फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Dehradun Police Special Dog Thanga heavy on foreign breed dogs Story

Dehradun: पुलिस ने गली से उठाकर दी थी खास ट्रेनिंग, आज विदेशी नस्ल के कुत्तों पर भारी है पुलिस का ‘ठेंगा'

Tue, 24 Oct 2023 08:40 PM IST
देहरादून ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: देहरादून ब्यूरो Updated Tue, 24 Oct 2023 08:40 PM IST
सार

ठेंगा की ट्रेनिंग और पालन पर विदेशी नस्ल की अपेक्षा खर्च भी कम आता है। ठेंगा इस वक्त एसडीआरएफ के पास है।

विज्ञापन
Dehradun Police Special Dog Thanga heavy on foreign breed dogs Story
कुत्ता ठेंगा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देश में पुलिस के लिए देसी नस्ल के कुत्तों को पालने पर विचार चल रहा है, लेकिन उत्तराखंड पुलिस इस प्रयोग को चार साल पहले ही कर चुकी है। यह भी कोई विशेष देसी नस्ल पर नहीं, बल्कि गली से उठाए एक कुत्ते को पालकर। इसे नाम दिया गया था ठेंगा।

विज्ञापन


अब यही ठेंगा एसडीआरएफ के विभिन्न सर्च एंड रेस्क्यू अभियानों में विदेशी नस्ल के कुत्तों पर भी भारी पड़ रहा है। ठेंगा की ट्रेनिंग और पालन पर विदेशी नस्ल की अपेक्षा खर्च भी कम आता है। ठेंगा इस वक्त एसडीआरएफ के पास है। वह हादसे या आपदा के बाद एसडीआरएफ टीम के साथ मौके पर जाता है।
विज्ञापन


Dehradun: एसटीएफ ने अमरोहा से पकड़ा 50 हजार का इनामी, कमांडेंट की नाबालिग बेटी को अगवा कर किया था दुष्कर्म
विज्ञापन
विज्ञापन


सबसे ज्यादा चुस्त है ठेंगा
ठेंगा के हैंडलर कांस्टेबल शैंलेंद्र ने बताया कि यह विदेशी नस्ल के कुत्तों की अपेक्षा बेहद चुस्त है। इसका आकार छोटा है, इसलिए उसे बाधाओं को पार करने में भी आसानी होती है। जीवित लोगों को खोजने में इसका कोई तोड़ नहीं है। ठेंगा को एक बार वह पंचकुला भी लेकर गए थे। वहां सीआरपीएफ सेंटर में सभी बाधाओं को पार कर ठेंगा ने बेहतर प्रदर्शन किया था। कई बार आपदा के बाद जीवित लोगों को खोजने में अब तक इसका बेहतर प्रदर्शन रहा है।


खर्च और बीमारी भी कम
ठेंगा को अन्य कुत्तों की तरह भोजन आदि दिया जाता है। खास बात है कि इस पर वैक्सीनेशन का खर्च अन्य कुत्तों की अपेक्षा बेहद कम है। चार साल में यह बमुश्किल दो या तीन बार ही बीमार पड़ा है। इसके बाद मामूली इलाज के बाद ही वह ठीक भी हो जाता है। शैलेंद्र ने बताया कि विदेशी नस्ल के कुत्तों को बार-बार वैक्सीन देनी पड़ती है।

ऐसे बना था ठेंगा पुलिस परिवार का हिस्सा
वर्ष 2019 में बम डिस्पोजल स्क्वायड प्रभारी कमलेश पंत की बेटी गली से एक तीन महीने का पिल्ला उठाकर घर ले आई थी। उस वक्त वह गली के आवारा कुत्तों में से ही एक था, लेकिन देखते ही देखते यह अब आम से खास हो चुका है। उसी वक्त कमलेश पंत ने तत्कालीन आईजी संजय गुंज्याल से इस कुत्ते को पुलिस के लिए ट्रेनिंग देने को लेकर बात की। आईजी गुंज्याल ने भी हामी भर दी और अपने खर्च पर इस कुत्ते को छह महीने तक ट्रेनिंग दी। उसे ठेंगा नाम भी दे दिया गया। ठेंगा को सर्च एंड रेक्यू (खोज एवं बचाव) की ट्रेनिंग दी गई थी। उस वक्त ट्रेनिंग देने वालों का दावा था कि जो कुत्ते एक काम को सीखने में महीनों का वक्त लगाते हैं, उसे ठेंगा महज 20 दिनों में ही सीख गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed