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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Corona Cases in Uttarakhand Today 05 July: 69 new infected found and Two died in 24 hours

उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में 69 संक्रमित मिले, दो की मौत, घटकर 1555 हुए एक्टिव केस 

Mon, 05 Jul 2021 11:12 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 05 Jul 2021 11:12 PM IST
सार

उत्तराखंड में अब संक्रमण और मौत के मामलों में कमी आने लगी है। प्रदेश में संक्रमित मरीजों का रिकवरी रेट 95.64 फीसदी है।

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Corona Cases in Uttarakhand Today 05 July: 69   new infected found and Two died in 24 hours
कोरोना वायरस की जांच (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

विस्तार

उत्तराखंड में लंबे समय बाद एक दिन में सबसे कम 69 संक्रमित मिले हैं। वहीं दो मरीजों की मौत हुई है। इसके अलावा आज 250 मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। वहीं, सक्रिय मामलों की संख्या घटकर 1555 से कम पहुंच गई है। 

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन के अनुसार, सोमवार को 21252 सैंपलों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। चंपावत और पौड़ी में एक भी संक्रमित मरीज सामने नहीं आया है। वहीं, अल्मोड़ा में छह और बागेश्वर में एक, चमोली में एक, देहरादून में नौ, हरिद्वार में आठ, नैनीताल में आठ, पिथौरागढ़ में 6, रुद्रप्रयाग में तीन, टिहरी में दो, ऊधमसिंह नगर में नौ और उत्तरकाशी में 16 मामले सामने आए हैं। 
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प्रदेश में अब तक कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या तीन लाख 40 हजार 793 हो गई है। इनमें से तीन लाख 25 हजार 942 लोग ठीक हो चुके हैं। प्रदेश में कोरोना के चलते अब तक कुल 7335 लोगों की जान जा चुकी है। 

ब्लैक फंगस के दो नए मामले, एक मौत
प्रदेश में सोमवार को ब्लैक फंगस के दो नए मामले और एक मरीज की मौत हुई है। कुल मरीजों की संख्या 509 हो गई है। जबकि 101 मरीजों की मौत हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के हेल्थ बुलेटिन के अनुसार देहरादून जिले में दो मरीजों में ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। जिन्हें उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती किया गया है। जबकि एम्स में भर्ती एक मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ा है। चार मरीजों को ठीक होने के बाद घर भेजा गया। अब तक कुल मरीजों की संख्या 509 हो गई है। 110 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं।

20 आईसीयू बेड सहित 80 बेड बच्चों के लिए आरक्षित 

कोरोना की संभावित तीसरी लहर से नवजात शिशुओं/बच्चों को बचाने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल ने तैयारी पूरी कर दी है। अस्पताल में कोरोना व कोरोना संक्रमण संभावित बच्चों के उपचार के लिए आईसीयू वार्ड के 20 बेड समेत 80 बेड स्थापित किए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, वार्ड के लिए स्टाफ की भी तैनाती कर दी गई है।  

अब तक कोरोना संक्रमण की दो लहरों में बच्चे कम संक्रमित हुए हैं लेकिन तीसरी लहर में बच्चों के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि तीसरी लहर बच्चों के लिए हानिकारक होगी। इसके लिए सरकार के निर्देश पर मेडिकल कॉलेज के अधीन बेस अस्पताल में वार्ड आरक्षित किए गए हैं।

बेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. केपी सिंह ने बताया कि अस्पताल में कोरोना संक्रमित और संभावित संक्रमित बच्चों/नवजात शिशुओं के लिए 80 बेड आरक्षित किए गए हैं। इनमें 10 बेड का एनआईसीयू (नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई) और 10 बेेड का पीआईसीयू (बाल गहन चिकित्सा इकाई) वार्ड है।

60 बेड का सामान्य वार्ड है। उन्होंने बताया कि वार्ड के लिए उपकरण, दवाई और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कर ली गई है। बाल रोग विभागाध्यक्ष प्रो. व्यास कुमार राठौर की ओर से स्टाफ को भी कोरोना संक्रमित नवजात शिशुओं और  बच्चों के उपचार का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 

कोरोना संक्रमित गर्भवतियों के लिए बनेंगे अस्थायी लेबर रूम

कोविड महामारी की पहली और दूसरी लहर से मातृत्व स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा है। इसे देखते हुए अब प्रसव सुविधा वाले सरकारी अस्पतालों में कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से अस्थायी लेबर रूम की व्यवस्था की जाएगी। जिससे बिना संक्रमित गर्भवती महिलाओं को भी अस्पताल में इलाज की सुविधा मिल सके। 

स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को कोविड महामारी के दौरान मातृत्व स्वास्थ्य सेवा को समय पर उपलब्ध कराने और उपचार के लिए मानक प्रचालन विधि (एसओपी) जारी की है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मातृत्व स्वास्थ्य अनुभाग, दून मेडिकल कालेज और यूएसएआईडी प्रोजेक्ट के माध्यम से एसओपी को बनाया गया। 
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक डॉ. सरोज नैथानी ने कहा कि कोरोना काल में गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पतालों में बेहतर इलाज की सुविधा मिले।

इसके लिए एसओपी जारी की गई है। जिन अस्पतालों में प्रसव की सुविधा है, वहां पर कोरोना संक्रमित गर्भवती महिलाओं के लिए अस्थायी लेबर रूम व्यवस्था की जाएगी। इससे जो महिलाएं संक्रमित नहीं हैं, उन्हें संक्रमण से बचाया जा सके। संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार और सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज हल्द्वानी ने नॉन कोविड प्रसवों के लिए अलग से व्यवस्था की है। 

डॉ. नैथानी ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सभी जिलों को एसओपी का पालन करने को कहा गया है। जिससे मातृ मृत्यु दर को किया जा सके। प्रदेश भर में कार्यरत स्त्री रोग विशेषज्ञों को आनलाइन के माध्यम से ट्रेनिंग भी दी गई है। जिसमें दून मेडिकल कालेज की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. चित्रा जोशी व उनकी टीम के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। 

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