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14 साल के राज्य में ढाई साल की आचार संहिता
अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Mon, 07 Jul 2014 05:38 PM IST
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चौदह साल के उत्तराखंड में करीब ढाई साल चुनाव आचार संहिता रही। इससे साफ है कि यह राज्य विकास में नहीं बल्कि चुनाव की दौड़ में सबसे आगे चल रहा है।
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विकास में नहीं चुनावों में आगे है उत्तराखंड
सूचना के अधिकार से मिली जानकारी में इसका खुलासा हुआ। राज्य गठन से अब तक ढाई साल यानी 889 दिन तक चुनाव आचार संहिता लगी रही। राज्य का गठन 9 नवंबर 2000 को हुआ।
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राज्य में वर्ष 2002 से 2014 के मध्य विभिन्न सामान्य निर्वाचनों के दौरान अलग-अलग तरह की आचार संहिता लगी रही।
वर्ष 2002 में विधानसभा चुनाव के लिए 64 दिन, 2004 में लोकसभा चुनाव के लिए 87 दिन, 2007 में विधानसभा चुनाव के लिए 64 दिन, 2009 में लोकसभा चुनाव के लिए 88 दिन, 2012 में विधान सभा चुनाव के लिए 76 दिन, 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए 85 दिन यानी कुल 464 दिन चुनाव आचार संहिता रही।
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2002 में रामनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए 31 दिन, इसी साल नैनीताल लोकसभा उपचुनाव के लिए 54 दिन, 2004 में अल्मोड़ा की द्वाराहाट विधानसभा उपचुनाव के लिए 38 दिन आचार संहिता लगी थी।
2005 में कोटद्वार विधानसभा उपचुनाव के लिए 31 दिन, 2007 में धूमाकोट विधानसभा उपचुनाव के लिए 32 दिन, 2008 में गढ़वाल लोकसभा उपचुनाव के लिए 30 दिन, 2009 में देहरादून की विकासनगर विधानसभा उपचुनाव के लिए 37 दिन आचार संहिता लागू रही थी।
2009 में ही कपकोट विधानसभा उपचुनाव के लिए 45 दिन, 2012 में सितारगंज विधानसभा उपचुनाव के लिए 36 दिन, 2012 में ही टिहरी गढ़वाल लोकसभा उपचुनाव के लिए 47 दिन लगी रही।
आरटीआई से पता चला सच
वर्ष 2014 में इस समय डोईवाला, सोमेश्वर और धारचूला विधानसभा उपचुनाव के लिए 31 जुलाई तक 44 दिनों के लिए आचार संहिता लगी हुई है।
आरटीआई कार्यकर्ता डा. प्रमोद अग्रवाल गोल्डी द्वारा मांगी गई जानकारी में बताया गया है कि उप निर्वाचन के लिए 425 दिन और सामान्य निर्वाचन के लिए 464 दिन की आचार संहिता लगी रही। इस तरह कुल 889 दिन तक प्रदेश में आचार संहिता लगी रही।