Corona in Uttarakhand: 668 नए संक्रमित मिले, 11 की मौत, 25 हजार के करीब पहुंची मरीजों की संख्या
- संक्रमितों की संख्या 24629 और सक्रिय मरीज संख्या 7640 हुई
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विस्तार
उत्तराखंड में रविवार को 668 नए कोरोना संक्रमित मामले सामने आए हैं। इसके बाद अब संक्रमित मरीजों की संख्या 24629 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को 7701 सैंपल निगेटिव आए हैं और 668 सैंपलों में कोरोना संक्रमण मिला है।
वहीं, 591 मरीजों को इलाज के बाद घर भेजा गया है। इन्हें मिला कर 16573 मरीज ठीक हो चुके हैं। सक्रिय मरीजों का आंकड़ा 7600 से अधिक पहुंच गया है। प्रदेश में कोरोना संक्रमित मृतकों की संख्या 341 हो गई है।
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आज आई रिपोर्ट के अनुसार, देहरादून जिले में सबसे अधिक 235 कोरोना मरीज मिले हैं। हरिद्वार में 103, ऊधमसिंह नगर में 69, टिहरी में 54, उत्तरकाशी में 54, नैनीताल में 39, पौड़ी में 38, रुद्रप्रयाग में 31, पिथौरागढ़ में 21, चमोली में 18, बागेश्वर जिले में छह कोरोना मरीज मिले हैं।
प्रदेश में 11 कोरोना मरीजों की मौत हुई है। एम्स ऋषिकेश में चार, दून मेडिकल कॉलेज में पांच और सुशीला तिवारी मेडिकल काॅलेज हल्द्वानी में दो मरीजों ने इलाज के दौरान दमतोड़ा है।
25 हजार के करीब पहुंची कोरोना मरीजों की संख्या
उत्तराखंड में जांच के साथ ही कोरोना संक्रमण और मरने वालों की रफ्तार प्रतिदिन बढ़ रही है। जहां कुल संक्रमितों का आंकड़ा 25 हजार पहुंचने के करीब है वहीं मृतकों की संख्या में 350 के करीब पहुंच गई है। खासकर चारों मैदानी जिलों में कोरोना संक्रमण की स्थिति गंभीर है।
प्रदेश में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 15 मार्च को देहरादून में मिला था। पहले 77 दिन के भीतर प्रदेश में लगभग 750 कोरोना मरीज मिले थे और 22 हजार से ज्यादा सैंपलों की जांच हुई थी। लेकिन वर्तमान में प्रतिदिन 10 हजार से अधिक सैंपलों की जांच के साथ ही कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ी है, साथ ही मरने वालों की संख्या भी बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, पांच सितंबर तक प्रदेश में 4.21 लाख सैंपलों की जांच हो चुकी है। संक्रमितों की संख्या 25 हजार पार करने वाली है। बीते सात दिनों में प्रदेश में 72 हजार 711 सैंपलों की जांच हुई, जिनमें से 5390 लोग कोरोना संक्रमित मिले हैं। वहीं, 3458 मरीजों ने कोरोना को मात दे दी है। इस दौरान 80 कोरोना मरीजों ने दम तोड़ा है।
सोशल डवलपमेंट फार कम्युनिटी फाउंडेशन के संस्थापक अनूप नौटियाल का कहना है कि जांच के साथ ही संक्रमण और मृत्यु दर बढ़ रही है। संक्रमण की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या कम है।
प्रदेश में हर हफ्ते ऐसे बढ़ रहा संक्रमण
सप्ताह सैंपल जांच संक्रमित ठीक हुए मौत
01 अगस्त 30804 1486 835 20
08 अगस्त 31732 1955 1633 34
15 अगस्त 44904 2538 1785 34
22 अगस्त 43874 2626 2273 44
29 अगस्त 67385 4005 2503 55
05 सितंबर 72711 5390 3458 80
एक माह में 1.11 प्रतिशत बढ़ गई संक्रमण की दर
प्रदेश में कोरोना जांच के आधार पर बीते एक माह में संक्रमण की दर 1.11 प्रतिशत बढ़ गई है। कोरोना काल में अब तक की सबसे अधिक संक्रमण दर 5.73 प्रतिशत पहुंच गई है। संक्रमित मामलों में हरिद्वार और सक्रिय मरीजों में देहरादून जिला प्रदेश में पहले स्थान पर है।
उत्तराखंड के मैदानी जिलों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह और नैैनीताल में कोरोना संक्रमण की स्थिति गंभीर हो रही है। हरिद्वार जिले में सबसे अधिक 5535 और देहरादून जिले में 5376 संक्रमित अब तक मिल चुके हैं। नए संक्रमित मरीजों की तुलना में ठीक होने वालों की संख्या कम है।
