उत्तराखंड: प्रदेश में सहकारिता चुनाव का रास्ता साफ, चुनौती देने वाली एक दर्जन याचिकाएं खारिज
सहकारिता चुनाव में प्रदेश सरकार को मंगलवार को राहत मिली है। हाईकोर्ट ने चुनाव संबंधित करीब आधा दर्जन याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
न्यायाधीश सुधांशु धूलिया की पीठ में इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि सहकारिता चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद याचिकाएं दायर की गई हैं। सरकार ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने एनपी पुन्नुस्वामी के मामले में यह स्पष्ट किया है कि चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद याचिकाएं दायर नहीं की जा सकती है।
इस पर पीठ ने सरकार के तर्क को स्वीकार करते हुए इस मामले में दायर करीब आधा दर्जन याचिकाओं को खारिज करते हुए निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने पूर्व में ऊधमसिंह नगर निवासी राजेंद्र सिंह व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए सहकारिता चुनाव पर अंतरिम रोक का आदेश जारी किया था। याचिका में कहा गया था कि चुनाव प्रक्रिया नियम विरुद्ध है। इसमें कई नियमों की अनदेखी की जा रही है।
प्रदेश में इस समय सहकारिता चुनाव की प्रक्रिया जारी है। कुछ समय पहले ही पैक्स समितियों के निदेशकों के चुनाव के समय भी खासा हंगामा बरपा था। सहकारिता चुनाव में अभी तक कांग्रेस का दबदबा रहा है और इस बार भाजपा की पूरी कोशिश इसी दबदबे को तोड़ने की है।
पौड़ी डीएम समेत चार को अवमानना नोटिस जारी
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने मंगलवार को जिलाधिकारी पौड़ी सुशील कुमार, निबंधक (सहकारिता) बीएम मिश्रा, सहकारी चुनाव अभिकरण के अध्यक्ष, पौड़ी सहकारी समितियों के सहायक निबंधक जीएस नपलच्याल को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट ने यह नोटिस तीन अगस्त 2018 को पौड़ी जिले की दो सहकारी समितियों के चुनाव कराने के आदेश का पालन न करने पर जारी किया है। इन दो सहकारी समितियों का चुनाव 20 और 21 अगस्त को होना था। लेकिन, तय तिथि पर समितियों के चुनाव नहीं कराए गए। इसके बाद यशपाल सिंह और नरेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी।