कोरोना : ‘टीका ही बचाएगा’ संदेश लेकर उत्तराखंड पहुंचे अनीश, चारधाम पहुंचकर करेंगे प्रार्थना
42 वर्षीय अनीश बाहेती चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। बाइक से लंबी-लंबी यात्राएं करते हैं। अनीश बताते हैं, बीते कई सालों से राइडिंग करते आ रहे हैं। नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश की बाइक से यात्रा कर चुके हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोविड से बचाव के लिए टीका ही सबसे कारगर है। बिना किसी डर और भ्रम के टीका लगवाएं और दूसरों को भी प्रेरित करें। इसी संदेश के साथ अहमदाबाद के राइडर अनीश बाहेती उत्तराखंड पहुंचे हैं। अनीश उत्तराखंड के कई शहरों में घूमकर टीकाकरण के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे।
उत्तराखंड में कोरोना : दूसरी लहर के नियंत्रण में आने के बाद सभी जिलों में संक्रमण दर तीन प्रतिशत से कम
बीते कई सालों से राइडिंग करते आ रहे हैं अनीश
42 वर्षीय अनीश बाहेती चार्टर्ड एकाउंटेंट हैं। बाइक से लंबी-लंबी यात्राएं करते हैं। अनीश बताते हैं, बीते कई सालों से राइडिंग करते आ रहे हैं। नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश की बाइक से यात्रा कर चुके हैं। हर राइडिंग में संकल्प लेकर चलते हैं।
उत्तराखंड : पर्यटन पर कोरोना कर्फ्यू और आरटीपीसीआर जांच की बंदिशें दे रहीं गहरी चोट
कोविड से बचाव के लिए मास्क पहनने और शारीरिक दूरी का संदेश दिया
अनीश बताते हैं, कोविड की पहली लहर के दौरान उत्तर भारत के राज्यों के कई शहरों का दौरा कर लोगों को कोविड से बचाव के लिए मास्क पहनने और शारीरिक दूरी का संदेश दिया। हजारों मास्क भी बांटे। कोविड की दूसरी लहर कमजोर पड़ने के बाद 16 जून को अपने जन्मदिन पर अमहादाबाद से फिर जागरूकता संदेश के साथ निकले हैं।
मकसद टीकाकरण के प्रति लोगों को जागरूक करना
अनीश बताते हैं, इस बार उनका मकसद टीकाकरण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। जिस शहर में पहुंचते हैं वहां जगह-जगह लोगों को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित करते हैं। अनीश खुद के अलावा परिवार और रिश्तेदारों को टीका लगवा चुके हैं। हरिद्वार में दो दिन रुकने के बाद अनीश ऋषिकेश निकल गए और वहां से बुधवार को देहरादून पहुंचे।
चारधाम पहुंचकर करेंगे प्रार्थना
अनीश चारों धाम की यात्रा भी करेंगे। देशभर में कोविड से मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए बदरीनाथ, केदारनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री पहुंचकर प्रार्थना करेंगे।
कहीं गुरुद्वारा तो कहीं टेंट में लेते हैं शरण
अनीश बताते हैं लंबी यात्रा के दौरान होटल में ठहरने के बजाय गुरुद्वारा और मंदिरों में रात्रि में शरण लेते हैं। खुद का टेंट भी साथ लेकर चलते हैं। किसी शहर में ठिकाना न मिला तो टेंट लगाकर उसमें रात बिताते हैं।