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उत्तराखंड में कांग्रेस के उम्मीदवार तय, ऐलान बाकी
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 31 Mar 2014 09:25 PM IST
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उत्तराखंड कांग्रेस सोमवार को पूरे दिन उम्मीदवारों की घोषणा की आस लगाए रही। प्रदेश नेतृत्व ने काफी जद्दोजहद के लड़ाकों को तैयार कर लिया है लेकिन केंद्रीय नेतृत्व उनके नामों की घोषणा फिर भी नहीं कर सका है।
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ना-ना करते-करते पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हां कर दी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो बहुगुणा ही टिहरी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। बहुगुणा यहां से सांसद रहे हैं और इस सीट से उनका पुराना जुड़ाव है।
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पौड़ी संसदीय सीट का पेंच भी लगभग फिट हो गया है। सरकार के दो मंत्रियों हरक सिंह रावत और सुरेन्द्र सिंह नेगी के इंकार के बाद भाजपा के फौजी जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के खिलाफ कांग्रेस जनरल गंभीर सिंह नेगी को उम्मीदवार बना रही है।
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हरिद्वार से रेणुका का लड़ना तय
हरिद्वार सीट पर हरीश रावत की पत्नी रेणुका कांग्रेस का झंडा बुलंद करेंगी। जबकि वर्तमान सांसदों में नैनीताल से केसी.बाबा और अल्मोड़ा सुरक्षित सीट से प्रदीप टम्टा फिर मैदान में होंगे।
टिकट बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री हरीश रावत और प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य की राजनीतिक रणनीति पूरी तरह से फेल रही है। कई महीने पहले से प्रदेश कांग्रेस ने आलाकमान को प्रस्ताव भेजकर सोनिया गांधी को उम्मीदवारी तय करने का अधिकार सौंपा था।
पार्टी की भी फजीहत
बावजूद टिकट को लेकर जिस तरह का द्वंद्व और हंगामा मचा उसने पार्टी की भी फजीहत कराई है। आलाकमान और तय उम्मीदवारों के लगातार दबाव ने मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के पसीने छुड़ा दिए। मुख्यमंत्री आपदा से जुड़ा कामकाज छोड़ टिकट को अंतिम रूप देने के लिए दिल्ली के चक्कर लगाते रहे।
प्रदेश कांग्रेस ने जिलों और ब्लाक स्तर से उम्मीदवारों के पैनल मांगे थे जिन्हें खोलकर देखा तक नहीं गया। दिल्ली में हुई स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में प्रदेश से भारी-भरकम इकलौते नामों को केंद्रीय चुनाव समिति को भेज दिया गया। जबकि न तो पौड़ी से सतपाल महाराज लड़ना चाहते थे और न टिहरी से विजय बहुगुणा।
हरीश रावत पर ही फैसला छोड़ा गया
टिकटों की घोषणा अभी तक न होने का कारण भी यही दोनों सीटें रही हैं। हरिद्वार सीट पर हरीश रावत पर ही फैसला छोड़ा गया था। उम्मीदवार उन्हीं केपरिवार से होगा यह भी तय था लेकिन अंतिम समय तक रहस्य बनाए रखा गया।
मुख्यमंत्री हरीश रावत वर्तमान राजनेताओं में सबसे अधिक उम्र और तजुर्बे के हों लेकिन राजनीतिक शह-मात के खेल में उनके प्रतिद्वंद्वी उन्हें आखिरी तक फंसाए रखा। करीब दो महीने केकार्यकाल में लगातार उनकी राजनैतिक परीक्षाएं हो रही हैं।
यशपाल आर्य ने प्रदेश अध्यक्षी से बहुत पहले ही इस्तीफा देकर खुद को किनारे कर लिया था लेकिन हरीश रावत उन्हें भी साथ-साथ खींच रहे हैं। करीब सात सालों से अध्यक्ष की कुर्सी सफलता से संभालने और जिताऊ कहलाने वाले आर्य भी इस परीक्षा में फेल हुए हैं।
प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी और सह प्रभारी संजय कपूर के लोकसभा चुनाव लड़ने की वजह से भी उम्मीदवारों को लेकर देर हुई है।