरीजों की संख्या 38007 हो गई है।
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प्रदेश में आज चार कोरोना मरीजों की मौत हुई है। सभी मरीज एम्स ऋषिकेश में भर्ती थे। अब तक मरने वालों की संख्या 464 हो गई है। वहीं, 26095 मरीज ठीक हो चुके हैं। सक्रिय मरीज की संख्या 11293 पहुंच गई है।
संक्रमण दर ज्यादा, रिकवरी दर कम
उत्तराखंड में कोरोना वायरस का प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। सितंबर में प्रदेश की संक्रमण दर राष्ट्रीय दर से ज्यादा है। जबकि रिकवरी दर कम है। अनलॉक-4 में एक से 17 सितंबर तक 1.75 लाख से अधिक लोगों की जांच की गई है। इसमें 17256 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। वहीं, रिकवरी दर भी 70 प्रतिशत से कम है।
कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रदेश में पहले की तुलना में जांच बढ़ी है। इसके साथ ही कोरोना संक्रमण की रफ्तार भी तेज हुई है। प्रदेश में पहला संक्रमित मरीज मिलने के बाद से अब तक हुई सैंपलों की जांच के आधार पर संक्रमण दर 6.84 प्रतिशत है।
लेकिन अनलॉक-4 में एक सितंबर से संक्रमण दर 9.84 प्रतिशत रही है। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर संक्रमण की दर 8.47 प्रतिशत है। कोरोना संक्रमितों की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या कम है। इससे प्रदेश की रिकवरी दर 67 प्रतिशत है।
राष्ट्रीय स्तर पर रिकवरी दर 79 प्रतिशत है। कोरोना आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि एक सितंबर के बाद से संक्रमण दर बढ़ी है।
सरकारी लैब जांच में पीछे
कोविड टेस्ट करने में निजी पैथोलॉजी लैब की तुलना में सरकारी लैब पीछे हैं। 17 दिनों में प्रदेश में 1.75 लाख से ज्यादा सैंपलों की जांच की गई। इसमें 96 हजार सैंपल टेस्ट निजी लैब में हुए हैं। सरकारी लैब में 79 हजार से अधिक सैंपलों की जांच हुई है।
आशारोड़ी पर कोरोना की जांच के लिए अब दो विकल्प
अब देहरादून में आशारोड़ी चेकपोस्ट पर कोविड-19 टेस्ट को लेकर दो विकल्प मिलेंगे। लोगों की सहूलियत को देखते हुए शुक्रवार से निजी लैब के साथ ही स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल बना दिए गए हैं। यहां एंटीजन टेस्ट निशुल्क होगा। पेड लैब टेस्ट को लेकर दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों के आक्रोश को देखते हुए यह व्यवस्था बनाई गई है।
जिला प्रशासन ने दून के सभी बॉर्डर पर हाई लोड वाले 31 शहरों से आने वाले लोगों के लिए कोविड-19 टेस्ट अनिवार्य कर दिया है। इसे लेकर आशारोड़ी चेकपोस्ट पर प्राइवेट लैब के पेड स्टॉल लगाए गए। जहां जिले में आने वाले सभी लोगों को टेस्ट कराने के लिए कहा जा रहा है।
जिसे लेकर लोग नाराजगी जताते हुए विरोध दर्ज करा रहे थे। कई लोग तो बगैर टेस्ट कराए बॉर्डर से वापस लौट गए। लेकिन, शुक्रवार से निजी लैब के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से एंटीजन टेस्ट शुरू करने से लोगों को काफी राहत मिली। निजी लैब के बजाए लोग स्वास्थ्य विभाग के स्टाल पर ज्यादा दिखाई दिए।
जानकारी न होने के कारण भी हो रही परेशानी
जिले के बार्डर पर कोविड-19 टेस्ट की जानकारी न होने के कारण भी लोगों को परेशानी हो रही है। शुक्रवार को रिश्तेदारी में सहारनपुर से पहुंचे रविंद्र कुमार को चेकपोस्ट पर रोक लिया गया। रजिस्ट्रेशन न होने पर तैनात कर्मचारियों ने स्मार्ट सिटी की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन के लिए कहा। लेकिन, वह रजिस्ट्रेशन नहीं कर पाया, जिसके कारण उन्हें वापस लौटना पड़ा।
कुछ ऐसा ही हाल राजेश कुमार और अमित यादव का रहा। हालांकि करीब 30 मिनट की मशक्कत के बाद उनका रजिस्ट्रेशन हो गया। इसके बाद एंटीजन टेस्ट कराने के बाद उन्हें जिले में इंट्री दे दी गई। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी दिखे, जिनके द्वारा दून से व्यक्ति को बॉर्डर पर बुला लिया गया और सामान देकर वह वापस लौट गए।
टेस्ट को लेकर असमंजस
कोविड-19 टेस्ट को लेकर भी असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। कार से पहुंच रहे लोगों का कहना है कि किसी एक व्यक्ति का टेस्ट किया जाए। उसी के आधार पर जिले में इंट्री दी जाए। पहले भी बार्डर पर कुछ ऐसी ही व्यवस्था की गई थी। वहीं, वहां तैनात स्वास्थ्य विभाग की टीम कार में आने वाले हर व्यक्ति को कोविड-19 टेस्ट कराने की बात कह रही है। इसके कारण भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रजिस्ट्रेशन के नाम पर कर रहे वसूली
आशारोड़ी चेकपोस्ट के पास कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय हैं, जो लोगों को देहरादून स्मार्ट सिटी लि. के एप में रजिस्ट्रेशन करवाने का झांसा देकर 50 से 100 रुपये वसूल रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के बारे में अधिक जानकारी न होने के कारण आसानी से लोग उनके झांसे में आ जाते हैं। पुलिस की टीम इन्हें भगाती है, लेकिन यह उनके जाते ही फिर सक्रिय हो जाते हैं।
लोगों को परेशानी न हो, इसके लिए आशारोड़ी, जौलीग्रांट एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन पर स्वास्थ्य विभाग की टीम की ओर से पूर्व में चल रही व्यवस्था को फिर से लागू कर दिया गया है। लोग अपनी इच्छा के तहत प्राइवेट लैब में कोविड-19 की जांच करा सकते हैं।
- अरविंद पांडेय, एडीएम प्रशासन।