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वार्ड के 'आकाओं' को नहीं वार्ड की चिंता
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 27 Sep 2013 10:43 AM IST
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देहरादून नगर निगम की बैठक में पार्षदों के हंगामे ने साबित कर दिया कि शहर की चिंता किसी को नहीं।
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बैठक में हाउस टैक्स, संविदा कर्मियों के वेतन व अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी, कई प्रस्तावों को अमलीजामा पहनाया जाना था। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। शहर के लाखों लोगों की उम्मीदों को गहररा झटका लगा। हाउस टैक्स का मामला लंबे समय से लटका हुआ है।
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हाउस टैक्स के दायरे में न आने से लाखों लोग परेशान हैं। संपत्ति के बंटवारे से लेकर बेचने या खरीदने में परेशानी हो रही है। इसके अलावा बोर्ड बैठक में रेसकोर्स रोड, कांवली रोड और मालवीय रोड पर बनने वाले कामर्शियल प्रोजेक्ट के प्रस्ताव भी पेश होने थे। साथ नगर निगम के अधीन आने वाली दुकानों के नए अनुबंध के बारे में चर्चा भी इस बार होनी थी।
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वहीं, नए परिसीमन के बाद नगर निगम में शामिल हुए 18 गांव में विकास की रूपरेखा तैयार होने की उम्मीद भी लोगों को थी।
इन प्रस्तावों पर चर्चा थी प्रस्तावित
निगम का मूल बजट - नगर निगम के मूल बजट में पूरे साल भर का कार्य योजना में व्यय होने वाली मदों के साथ ही निगम की अपने कर्मचारियों की तनख्वाह होती है। इसमें इस बार चर्चा होनी थी। इस चर्चा पर नगर निगम के कर्मचारियों की बहुत आस लगी हुई थी।
निगम के खाली प्लाटों का सर्वे - निगम के पास कितनी जमीन है और उसका क्या उपयोग करना है। यह भी इस बार तय होना था। प्लाटों का किराया एक रुपए प्रति वर्ग मीटर रखा जाए-निगम को खाली प्लाटों से आय होती है। इस आय से निगम को आर्थिक तौर पर बेहद सहायता मिलती है। लेकिन चर्चा न होने के कारण यह रेट तय नहीं हो सके। जिसका खामियाजा निगम को ही उठाना पड़ेगा।
दुकानदारों का जुर्माना माफ - किराया न देने वाले दुकानदारों का जुर्माना माफ किया जाए। पिछले कई सालों से दुकानदारों ने किराया नहीं दिया है। उन्हें डर है कि अगर जुर्माना देना पड़ा तो वह हजारों रुपयों में हो सकता है। लेकिन यह भी इस बार तय नहीं हो सका।
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