Coronavirus in Uttarakhand : संक्रमित और उनके परिवार को साल रही पड़ोसियों और रिश्तेदारों की अनदेखी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना संक्रमित मरीजों और उनके परिवारीजनों को ठीक होने के बाद रिश्तेदारों और पड़ोसियों की अनदेखी साल रही है। उनको बीमारी से जूझने के साथ ही सामाजिक कारणों से भी दो चार होना पड़ रहा है।
उत्तराखंड विस मानसून सत्र 2020: सत्र पर कोविड के वार से 1053 प्रश्न रहेंगे निरुत्तर
विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी बीमारी में इंसान को सहानुभूति की जरूरत होती है। बेशक कोरोना एक वैश्विक महामारी है और इसका संक्रमण भी तेजी से हो रहा है। फिर भी उचित दूरी बनाकर और अन्य एहतियात बरतकर विभिन्न माध्यमों से पीड़ित मरीज या उनके परिवार के सदस्यों की मदद की जा सकती है।
अगर देहरादून जिले की ही बात करें तो रोजाना सैकड़ों की संख्या में यहां कोरोना के मरीज सामने आ रहे हैं, वही कई लोगों का नकारात्मक रवैया मरीजों और उनके परिवारों के लिए बहुत पीड़ादायक साबित हो रहा है। दूसरी तरफ रोजाना मरीजों की संख्या बढ़ रही है तो ऐसे में स्वास्थ्य विभाग से भी अब संक्रमित मरीजों को एक-दो दिन में भी रिपोर्ट मिलनी मुश्किल हो रही है।
साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें अस्पताल या कोविड केयर सेंटर ले जाने या होम आइसोलेशन में रहने की सुविधा और एहतियात के बारे में तत्काल नहीं बताया जा रहा है। इससे कोरोना मरीज और उनके परिवारी जन एक साथ कई मोर्चों पर पीड़ा से जूझ रहे हैं।
कोरोना से परिवार के एक बुजुर्ग की मौत
केस एक : हरिद्वार रोड निवासी प्रतिष्ठित परिवार के कुछ सदस्यों को कोरोना हुआ। कोरोना से परिवार के एक बुजुर्ग की मौत भी हो गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। एक तो परिजन को खोने का दुख और दूसरा उनके पड़ोस और कई खास लोगों ने दूरी बना ली। लोगों ने मकान के बाहर एक निश्चित दूरी से तो दूर फोन पर कॉल कर सांत्वना देना भी उचित नहीं समझा। मुखिया को कोरोना संक्रमित होने के बाद अपना और परिवार के दूसरे सदस्यों के स्वास्थ्य की चिंता है।
केस दो : हर्रावाला निवासी एक परिवार के दो सदस्यों को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई। उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस बारे में तत्काल कोई जानकारी नहीं दी गई। परेशान परिजनों ने खुद ही निजी एंबुलेंस बुलाई और अस्पताल पहुंचे। अस्पताल की इमरजेंसी से ही प्राथमिक जांच कर डॉक्टरों ने उन्हें कोविड केयर सेंटर भेज दिया। उनकी मदद को भी पड़ोस और रिश्तेदारी के अधिकतर लोग उस वक्त सामने नहीं आए।
केस तीन : डालनवाला निवासी एक युवक को कोरोना हुआ। वह खुद ही जाकर अस्पताल में भर्ती हो गया। उनके सामने अपनी बीमारी के साथ-साथ यह भी चिंता सता रही थी कि घर पर पत्नी और बच्चों को भी अगर संक्रमण हो गया हो तो उनका टेस्ट कैसे कराया जाए। बच्चे छोटे हैं, इसलिए लैब में ले जाने में दिक्कत थी। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने भी ऐसे समय में मदद नहीं की।