उत्तराखंड में कोरोना : संक्रमित शवों के दाह संस्कार के लिए मिलेगी मुफ्त लकड़ी, वन मंत्री ने लिया निर्णय
वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने बताया कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इसके आदेश कर दिए हैं। राज्य वन विकास निगम लकड़ी उपलब्ध कराएगा।
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कोरोना संक्रमित मृत शवों के दाह संस्कार के लिए राज्य सरकार शमशान घाटों पर निशुल्क लकड़ी उपलब्ध कराएगी। वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने इसके आदेश कर दिए हैं। राज्य वन विकास निगम लकड़ी उपलब्ध कराएगा।
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राज्य सभा सांसद नरेश बंसल ने प्रदेश सरकार से श्मशान घाटों में पर्याप्त मात्रा में मुफ्त लकड़ी उपलब्ध कराने की मांग की थी। राज्य के विभिन्न श्मशान घाटों पर कोरोना काल मे लकड़ी की भारी मात्रा में आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत व वन मंत्री हरक सिंह रावत से यह मसला उठाया था।
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सासंद बंसल ने फोन व पत्र के माध्यम से दोनों से संवाद किया। वन मंत्री हरक सिंह रावत ने समस्या समाधान का आश्वासन दिया कि किसी भी श्मशान घाट पर लकड़ी कमी नहीं पड़ने दी जाएगी। वन विभाग इसे मुफ्त व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराएगा। वन मंत्री के मुताबिक, उन्होंने यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखा, जिस पर निर्णय हो गया है।
कोरोना मरीज के भाई ने मेयर से लगाई गुहार, कहा-इलाज में खत्म हो गया पैसा
कोरोना के इलाज में सारी जमापूंजी लगाने के बाद हाल ये है कि कई लोगों के पास दाह संस्कार करने के लिए भी पैसा नहीं है। ऐसे में मृतक के परिजन दाह संस्कार के लिए लकड़ी खरीदने के लिए पैसे मांगने के लिए बेबस हैं।
बुधवार को अल्मोड़ा निवासी जगदीश राम अपने भाई का शव एंबुलेंस में लेकर दाह संस्कार कराने के लिए गौला रोखड़ स्थित अस्थायी श्मशान घाट पहुंचे। शव उतारने के बाद वह पास बैठे रोने लगे। जब उनका नंबर आया तब भी वह शव जलाने के लिए नहीं ले गए।
हल्द्वानी के मेयर जोगेंद्र रौतेला ने उनसे पूछा तो वह बोले साहब मैं बहुत गरीब आदमी हूं। मैंने भाई के इलाज के लिए दो लाख रुपये उधार लिया था। वह इलाज और अन्य चीजों में खत्म हो गया। मेरे पास लकड़ी खरीदने के लिए भी पैसा नहीं है। लकड़ी का पैसा कोई दे दे तो मैं भाई का अंतिम संस्कार कर लूंगा।
इस पर मेयर ने सहायक नगर आयुक्त गौरव भसीन को बुलाकर नगर निगम के खाते से लकड़ी खरीदने और चिता लगाने का निर्देश दिया। इसके बाद निगम ने लकड़ी खरीदकर चिता लगवाई। तब जाकर जगदीश राम ने अपने भाई का अंतिम संस्कार कराया।
थकान और काम इतना कि बेंच में ही सो जा रहे परिजन
इलाज के दौरान मरीजों के परिजन इतने थके चुके हैं कि वह चिता जलने के बीच आराम फरमाने के लिए पास में लगी बेंच में सो जा रहे हैं। रानीखेत निवासी कैलाश अपने परिजन का शव लेकर वहां पहुंचे। शव को आग लगाने के बाद वह बेंच में ही आराम करने के लिए सो गए। उन्होंने बताया कि शव मिलने में ही एक दिन लग जा रहा है। ऐसे में आराम का मौका भी नहीं मिल रहा है।
पैसे नहीं होने पर निगम करेगा लकड़ी की व्यवस्था
नगर निगम के अधिकारियों से कहा गया है कि गरीब और असहाय व्यक्ति के अंतिम संस्कार का खर्च निगम के बजट से किया जाए। कहा कि जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, वह मौके पर निगम के अधिकारी से मिलकर मदद मांग सकता है।
- जोगेंद्र रौतेला, मेयर नगर निगम
इनसे लें मदद
मनोज कांडपाल, नगर स्वास्थ्य अधिकारी-9410119773
गौरव भसीन, सहायक नगर आयुक्त- 7617548173
अमोल असवाल, सफाई निरीक्षक-9897505287