जिससे देहरादून में सक्रिय मरीजों की संख्या 1809 और हरिद्वार में 1362 हो गई है। नैनीताल जिले में 3287 संक्रमित और 995 सक्रिय मरीज हैं। इसी तरह ऊधमसिंह नगर जिले में 4453 संक्रमित मामले और 1327 सक्रिय मरीज हैं।
एक अगस्त को प्रदेश में संक्रमण दर 4.62 प्रतिशत थी, जो बढ़ कर 5.73 हो गई है। प्रदेश में कोरोना को मात देने वाले मरीजों की दर 67.29 प्रतिशत और डबलिंग दर 20.38 दिन हैं।
बेस अस्पताल से कोरोना संक्रमित बच्चे को लेकर भागी मां
कोटद्वार बेस अस्पताल में भर्ती कोरोना संक्रमित एक साल के बच्चे को लेकर उसकी मां अस्पताल से भाग गई। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है। अस्पताल प्रबंधन की ओर से घटना की सूचना पुलिस को सूचना दी गई है। महिला के संक्रमित बच्चे को लेकर भागने से समाज में कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ है।
बेस अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. बीसी काला ने बताया कि चार सितंबर की शाम को लकड़ी पड़ाव क्षेत्र की एक महिला अपने एक साल के बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची थी। बच्चे को बुखार की शिकायत होने पर चिकित्सकों ने उसे अस्पताल के जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया। पांच अगस्त को बच्चे का कोरोना सैंपल लेकर अस्पताल की लैब में ट्रूनेट मशीन में कोराना की जांच की गई, जिसमें बच्चा कोरोना संक्रमित पाया गया।
जनरल वार्ड में भर्ती बच्चे की मां को इसकी जानकारी दी गई और उसे कोरोना वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इसके बाद मौका देखते ही महिला अपने बच्चे को लेकर अस्पताल से भाग गई। बताया कि संक्रमित बच्चे के साथ फरार महिला की सूचना पुलिस को दे दी गई है।
अभी तक महिला बच्चे को लेकर अस्पताल नहीं पहुंची है। उधर, कोतवाल मनोज रतूड़ी ने बताया कि अस्पताल से कोरोना संक्रमित बच्चे को लेकर मां के फरार होने की सूचना आई थी। इसका पता लगाया जा रहा है।
माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने से नहीं आएगी लॉकडाउन की नौबत
प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए सरकार का माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने पर जोर हैं। सरकार का मानना है कि कंटेनमेंट जोन बनाने के पीछे यही मकसद है कि दोबारा से लॉकडाउन की स्थिति न बने। कंटेनमेंट जोन न बनाने से लॉकडाउन की नौबत आ सकती है।
राज्य में कोरोना जांच बढ़ने के साथ ही संक्रमित मरीजों की रफ्तार बढ़ गई है। कोरोना को काबू करने के लिए सरकार का कंटेनमेंट जोन बनाने पर फोकस है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शनिवार को प्रदेश के आठ जिलों में कुल 393 कंटेनमेंट जोन थे। वहीं, रविवार को नए कंटेनमेंट जोन बनने से संख्या 446 हो गई है।
सचिव स्वास्थ्य अमित सिंह नेगी का कहना है कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जिलाधिकारियों के माध्यम से कंटेनमेंट जोन बनाए जा रहे हैं। कंटेनमेंट जोन बनाने का मुख्य उद्देश्य यही है कि संदिग्ध संक्रमित मरीज अन्य लोगों में संक्रमण न फैले। कंटेनमेंट जोन बनाने से प्रदेश में लॉकडाउन करने की स्थिति नहीं आएगी। यदि कंटेनमेंट जोन नहीं बनाते हैं तो संक्रमण बढ़ने पर लॉकडाउन की नौबत आ सकती है।
सचिव ने कहा कि सभी जिलों को माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने के निर्देश दिए हैं। यदि किसी मोहल्ले में कोई व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव मिलता है तो उसके आसपास के चार से पांच घरों को कंटेनमेंट जोन में शामिल किया जाएगा।