इनके पास है ऐसे दुर्लभ नोटों का कलेक्शन, बंद होने के बाद भी वैल्यू न होगी कम
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नोटबंदी के झटके चलते पिछले 40 साल से अंतिम तीन अंक 786 की सीरीज समेत अन्य लकी नंबरों के लाखों के नोट संग्रह करने वाले डॉ. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी की पेशानी पर बल कुछ गहरा गए हैं। हालांकि इससे उन नोटों का यश, महत्व और ऐतिहासिक मोल कम नहीं हुआ है।
यूं तो इन नोटों की फेस वैल्यू शून्य हो जाएगी, लेकिन देश में इनका ऐतिहासिक महत्व और बढ़ जाएगा। नोटों के संग्रह के शौकीन गोल्डी लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने के लिए छह माह पहले आवेदन कर चुके हैं।
उन्हें इस बात का कुछ मलाल जरूर है कि संग्रह किए गए 500-1000 के लगभग सात लाख के नोटों का वास्तविक मूल्य मार्च 2017 के बाद जीरो हो जाएगा।
एक से लेकर एक हजार तक तक के नोटों का संग्रह
गोल्डी बीकॉम और एमकॉम में कुमाऊं यूनिवर्सिटी नैनीताल के गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं और वहीं से उन्होंने पीएचडी भी की। सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता के रूप में पहचान बना चुके गोल्डी ने 14 मई 2016 को लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड गुड़गांव को भेजे पत्र में भारतीय करेंसी के अनूठे संग्रह का रिकॉर्ड दर्ज कराने के लिए आवेदन किया था।
उन्होंने बताया कि रिकॉर्ड का जायजा लेने के लिए गुड़गांव से टीम हल्द्वानी आ रही है। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा पुराने नोटों पर रोक लगाने से उन्हें झटका भी लगा है।
मूल रूप से कारोबारी हल्द्वानी निवासी गोल्डी ने देश में नोटों और सिक्कों का अनूठा संग्रह कर सर्वधर्म सम्भाव का संदेश देने की भी कोशिश की है। उनके पास एक से लेकर एक हजार रुपये तक के खास नोटों का संग्रह हैं।
हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के शुभ अंकों के नोट
इसमें 2749 नोट ऐसे हैं, जिनके अंतिम अंक 786 हैं। यह नंबर मुस्लिम समुदाय के लिए शुभ और पवित्र माना जाता है। हिंदुओं में 101 का अंक शुभ माना जाता है। इन अंकों की सीरीज के नोट भी उनके पास हैं। इसी तरह सिखों के गुरु नानकदेव की 300वीं जयंती पर जारी 50 ग्राम चांदी और 10 ग्राम सोने का सिक्का भी उन्होंने स्पेशल डिमांड पर मंगवाया।
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी और 26 बार रक्तदान कर चुके गोल्डी के संग्रह में अंतिम अंकों में 786, 420, 101, 100, 1901, 2016, 9999 आदि के इन नोटों का कुल मूल्य करीब आठ लाख है।
गोल्डी बताते हैं कि 40 सालों में संग्रह किए गए खास नंबरों के नोट उनकी आंखों में बसे हैं। नोट बंदी के बावजूद वह विशिष्ट नोटों के संग्रह में जुटे हुए हैं।
आयकर रिटर्न में दर्शाते हैं सारे नोट
उनका दावा है कि यह ब्लैक मनी नहीं है और पिछले 15 साल से आयकर रिटर्न में इसे दर्शाते आ रहे हैं। इसके अलावा, उनके पास मिस प्रिंटिंग, नंबर मिसिंग और साइज गड़बड़ी वाले नोटों का भी संग्रह है। ऐसी लापरवाही पर वह आरबीआई को पत्र भेज कर ध्यान दिला चुके हैं।
उनके पास स्टार लगे नोटों का संग्रह भी है, जो कटे-फटे नोटों के बदले आरबीआई की ओर से समय-समय पर जारी किए जाते हैं। गोल्डी की तमन्ना है कि इन नोटों के मूल्य शून्य होने से पहले विशिष्ट संग्रह का रिकॉर्ड लिम्का बुक में दर्ज हो जाए। उन्हें लायंस क्लब इंटरनेशनल अमेरिका से डायमंड और गोल्ड पिन के अलावा कई राष्ट्रीय-राज्य स्तरीय पुरस्कारों और सम्मान से नवाजा जा चुका है।