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Corona: घरों से निकल रहा बायो मेडिकल कचरा बना खतरे की घंटी, ये बचाव हैं जरूरी

Sun, 17 May 2020 05:42 PM IST
अलका त्यागी मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून
मनीष चंद्र भट्ट, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 17 May 2020 05:42 PM IST
सार

  • बाहर से आ रहे लोगों और संदिग्ध कोरोना मरीजों को भी किया जा रहा है होम कोरंटीन

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Coronavirus in Uttarakhand latest News: Biomedical Waste from Houses danger for Public
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

घरों से निकलने वाला बायो मेडिकल कचरा खतरे की घंटी बन सकता है। इसे लेकर अभी देहरादून प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। खासकर ऐसे घरों में जहां बाहर से आने वाले लोगों और कोरोना संदिग्ध मरीजों को होम क्वारंटीन किया जा रहा है, वहां से निकलने वाले बायो मेडिकल कचरे समेत अन्य कचरे से नई आफत खड़ी हो सकती है।

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दरअसल, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग विभिन्न राज्यों से आने वाले लोगों को घरों में होम क्वारंटीन कर रहा है। शनिवार को जिले में 4381 लोगों को  होम क्वारंटीन किया गया था। अब सवाल यह उठता है कि कोरोना संकट के काल में लोग मास्क, सैनिटाइजर, हैंड ग्लब्स आदि बचाव के साधनों का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी तरह जो लोग बाहर से आकर या कोरोना संदिग्ध के रूप में होम क्वारंटीन हैं उनमें से विभिन्न लोगों में कोरोना संक्रमण भी पाया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनके सैंपल भी लिए जा रहे हैं।
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अहम बात यह है कि जांच रिपोर्ट आने तक पुष्टि होने तक कोरोना पीड़ित मरीज घरों में ही रह रहे हैं। कुछ के तो घर से बाहर आकर दूसरे लोगों से मिलने की बातें भी सामने आ रही हैं। इस अवधि में यह लोग भी मास्क, गलब्स, सैनिटाइजर साबुन और अन्य चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह कचरा लोग अन्य कचरे के साथ ही बाहर फेंक देते हैं। सुबह नगर निगम की कूड़ा गाड़ी वाले सफाई कर्मी को थमा देते हैं।
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कोरोना संक्रमण काल में ऐसे कूड़े को सफाई कर्मी को देने और उसके डिस्पोजल की समुचित व्यवस्था न होना एक बड़े संकट को पैदा कर सकता है। इसलिए जिला  प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी दबी जुबान इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि जिन लोगों के सैंपल लिए गए हैं उनको रिपोर्ट आने तक संस्थागत क्वारंटीन किया जाना चाहिए। पटेलनगर स्थित श्री महंत इंद्रेश अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. विनय राय ने कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं।....

ये बचाव हैं जरूरी

  • मास्क को हाइपोक्लोराइड सॉल्यूशन में 15 मिनट डूबा कर रखा जाना चाहिए। फिर उसे सुखाकर जलाया जाए।
  • शाम को कपड़े उतार कर साबुन या सर्फ के पानी में लगभग दो घंटे डुबोकर रखें और उसके बाद साफ करके धुलें।
  • जहां पर भी कोई संक्रमित व्यक्ति टच कर रहा है उस जगह को भी हाइपोक्लोराइड सॉल्यूशन से धोना चाहिए।
  • आम आदमी से अपील है कि वह सर्जिकल मास्क का इस्तेमाल करने के बजाए घर में बने कपड़े का मास्क इस्तेमाल करें और उसे रोज साबुन और डिटॉल से धुल दें।
  • आंखों के रास्ते भी यह संक्रमण होने का डर रहता है, इसलिए बाहर जाने पर चश्मा पहने और मास्क को नाक व मुंह पर ठीक से लगाएं।
  •  जब तक किसी मरीज की सैंपल जांच रिपोर्ट नहीं आ जाती उसे होम क्वारंटीन के बजाय संस्थागत क्वारंटीन में रखा जाना बेहतर है।
     

होम क्वारंटीन किए गए लोगों के घरों से निकलने वाला कचरा निगम के वाहनों के जरिए उठाया जा रहा है। बायो मेडिकल वेस्ट को अलग बॉक्स में डालकर रुड़की भेजा जा रहा है। वहीं, नगर निगम जल्द खुद का बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाने जा रहा है। जिससे शहर से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण यहीं हो सकेगा।
- विनय शंकर पांडेय, नगर आयुक्त

होम क्वारंटीन किए गए लोगों को चाहिए कि वह अपना कचरा यानि मास्क, कपड़े आदि अलग से दें। जिससे वह सामान्य कूड़े में न मिले। ताकि उसका निस्तारण अलग से किया जाए। मास्क आदि भी सामान्य कचरे में देने से उसके दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
- डॉ. आशीष कुमार  श्रीवास्तव, जिलाधिकारी

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