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Coronavirus in Uttarakhand : प्लाज्मा दान करने को तैयार नहीं हो रहे ‘कोरोना विजेता’ 

Tue, 01 Sep 2020 01:34 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal मनीष चंद्र भट्ट , अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट , अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 01 Sep 2020 01:34 PM IST
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coronavirus in uttarakhand latest news : Corona winner not being ready to donate plasma
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

कोरोना संक्रमण से ठीक हुए ज्यादातर मरीज दूसरे गंभीर मरीजों की मदद के लिए प्लाज्मा दान करने को तैयार नहीं हो रहे हैं।

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दून अस्पताल के ब्लड बैंक की ओर से काउंसिलर की टीम लगातार स्वस्थ हुए मरीजों को फोन कर इसे लेकर उनकी काउंसिलिंग भी कर रही है, लेकिन कुछ ही लोग हैं जो प्लाज्मा दान करने के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि, जो प्लाज्मा दान करना भी चाहते हैं, उनमें भी एंटीबॉडीज न मिलने और अन्य बीमारी होने पर प्लाज्मा नहीं लिया जा रहा है। 
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मार्च में जब कोरोना के शुरुआती मरीज आने शुरू हुए थे तो तभी से राजकीय दून मेडिकल अस्पताल को कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया गया था। तब से दून मेडिकल अस्पताल से बड़ी संख्या में मरीज स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।
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इनमें से जिन लोगों को 15 दिन से एक महीना स्वस्थ हुए हो गया है, उनको दून अस्पताल के ब्लड बैंक से प्लाज्मा डोनेट करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अस्पताल में प्लाज्मा थेरेपी मशीन लगे काफी वक्त हो चुका है, लेकिन अभी प्लाज्मा दान करने को लेकर लोगों में व्यापक जागरूकता नहीं दिख रही है। 

मरीजों को डाटाबेस के आधार पर काउंसिलर द्वारा फोन किए जा रहे हैं

दून अस्पताल के ब्लड बैंक की इंचार्ज डॉ. शशि उप्रेती ने बताया कि कोरोना से स्वस्थ हुए मरीजों को डाटाबेस के आधार पर काउंसिलर द्वारा फोन किए जा रहे हैं।

उन्हें यह भी समझाया जा रहा है कि रक्तदान या प्लाज्मा दान करने से उनके शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि रक्त और एंटीबॉडीज की मात्रा और भी तेजी से बढ़ती है। साथ ही कई तरह की महंगी जांचें भी अस्पताल में ब्लड डोनेशन से पहले निशुल्क की जा रही हैं। 

ब्लड बैंक में खून भी वह खत्म  

दून अस्पताल के ब्लड बैंक में मरीजों को चढ़ाए जाने वाला खून भी लगभग खत्म हो गया है। कोरोना संक्रमण के डर से बहुत कम संख्या में लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए पहुंच रहे हैं। ब्लड बैंक से नियमित स्वैच्छिक रक्तदाताओं को बाकायदा फोन भी किए जा रहे हैं।

इसके बावजूद हफ्ते में एक या दो ही रक्तदाता रक्तदान को पहुंच रहे हैं। जिससे एक्सीडेंटल केस, गर्भवती महिलाओं, थैलीसीमिया के नियमित मरीजों समेत अन्य मरीजों और उनके परिजनों को भी शहर के निजी ब्लड बैंकों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इन ब्लड बैंकों में भी खून की मात्रा बहुत कम है।

राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. आशुतोष सयाना, दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. केके टम्टा, डिप्टी एमएस डॉ. एनएस खत्री, ब्लड बैंक इंचार्ज डॉ. शशि उप्रेती, वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी महेंद्र भंडारी और जनसंपर्क अधिकारी संदीप राणा ने भी लोगों से अपील की है कि कोरोना महामारी के इस संकट में आमजन के जीवन को बचाने के लिए स्वैच्छिक रक्तदान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करें।

उन्होंने बताया कि अस्पताल में रक्तदान के लिए आने या रक्तदान करने पर कोरोना संक्रमण से डरने की जरूरत नहीं है। ब्लड बैंक को पूरी तरह से इससे अलग रखा गया है।

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