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Dehradun News: पुलिस की कहानी में विरोधाभास, दो आरोपी 14 साल बाद बरी
Tue, 03 Nov 2026 06:22 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Tue, 03 Nov 2026 06:22 PM IST
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- फर्द बरामदगी साबित नहीं कर सका अभियोजन, तीसरे आरोपी की मौत से कार्यवाही समाप्त
टैग..अदालत से
विकासनगर। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने बाइक चोरी के 14 साल पुराने मामले में विकासनगर कोतवाली क्षेत्र के लाइन जीवनगढ़, निवासी सन्नी और भीमावाला रोड, विकासनगर चुंगी निवासी प्रवीण चंदेल को पुलिस की कहानी में विरोधाभास के कारण मंगलवार को दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन के अनुसार 20 जून 2012 को योगेश कुमार की बाइक कटा पत्थर में सिंचाई विभाग के पार्क के गेट के बाहर से चोरी हुई थी। योगेश के जीजा संजीव कुमार की शिकायत पर चौकी डाकपत्थर में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस का दावा था कि 29 जून 2012 को सहसपुर पुलिस ने एक लूटी गई पिकअप के साथ सन्नी, दीपक उर्फ दीपू और प्रवीण को पकड़ा और बिना नंबर की यह बाइक बरामद हुई।
कोर्ट ने पाया कि चोरी का कोई चश्मदीद नहीं था। वादी योगेश ने प्रतिपरीक्षा में कहा कि प्रवीण ने बाइक छुड़वाने में उनकी मदद की थी और वह चोरी के समय उनके साथ था। इससे अभियोजन की कहानी स्वयं विरोधाभासी हो गई। बरामदगी की फर्द की मूल प्रति न्यायालय में पेश नहीं हुई और न ही उसे प्रदर्श के रूप में साबित किया गया। इसलिए संदेह का लाभ देते हुए दोनों बरी किए गए। तीसरे आरोपी दीपक की मृत्यु पर कार्यवाही पहले ही समाप्त हो चुकी है।
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विकासनगर। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिषेक कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने बाइक चोरी के 14 साल पुराने मामले में विकासनगर कोतवाली क्षेत्र के लाइन जीवनगढ़, निवासी सन्नी और भीमावाला रोड, विकासनगर चुंगी निवासी प्रवीण चंदेल को पुलिस की कहानी में विरोधाभास के कारण मंगलवार को दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन के अनुसार 20 जून 2012 को योगेश कुमार की बाइक कटा पत्थर में सिंचाई विभाग के पार्क के गेट के बाहर से चोरी हुई थी। योगेश के जीजा संजीव कुमार की शिकायत पर चौकी डाकपत्थर में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस का दावा था कि 29 जून 2012 को सहसपुर पुलिस ने एक लूटी गई पिकअप के साथ सन्नी, दीपक उर्फ दीपू और प्रवीण को पकड़ा और बिना नंबर की यह बाइक बरामद हुई।
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कोर्ट ने पाया कि चोरी का कोई चश्मदीद नहीं था। वादी योगेश ने प्रतिपरीक्षा में कहा कि प्रवीण ने बाइक छुड़वाने में उनकी मदद की थी और वह चोरी के समय उनके साथ था। इससे अभियोजन की कहानी स्वयं विरोधाभासी हो गई। बरामदगी की फर्द की मूल प्रति न्यायालय में पेश नहीं हुई और न ही उसे प्रदर्श के रूप में साबित किया गया। इसलिए संदेह का लाभ देते हुए दोनों बरी किए गए। तीसरे आरोपी दीपक की मृत्यु पर कार्यवाही पहले ही समाप्त हो चुकी है।
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