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कोरोना काल: शव यात्रा के लिए भी मिलने लगे किराए के कंधे, सामान ढोने वाले मजदूर संक्रमितों के शव ढोने को तैयार

Tue, 11 May 2021 04:45 PM IST
अलका त्यागी मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून 
मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून  Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 11 May 2021 04:45 PM IST
सार

देहरादून में सामान ढोने वाले यह मजदूर भले ही मजबूरी में शव ढो रहे हैं, लेकिन इस संकट में कोरोना के शिकार हुए लोगों के परिजनों के लिए वे किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।

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Coronavirus in Uttarakhand Latest News: Labourers Carry covid positive Dead body in dehradun
शव लेकर पहुंचे लोग - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

रुदाली (राजस्थान समेत कई जगह किसी की मौत पर मातम मनाने के लिए पैसे लेकर रोने वाली महिलाओं के समूह) की तरह कोरोना संक्रमितों के शवों को भाड़े पर कंधा देने के लिए कुछ मजदूर भी तैयार हैं। सामान ढोने वाले यह मजदूर भले ही मजबूरी में शव ढोने को तैयार हैं, लेकिन इस संकट में कोरोना के शिकार हुए लोगों के परिजनों के लिए वे किसी फरिश्ते से कम नहीं हैं।

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वैश्विक महामारी कोरोना ने लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ कर रख दिया है। उसके साथ ही कोरोना ने मानवीय संवेदनाओं को भी चूर-चूर कर दिया है। इससे समाज का पूरा ताना-बाना बदल गया है। स्थिति यह है कि कोरोना संक्रमित की मौत होने पर शव को कंधा देने में परिजन भी डर रहे हैं। ऐसे में कोविड अस्पतालों के बाहर शवों को भाड़े पर कंधा देने के लिए मजदूर एकत्र होने लगे हैं।
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पीपीई किट पहनकर करीबी परिजनों के साथ ये मजदूर मोर्चरी से श्मशान घाट और कब्रिस्तान तक जा रहे हैं। कोरोना संक्रमित शव को कई मामलों में अपने भी हाथ लगाने को तैयार नहीं हो रहे हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना हवा में ड्रॉपलेट से, संक्रमित मरीज के छींकने से एक से दूसरे के शरीर में पहुंचता है। कोरोना संक्रमण से हुई मौत के बाद शव को वार्ड में ही पूरी तरह से कवर किया जाता है। इससे संक्रमण का जोखिम कम रहता है।

शव से नहीं फैलता संक्रमण

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के सांस एवं छाती रोग विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कोरोना के नोडल अफसर डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि सतह से संक्रमण फैलने की थ्योरी के पुख्ता प्रमाण नहीं हैं। यह थ्योरी अब लगभग अस्वीकार हो रही है। ऐसे में शव को छूने से संक्रमण का जोखिम बहुत कम रहता है।

फिर भी वे कोरोना संक्रमित के शव को मोर्चरी से ले जाने से लेकर अंतिम संस्कार तक में गाइडलाइन का पालन करने की सलाह देते हैं। डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि संक्रमित मरीजों के शव को कंधा देने या उनके अंतिम संस्कार में दूरी बनाना बहुत ही गलत बात है। अस्पताल और पुलिस के कर्मचारी भी ऐसे शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाते हैं।

डॉ. मुशीर अंजुम करा रहे शवों का अंतिम संस्कार
महामारी के दौर में कुछ लोग ऐसे भी भी हैं जो हर जरूरतमंदों की मदद में जुटे हैं। इन्हीं में शामिल हैं डॉ. मुशीर अंजुम और उनकी टीम। उनकी टीम कोरोना पीड़ित मृत लोगों का अंतिम संस्कार करा रही है। कोरोना पीड़ित ओएनजीसी से सेवानिवृत कर्मचारी की मौत होने पर उन्होंने उनका अंतिम संस्कार कराया। इस कार्य में महानगर कांग्रेस अध्यक्ष लालचंद शर्मा ने भी मदद की। लालचंद शर्मा ने बताया कि डॉ. मुशीर की टीम में डॉ. असरफ खान, नितिन कुमार, बल्वेन्दर सिंह, उजेर अंजुम आदि शामिल हैं। उजेर अंजुम रोजे में रहकर भी मानवता निभा रहे हैं।

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