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बन्नू स्कूल चौक पर वाल्मीकि प्रतिमा लगाए जाने पर विवाद
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रेसकोर्स में वाल्मीकि जी की मूर्ति स्थापित करने को लेकर हुये विवाद के दौरान एक पक्ष और पुलिस में ?
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रेसकोर्स स्थित बन्नू स्कूल चौक पर वाल्मीकि प्रतिमा लगाए जाने को लेकर विवाद हो गया। वाल्मीकि समाज की ओर से कराए जा रहे काम को प्रशासन ने रुकवा दिया। इस दौरान करीब सात घंटे प्रशासन और समाज के लोगों में वार्ता हुई। इसके बाद तय हुआ कि दो नवंबर को भव्य रूप आयोजन किया जाएगा और फिर प्रतिमा की स्थापना की जाएगी।
दरअसल, बुधवार को वाल्मीकि जयंती के अवसर पर समाज के लोग बन्नू स्कूल चौराहे पर पहुंचे थे। यहां पर पहले भंडारा हुआ और इसके बाद उन्होंने वहां महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापना का काम शुरू कर दिया। दोपहर करीब एक बजे जब प्रशासन को इसकी खबर लगी तो मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स पहुंच गई। बताया जा रहा है कि वाल्मीकि समाज की क्षेत्रीय विधायक से प्रतिमा स्थापना को लेकर बात हो गई थी, लेकिन प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई। इसके लिए दो नवंबर का दिन रखा गया था, मगर वह नियत तिथि से पहले ही वहां पर स्थापना के लिए पहुंच गए। इस बात को लेकर वहां पर एडीएम प्रशासन एसके बर्नवाल भी मौके पर पहुंच गए। वहां पर कई दौर में वाल्मीकि समाज और प्रशासन के बीच वार्ता हुई। शाम करीब आठ बजे प्रशासन और वाल्मीकि समाज के बीच में सहमति बनी कि प्रतिमा स्थापना अब दो नवंबर को ही की जाएगी। इस अवसर पर भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दौरान महिला कांग्रेस उपाध्यक्ष आशा टम्टा भी मौके पर पहुंचीं और क्षेत्रीय विधायक व पार्षद पर गायब रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि देश के महान संतों में हैं। विधायक ने पहले स्थानीय लोगों का साथ देने का वादा किया, लेकिन अब वो वादे से पलट गए हैं।
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इन लोगों का क्षेत्रीय विधायक विनोद चमोली के साथ पहले से मामला तय है। विधायक ने उन्होंने मूर्ति लगवाने का आश्वासन दिया है। वाल्मीकि जयंती के मौके पर उन्होंने कुछ जल्दबाजी कर दी। उन्हें समझाया गया है कि भव्य आयोजन के साथ मूर्ति लगाई जाएगी। फिलहाल सभी की सहमति से वहां से सब कुछ हटा लिया गया है। अभी किसी तरह का विवाद नहीं है।
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-एसके बर्नवाल, एडीएम (ई)
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दो नवंबर को प्रतिमा स्थापना का दिन तय हुआ था। हमने महर्षि वाल्मीकि जयंती के दिन ही वहां पर काम शुरू कर दिया था। प्रशासन और विधायक हमारे साथ हैं। अब दो नवंबर को भव्य आयोजन के साथ वहां पर प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मेयर सुनील उनियाल गामा से भी हमारी बात हो गई है। उन्होंने भी आश्वासन दिया है।
-जयपाल वाल्मीकि, राष्ट्रीय महामंत्री, महर्षि वाल्मीकि सेना
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दरअसल, बुधवार को वाल्मीकि जयंती के अवसर पर समाज के लोग बन्नू स्कूल चौराहे पर पहुंचे थे। यहां पर पहले भंडारा हुआ और इसके बाद उन्होंने वहां महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा स्थापना का काम शुरू कर दिया। दोपहर करीब एक बजे जब प्रशासन को इसकी खबर लगी तो मौके पर भारी संख्या में पुलिस फोर्स पहुंच गई। बताया जा रहा है कि वाल्मीकि समाज की क्षेत्रीय विधायक से प्रतिमा स्थापना को लेकर बात हो गई थी, लेकिन प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई। इसके लिए दो नवंबर का दिन रखा गया था, मगर वह नियत तिथि से पहले ही वहां पर स्थापना के लिए पहुंच गए। इस बात को लेकर वहां पर एडीएम प्रशासन एसके बर्नवाल भी मौके पर पहुंच गए। वहां पर कई दौर में वाल्मीकि समाज और प्रशासन के बीच वार्ता हुई। शाम करीब आठ बजे प्रशासन और वाल्मीकि समाज के बीच में सहमति बनी कि प्रतिमा स्थापना अब दो नवंबर को ही की जाएगी। इस अवसर पर भव्य आयोजन किया जाएगा। इस दौरान महिला कांग्रेस उपाध्यक्ष आशा टम्टा भी मौके पर पहुंचीं और क्षेत्रीय विधायक व पार्षद पर गायब रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि देश के महान संतों में हैं। विधायक ने पहले स्थानीय लोगों का साथ देने का वादा किया, लेकिन अब वो वादे से पलट गए हैं।
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इन लोगों का क्षेत्रीय विधायक विनोद चमोली के साथ पहले से मामला तय है। विधायक ने उन्होंने मूर्ति लगवाने का आश्वासन दिया है। वाल्मीकि जयंती के मौके पर उन्होंने कुछ जल्दबाजी कर दी। उन्हें समझाया गया है कि भव्य आयोजन के साथ मूर्ति लगाई जाएगी। फिलहाल सभी की सहमति से वहां से सब कुछ हटा लिया गया है। अभी किसी तरह का विवाद नहीं है।
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-एसके बर्नवाल, एडीएम (ई)
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दो नवंबर को प्रतिमा स्थापना का दिन तय हुआ था। हमने महर्षि वाल्मीकि जयंती के दिन ही वहां पर काम शुरू कर दिया था। प्रशासन और विधायक हमारे साथ हैं। अब दो नवंबर को भव्य आयोजन के साथ वहां पर प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मेयर सुनील उनियाल गामा से भी हमारी बात हो गई है। उन्होंने भी आश्वासन दिया है।
-जयपाल वाल्मीकि, राष्ट्रीय महामंत्री, महर्षि वाल्मीकि सेना