उत्तराखंड में कोरोना : एडिनॉइड, थाइमस और ट्रांसिल ग्रंथियां हैं नौनिहालों का सुरक्षा कवच, बच्चों पर नहीं कर पाएगा हमला
14 साल के बच्चों में थायमस ग्लैंड पाई जाती है। थायमस ग्लैंड का काम बच्चों के शरीर पर हमला करने वाले वायरस से सुरक्षा करना है।
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बालरोग विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमित होने को लेकर बहुत अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है। बच्चों के शरीर में 12 साल की उम्र तक थायमस ग्लैंड के साथ ही एडिनॉइड और ट्रांसिल जैसी ग्रंथियां बहुत अधिक सक्रिय रहती हैं। इसके चलते कोरोना वायरस बच्चों के स्वास्थ्य पर कोई भी बड़ा संकट नहीं डाल पाएगा।
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थायमस ग्लैंड देती है अभेद्य सुरक्षा
कोरोनेशन के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एनएस बिष्ट के अनुसार 14 साल के बच्चों में थायमस ग्लैंड पाई जाती है। थायमस ग्लैंड का काम बच्चों के शरीर पर हमला करने वाले वायरस से सुरक्षा करना है। युवाओं, अधेड़ और बुजुर्गों में थायमस ग्लैंड नहीं पाई जाती है। थायमस ग्लैंड बच्चों की पूरी तरह सुरक्षा करती है। बच्चों के शरीर में पाए जाने वाली एडिनोनॉइड, ट्रांसिल ग्रंथियां भी बच्चों को कोरोना के हमले से बचने में पूरी मदद देंगी।
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एसीई-2 रिसेप्टर कम होने से दम तोड़ देगा कोरोना
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. उत्कर्ष शर्मा के मुताबिक बच्चों में एंजियोटेंशिन कन्वर्टिंग एंजाइम प्रीसेप्टर (एसीई-2 रिसेप्टर) की मात्रा वयस्कों की तुलना में बहुत कम होती है। यही रिसेप्टर कोरोना के प्रोटीन को शरीर में न सिर्फ चिपकने का रास्ता प्रदान करते हैं, वरन वायरस के शरीर में दाखिल होने और उसके म्यूटेट करने का भी रास्ता साफ करते हैं। ऐसे में बच्चों में एंजियोटेंशिन कन्वर्टिंग एंजाइम की मात्रा कम होने से कोरोना को बच्चों में दाखिल होने और घर बसाने का रास्ता नहीं मिलेगा।
इम्यूनिटी और टीकाकरण से बच्चे बहुत अधिक सुरक्षित
बालरोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. उत्कर्ष शर्मा के मुताबिक बच्चों में प्राकृतिक रूप से बहुत अधिक इननेट इम्यूनिटी पाई जाती है जो बच्चों को बीमारियों से लड़ने की अद्भुत क्षमता प्रदान करती है। यही नहीं एक माह से लेकर 18 साल तक के बच्चों को पिछले डेढ़ दशक में जो टीकाकरण किया गया है।
इसकी वजह से बच्चों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पहले से ही बरकरार है। ऐसे में बच्चों में कोरोना का संक्रमण बहुत अधिक होगा इसकी संभावनाएं बहुत कम है। फिर भी एहतियात बरतने की जरूरत है।
बच्चों के बाहर से संक्रमित होने का खतरा बहुत कम
डॉ. उत्कर्ष शर्मा का कहना है कि फिलहाल पिछले डेढ़ साल से ज्यादातर बच्चे घरों में कैद हैं और वे बहुत ही कम घर से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में उनके बाहर से कोरोना संक्रमित होने का खतरा बहुत कम है। लिहाजा अभिभावकों को खास ख्याल रखना होगा।
अभिभावक जब भी घर से बाहर से आएं तो यह मानकर चलें कि वे कोरोना संक्रमित होकर आ रहे हैं। ऐसे में वे शरीर की पूरी साफ करने के साथ ही सैनिटाइजेशन करने के बाद ही बच्चों के संपर्क में आएं। अगर अभिभावक ख्याल रखेंगे तो बहुत अधिक संख्या में बच्चों को संक्रमण से बचाया जा सकेगा।