वैज्ञानिकों ने ढूंढा हिमालय और मानवों के संबंध का 'सच'
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बर्फ से ढकी उच्च हिमालयी पर्वतीय शृंखलाओं में आशियाना बनाना आदि मानवों को कभी पसंद नहीं आया।
ऊपरी हिमालय में मानव का एक भी जीवाश्म नहीं मिला है। साथ ही आदि मानवों द्वारा बतौर हथियार इस्तेमाल किए जाने वाले पत्थर भी नहीं मिले। वैज्ञानिकों का कहना है कि लाखों साल पहले जैसे ही हिमालय ऊंचा हुआ जलवायु परिवर्तन शुरू हो गया और आदि मानव व कपि मानव (बंदर के जैसे दिखने वाले) उच्च शिवालिक से नीचे आ गए।
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण की टीम को निम्न और मध्य हिमालय में आदि मानव और कपि मानव के ढाई सौ से अधिक जीवाश्म मिले हैं, लेकिन उच्च शिवालिक में कोई जीवाश्म नहीं मिला है।
वरिष्ठ पुरा मानव विज्ञानी और जीवाश्म विशेषज्ञ डॉ. एआर संख्यान की अगुवाई में विज्ञानियों की टीम ने वर्ष 1975-76 से शिवालिक क्षेत्र में आदि मानव, कपि मानव और आधुनिक मानवों के जीवाश्म खोजने के लिए शोध शुरू किया था।
शोध का सिलसिला अब भी जारी है। हिमालय की बर्फीली वादियों में आदि मानव के जीवाश्म का न मिलना दुनिया के मानव विज्ञानियों को चौंका रहा है।
अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में हो चुकी है चर्चा
इस शोध पर अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों में कई दौर की चर्चा हो चुकी है। विज्ञानियों के अनुसार, जांच से पता चला है कि आधुनिक मानव के जीवाश्म 20 लाख साल पुराने हैं। जीवाश्म की जांचों के आधार पर माना जा रहा है कि कपि मानव की उत्पत्ति शिवालिक क्षेत्र में ही हुई थी।
डेढ़ लाख साल पहले से कमजोर होने लगा मानव
मानव जीवाश्म की जांचों से पता चला है कि आधुनिक मानव डेढ़ लाख साल से शारीरिक तौर पर कमजोर होता जा रहा है। पुरा मानव विज्ञानियों के मुताबिक 20 लाख साल पहले मानव की अस्थियां मजबूत और चौड़ी थीं।
भौंह बहुत मोटी होती थी। मांसल शरीर और कपाल की अस्थि मोटी और चौड़ी होती थी, लेकिन डेढ़ लाख साल से हड्डियां छोटी और पतली होने लगीं और शरीर का आकार घटता गया।
आदि मानव का कोई जीवाश्म ऊपरी हिमालय में नहीं मिला। सारे जीवाश्म निम्न और मध्य हिमालय में मिले हैं। आधुनिक मानव का सबसे पुराना जीवाश्म नर्मदा घाटी में मिला है। कपि मानव और आदि मानवों के जीवाश्म खोजने का अभियान जारी है।
- डॉ. एआर संख्यान, वरिष्ठ पुरा मानव विज्ञानी एवं जीवाश्म विशेषज्ञ