{"_id":"589428744f1c1bda17e80bd1","slug":"congress-did-not-want-dispute-in-kumaon","type":"story","status":"publish","title_hn":"कुमाऊं में कांग्रेस को मंजूर नहीं भितरघात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कुमाऊं में कांग्रेस को मंजूर नहीं भितरघात
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Fri, 03 Feb 2017 12:22 PM IST
विज्ञापन
harish rawat
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुमाऊं की चार सीटों पर आखिरकार मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मान लिया कि भितरघात का सामना करने से बेहतर असंतोष का खुलकर सामना करना है। बृहस्पतिवार को लालकुआं में हरेंद्र बोरा, भीमताल में राम सिंह कैड़ा, नैनीताल में केएल आर्र्या और द्वाराहाट में कुबेर सिंह कठायत को पार्टी से निष्कासित कर रावत ने अपनी इस रणनीति का खुलासा कर भी दिया। यही वे सीटें भी रहीं जिन पर कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी न के बराबर की।
विज्ञापन
कुमाऊं की 29 विधानसभाओं में से करीब एक दर्जन पर कांग्रेस को प्रत्याशी घोषित करते ही बगावत, असंतोष और विद्रोह का सामना करना पड़ा था। नाम वापसी तक कांग्रेस इनमें से करीब आठ सीटों पर बागियों को मनाने और समझाने में कुछ हद तक कामयाब रही। बृहस्पतिवार को कांग्रेस ने बाकी बची चार सीटों पर विद्रोहियों को पार्र्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के मुताबिक भीमताल में राम सिंह कैड़ा, नैनीताल में केएल आर्य, लालकुआं में हरेंद्र बोरा और द्वाराहाट में कुबेर सिंह कठायत को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित किया गया है।
विज्ञापन
यही वे सीटें भी रहीं, जिन पर कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश भी न के बराबर की। दान सिंह भंडारी का नाम घोषित होने के बाद से ही कांग्रेस के प्रदेश सचिव रहते हुए राम सिंह कैड़ा ने विद्रोही तेवर अपना लिए थे। इतना होने पर भी दान सिंह भंडारी की स्थिति को मजबूत मानते हुए कांग्रेस ने इस सीट पर कैड़ा को समझाने-बुझाने की कोई कोशिश की ही नहीं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कैड़ा अगर मान भी जाते तो पार्टी को भितरघात का सामना करना पड़ सकता था।
विज्ञापन
यही स्थिति नैनीताल सीट पर भी रही। यहां परोक्ष रूप से कांग्रेस को बागी कांग्रेसी नेता यशपाल आर्य की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान कांग्रेस विधायक सरिता आर्य के सामने संजीव हैं। ऐसे में कांग्रेस यहां टूट फूट का शिकार हो सकती है। इस स्थिति को देखते हुए यहां केएल आर्या को मनाने की कोशिश तक नहीं की गई।
लालकुआं में हरेंद्र बोरा को मनाने की कोशिश हुई, लेकिन आधी-अधूरी। यहां पर रावत बाद में जीतने वाले को ही मनाएंगे। द्वाराहाट में बागी कुबेर सिंह कठायत को मनाने के लिए भी कांग्रेस ने खास कोशिश नहीं की। कुमाऊं में डैमेज कंट्रोल मुख्यमंत्री हरीश रावत के हाथ में ही रहा। ऊधमसिंह नगर में रावत ने किच्छा और आसपास की सीटों पर असंतोष से पड़ने वाले प्रभाव के आधार डैमेज कंट्रोल की कोशिश रावत ने की।