Coronavirus in Uttarakhand : दून अस्पताल में अभी तक किसी मरीज को नहीं पड़ी ऑक्सीजन, आईसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत
दरअसल, कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे ज्यादा फेफड़ों पर दुष्प्रभाव डालता है। जिससे मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। हालत ज्यादा खराब होने की स्थिति में मरीज को कृत्रिम ऑक्सीजन, आईसीयू और वेंटिलेटर की जरूरत पड़ती है।
डाॅक्टरों व अन्य स्टाफ के साथ कोरोना मरीजों के उपचार में जुटे दून अस्पताल के कोरोना नोडल अफसर वरिष्ठ पल्मोनोलाॅजिस्ट डाॅ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि यह राहत की बात है कि सभी मरीजों को लक्षणों के आधार पर जरूरी दवाएं दी जा रही हैं। जिनमें से मरीज स्वस्थ भी हुए हैं।
इन मरीजों में वायरस संक्रमण का लोड नहीं बढ़ने दिया। जिससे किसी मरीज को अभी तक ऑक्सीजन, आईसीयू या वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी है। कोरोना के स्टेट कोऑर्डिनेटर डाॅ. एनएस खत्री ने बताया कि डाॅक्टरों और अन्य स्टाफ की टीमें पूरी मेहनत से लगातार मरीजों के इलाज और देखरेख में जुटी हैं। जिसके सुखद परिणाम भी सामने आ रहे हैं।
डाॅक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और अन्य लोगों को मानसिक रूप से मजबूत करने पर भी जोर
कोरोना संक्रमण और उसके उपचार के बीच उत्तराखंड के विभिन्न अस्पतालों में कोरोना मरीजों का उपचार कर रहे डाॅक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ समेत कोरोना की डयूटी में तैनात अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर शोध शुरू कर दिया गया है।
इसमें खासकर उनके मानसिक स्वास्थ्य को लेकर शोध किया जाना है। राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के प्रिंसिपल डाॅ. आशुतोष सयाना के निर्देश पर एनॉटमी के एचओडी और मनोचिकित्सक डाॅ. एमके पंत ने यह शोध शुरू किया है।
डाॅ. पंत अस्पतालों में ड्यूटी कर रहे डाॅक्टरों, मेडिकल स्टाफ से कुछ प्रश्न करेंगे। जिसमें इस दौरान के उनके अनुभव, चुनौतियां, परिवार से अलग रहने की मुश्किलें, काम के दौरान मरीजों का व्यवहार, उन्हें अटेंड करने आदि जैसे सवाल शामिल हैं।
डाॅ. पंत का कहना है कि लोगों को मानसिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है। अब तक कोरोना के जो मरीज ठीक हुए हैं, उसका एक मुख्य कारण उनका मानसिक तौर पर मजबूत होना भी रहा है।
कई लोगों में आ रहा अवसाद और चिड़चिड़ापन, डाॅ. पंत करेंगे काउंसलिंग
लाॅकडाउन के चलते कई लोग घरों में रहकर चिड़चिड़ापन और अवसाद की तरफ जा रहे हैं। शराब के आदी कुछ लोगों में भी अचानक शराब छूटने से इसके सिम्टम्स दिख रहे हैं। वहीं, कई लोग हल्की खांसी, बुखार से कोरोना की आशंका और आर्थिक मंदी व रोजगार पर संकट के डर से भी अवसाद में आ रहे हैं।
ऐसे में प्रदेश भर से आने वाले मरीजों की काउंसिलिंग का जिम्मा डाॅ. एमके पंत को सौंपा गया है। उन्होंने दून मेडिकल कॉलेज में मरीजों की काउंसिलिंग शुरू की है। तनाव, अवासद, चिड़चिड़ापन, घबराहट आदि में फोन, मैसेज और वीडियो कॉल के माध्यम से शाम पांच से छह बजे तक उनके मोबाइल नंबर 9917979743 पर संपर्क किया जा सकता है।