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सीएम की अग्नि परीक्षा : चंपावत में धामी के लिए चक्रव्यूह रचेगी कांग्रेस, पढ़िए राज्य में उपचुनाव का रोचक इतिहास

Fri, 22 Apr 2022 11:19 AM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 22 Apr 2022 11:19 AM IST
सार

उत्तराखंड में  एनडी तिवारी, बीसी खंडूड़ी, विजय बहुगुणा और हरीश रावत के सामने उपचुनाव की चुनौती आई। अब सीएम धामी के सामने यह चुनौती है। चंपावत का समर मुख्यमंत्री धामी के लिए ही अग्नि परीक्षा से गुजरना नहीं होगा बल्कि इस इम्तिहान से कांग्रेस के तीन क्षत्रप भी गुजरेंगे।

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CM Pushkar Singh Dhami, by-election 2022, Congress will create Chakravyuh for Dhami in Champawat, interesting history of by-election
सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

विस्तार

चंपावत विधानसभा सीट से कैलाश गहतोड़ी के इस्तीफे के साथ ही सबकी निगाहें अब आगामी दिनों में होनी वाली चुनावी जंग पर लगी है। साफ है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस सीट पर चुनाव लड़ेंगे। यह भी सच है कि राज्य में मुख्यमंत्रियों के उपचुनावों का इतिहास जीत का रहा है, लेकिन विधानसभा चुनाव में पराजय के घाव सहला रही कांग्रेस उपचुनाव की जंग पूरी शिद्दत के साथ लड़ना चाहती है।

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पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा कहते हैं, हम चुनाव जीतने के लिए लड़ेंगे और पूरी ताकत के साथ लड़ेंगे। चंपावत का समर मुख्यमंत्री धामी के लिए ही अग्नि परीक्षा से गुजरना नहीं होगा बल्कि इस इम्तिहान से कांग्रेस के तीन क्षत्रप भी गुजरेंगे, जिनका राजनीतिक ठिकाना संयोग से कुमाऊं मंडल ही है।
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पार्टी के नए कप्तान करण माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी पर उप चुनाव में ज्यादा दबाव रहेगा। हालांकि अभी उपचुनाव का विधिवत एलान होना है और अभी यह भी तय नहीं है कि कांग्रेस किस चेहरे पर दांव लगाएगी? लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री की टक्कर में कांग्रेस के पास हिमेश खर्कवाल ही मजबूत विकल्प हो सकते हैं।

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तीन बार भाजपा और दो बार कांग्रेस रही विजयी

 

कांग्रेस अध्यक्ष माहरा कहते हैं, प्रत्याशी कौन होगा, इस बारे में हिमेश खर्कवाल से भी बात करेंगे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर चुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ा जाएगा। बकौल करण माहरा हम चुनाव जीतने के लिए लड़ेंगे। इसमें पार्टी की पूरी ताकत जुटेगी। चंपावत के समर में तीन बार भाजपा और दो बार कांग्रेस विजयी रही है। कांग्रेस के हिमेश खर्कवाल चंपावत सीट से दो बार चुनाव जीत चुके हैं। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में खर्कवाल 5,304 वोटों से हारे। 2017 में भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था, लेकिन पिछले दो चुनाव में उनकी हार का अंतर कम हुआ है। 
 

जीत के साथ वोटों के अंतर का रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती 

चुनौती मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने भी होगी। उनके सामने पांच साल मुख्यमंत्री बने रहने के लिए चुनाव जीतना ही पहला और आखिरी विकल्प है। साथ ही उन पर अब तक उपचुनाव जीते मुख्यमंत्रियों के वोटों के अंतर का रिकॉर्ड तोड़ने की चुनौती का दबाव भी रहेगा। सबसे अधिक वोटों के अंतर से उपचुनाव जीतने का रिकॉर्ड मुख्यमंत्री के तौर पर विजय बहुगुणा का है। 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने रामनगर विस से चुनाव  जीता था। उन्होंने भाजपा के राम सिंह को 9693 वोटों के अंतर से हराया था। 2007 में भाजपा की सरकार बनीं तो जनरल बीसी खंडूड़ी ने धुमाकोट से उपचुनाव लड़ा। खंडूड़ी के कांग्रेस के सुरेंद्र सिंह नेगी को 14171 मतों के अंतर से हराया। 2012 में कांग्रेस सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा सिंतारगंज विस सीट से उपचुनाव लड़े। भाजपा ने उनके खिलाफ प्रकाश पंत को मैदान में उतारा। बहुगुणा ने यह चुनाव 40154 वोटों के अंतर से जीता। 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने धारचूला से उपचुनाव लड़ा। भाजपा ने उनकी टक्कर भानु दत्त को मैदान में उतारा। रावत  20600 वोटों के अंतर से चुनाव जीते।

 

जीत का रहा है सीएम के उपचुनाव का इतिहास

भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त की बात यह है कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्रियों के उपचुनाव का इतिहास जीत का रहा है। अब तक राज्य में एनडी तिवारी, बीसी खंडूड़ी, विजय बहुगुणा और हरीश रावत के सामने उपचुनाव की चुनौती आई। सभी मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने कालखंड में शानदार जीत दर्ज की।

चंपावत उप चुनाव में पार्टी संगठन को साथ लेकर पूरी ताकत झोंकेगी। जो जीतने की नियत से चुनाव लड़ेगी। चुनाव प्रचार के दौरान क्षेत्र में जिस किसी की जरूरत महसूस की जाएगी उसे क्षेत्र में चुनाव प्रचार के लिए मैदान में उतारा जाएगा। -करण माहरा, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस 

हम पूरी शक्ति के साथ चंपावत उप चुनाव में उतरेंगे। पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को चुनाव प्रचार में उतारा जाएगा। चुनाव में जीत के लिए पूरा संगठन मिलकर काम करेगा। -यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष 
 

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