उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में 274 नए संक्रमित मिले, 18 की मौत, 515 मरीज हुए ठीक
उत्तराखंड में कोरोना की दूसरी लहर थमने लगी है। प्रदेश में अब संक्रमित मरीजों का रिकवरी रेट 95.14 फीसदी तक पहुंच गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तराखंड में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 274 नए मामले दर्ज किए गए। वहीं 18 मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा 515 मरीजों को आज ठीक होने के बाद घर भेजा गया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, सोमवार को 16180 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। वही, अल्मोड़ा में 24, बागेश्वर में 12, चमोली में 07, चंपावत में 10, देहरादून में 57, हरिद्वार में 48, नैनीताल में 26, पौड़ी में छह, पिथौरागढ़ में 18, रुद्रप्रयाग में सात, टिहरी में 16, ऊधमसिंह नगर में 17 और उत्तरकाशी में 26 मामले सामने आए हैं।
उत्तराखंड: 'वैक्सीन मैन' का गांव में बसने का सपना रह गया अधूरा, कोरोना वैक्सीन बनाने में निभाई थी अहम भूमिका
प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल मामलों की संख्या तीन लाख 37 हजार 449 हो गई है। इनमें से तीन लाख 21 हजार 64 लोग ठीक हो चुके हैं। वहीं, सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 3642 पहुंच गई है। राज्य में कोरोना के चलते अब तक चुल 6985 लोगों की जान जा चुकी है।
कोरोना से बचे तो अब पोस्ट कोविड फ्राइब्रोसिस का खतरा
काफी जद्दोजहद के बाद कोरोना से उबरे मरीज कई मरीज अब सांस फूलने, जबरदस्त खांसी और थकान आदि समस्याओं से जूझ रहे हैं। चिकित्सकों के पास बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंचे रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ ऐसे मरीजों को रेस्पाइरेटरी (पल्मोनरी फंक्शन) टेस्ट दो माह बाद जरूर कराने की सलाह दे रहे हैं।
दून अस्पताल के वरिष्ठ पल्मोलॉजिस्ट डॉ. अंकित अग्रवाल के मुताबिक उनके पास तमाम ऐसे मरीज आ रहे हैं जो कोरोना बीमारी से ठीक होने के बाद जबरदस्त खांसी, सांस फूलने के साथ ही थकान की समस्या से जूझ रहे हैं। इस समस्या को पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस भी कहा जाता है।
पोस्ट कोविड फाइब्रोसिस होने से मरीजों को सांस फूलने के साथ ही गंभीर खांसी और थकान की समस्याएं हो जाती हैं। डॉ. अंकित अग्रवाल के मुताबिक कोरोना से संक्रमित होने वाले ऐसे मरीज जिनके फेफड़े तक संक्रमण पहुंच गया था और फेफड़े को काफी नुकसान पहुंचा। ऐसे मरीजों को दो माह बाद कुशल विशेषज्ञों से पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट करा लेना चाहिए।
इससे कोरोना से फेफड़ों को हुए नुकसान का पता चल जाएगा और उचित समय पर इलाज संभव हो सकेगा। फेफड़े की ताकत बढ़ाने को लेकर तमाम दवाएं हैं। ऐसे में मरीजों को बहुत अधिक चिंता करने की भी जरूरत नहीं है।
कंटेनमेंट जोन से मुक्त होना है तो कराएं जांच और टीकाकरण
रुड़की में एक दिन पहले लंढौरा के शिकारपुर गांव में कोरोना जांच के लिए पहुंची टीम के साथ हुई अभद्रता के बाद मंगलवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अपूर्वा पांडेय और एएसडीएम पूरण सिंह राणा ने गांव का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने लोगों को समझाया और कोविड टेस्ट कराने की अपील की। कहा कि टेस्टिंग और वैक्सीनेशन से जितने जल्दी हालात सामान्य होंगे, उतने ही समय में उनके गांव को कंटेनमेंट से मुक्त कर दिया जाएगा।
गौरतलब है कि लंढौरा के शिकारपुर गांव में 40 से अधिक कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद विगत सोमवार को प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन घोषित करते हुए गांव को सील कर दिया था। इसके बाद गांव में टेस्टिंग के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची थी, लेकिन ग्रामीणों ने लाठी डंडे लेकर स्वास्थ्यकर्मियों को दौड़ा दिया था। लोगों का कहना था कि उनकी रिपोर्ट गलत बनाई गई है और गांव को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इसके बाद मंगलवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अपूर्वा पांडेय और एएसडीएम पूरण सिंह राणा ने कंटेनमेंट जोन घोषित शिकारपुर का निरीक्षण किया।
उन्होंने सैंपल लेने गई टीम से अभद्रता के मामले में जानकारी ली। इस दौरान एनाउंसमेंट करवाकर सभी लोगों से जल्द से जल्द कोविड टेस्ट कराने की अपील की गई। कहा कि जितनी जल्दी टेस्टिंग का कार्य समाप्त होगा, उतनी जल्दी कंटेनमेंट जोन से गांव को बाहर किया जा सकता है। साथ ही चेतावनी दी कि अगर किसी ने कंटेनमेंट जोन के नियमों का उल्लंघन किया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस मौके पर लंढौरा पुलिस चौकी प्रभारी नितेश शर्मा, लंढौरा अस्पताल के प्रभारी डॉ. अमित डाबरा, लेखपाल आदेश कुमार और पूर्व प्रधान सतीश कुमार आदि मौजूद रहे।
नई दिल्ली शताब्दी और देहरादून- पुरानी दिल्ली मसूरी एक्सप्रेस का संचालन 21 जून से
देहरादून से नईदिल्ली के बीच ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों केर लिए यह खबर राहत देने वाली है। देहरादून - नई दिल्ली शताब्दी और देहरादून- पुरानी दिल्ली मसूरी एक्सप्रेस का संचालन 21 जून से किया जाएगा। रेलवे बोर्ड की ओर से दोनों ट्रेनों के संचालन को मंजूरी दे दी गई है। नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस व मसूरी एक्सप्रेस के संचालन को मंजूरी दिए जाने के साथ ही यात्रियों के साथ ही रेलवे अधिकारियों, कर्मचारियों ने राहत की सांस ली है।
गंभीर मरीजों को जल्द मिलेगी इनडोर इलाज की सुविधा
कोरोना से इतर अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और तीमारदारों के लिए खबर राहत देने वाली है। कोरोना संक्रमण कम होने के बाद अब दून अस्पताल में गंभीर मरीजों को भर्ती करने के साथ ही उनके इलाज की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
हालांकि, फिलहाल पहले चरण में अस्पताल प्रबंधन ने ओपीडी की शुरुआत की है, जिसमें प्रतिदिन हर विभागों में सिर्फ 25 मरीजों की जांच की जा रही है। दून अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. केसी पंत ने बताया कि अब कोरोना को लेकर स्थिति काफी नियंत्रण में है। दून अस्पताल में सिर्फ 46 कोरोना संक्रमित मरीज ही भर्ती हैं।
अस्पताल में प्रतिदिन कोरोना संक्रमित मरीजों के भर्ती होने का आंकड़ा भी सिमटकर दो-तीन तक रह गया है। ऐसे में अब अस्पताल में नए सिरे से अन्य बीमारियों से जूझ रहे गंभीर मरीजों को भर्ती करने व उनके इलाज की व्यवस्था की जा रही है। ताकि, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना ना पड़े। साथ ही ओपीडी में भी मरीजों की जांच की संख्या जल्द बढ़ाई जाएगी।
बता दें कि दून अस्पताल को कोविड अस्पताल में तब्दील किए जाने से बालरोग, हड्डीरोग, त्वचारोग, हृदयरोग समेत ज्यादातर विभागों में मरीजों की जांच और भर्ती प्रक्रिया ठप हो गई थी। इससे उन मरीजों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। अब जबकि स्थितियां सामान्य हो गई हैं तो नए सिरे से दून अस्पताल में गंभीर मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज किया जाएगा।
वैक्सीन न लगाने पर युवाओं ने एम्स में तीन घंटे काटा हंगामा
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश में वैक्सीन न लगाने पर युवाओं ने तीन घंटे तक जमकर हंगामा काटा। इस बीच हंगामे की वीडियो बनाने और फेसबुक लाइन करने को लेकर युवाओं और सुरक्षाकर्मियों के बीच जमकर बहस भी हुई। युवाओं का आरोप था कि बीते तीन दिनों से एम्स में ऑफलाइन व्यवस्था के तहत वैक्सीन लगाई जा रही थी। लेकिन मंगलवार को स्वास्थ्यकर्मियों ने बिना स्लॉट बुकिंग के वैक्सीन लगाने से साफ इंकार कर दिया।
एम्स में बीते पांच दिनों से 18 प्लस वर्ग का ऑफलाइन वैक्सीनेशन चल रहा था। युवाओं को टोकन जारी कर वैक्सीन लगाई जा रही थी। मंगलवार को 18 प्लस आयवुर्ग के वैक्सीनेशन काउंटर पर सुबह से युवाओं की भीड़ उमड़ने लग गई थी। कई युवा ऐसे थे जो सुबह छह बजे से कतार में खड़े थे। वैक्सीनेशन की प्रकिया जब शुरु हुई तो पोर्टल एक बार फिर स्लॉट बुकिंग की अनिवार्यता दर्शाने लगा।
जब स्वास्थ्यकर्मियों ने यह जानकारी युवाओं को दी उनका सब्र का बांध जवाब दे गया। फिर क्या था लाभार्थियों ने एम्स पर गुमराह करने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। स्वास्थ्यकर्मियों ने युवाओं को समझाने का काफी प्रयास किया। लेकिन जब वे नहीं माने तो स्वास्थ्यकर्मियों ने सुरक्षाकर्मियों को बुलवा लिया। कुछ युवा अपना स्मार्ट फोन निकालकर विडियो बनाने लगे तो कुछ ने फेसबुक लाइव शुरू कर दिया।
सुरक्षाकर्मियों और युवाओं के बीच वीडियो बनाने के दौरान तीखी नोकझोंक भी हुई। करीब तीन घंटे तक चले हंगामे के बाद दोपहर 11.30 पर युवा लौट गए। वहीं एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर पांच दिनों के लिए ऑफलाइन वैक्सीनेशन शुरु किया गया। ऑफलाइन वैक्सीनेशन स्वास्थ्यकर्मियों और उनके परिवारजनों के लिए था। मंगलवार को ऑफलाइन प्रक्रिया बंद हो गई।