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घर बदला पर किस्मत नहीं बदल सके हरीश रावत

Mon, 28 Mar 2016 10:46 AM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 28 Mar 2016 10:46 AM IST
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cm house unlucky for harish rawat
uttarakhand CM house - फोटो : amar ujala

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री आवास से जुड़े मिथकों को मान कर पूर्व सीएम हरीश रावत अपनी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए उस आवास में शिफ्ट नहीं हुए, लेकिन वह अपनी किस्मत के सितारे नहीं बदल पाए।

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एक फरवरी को सीएम की शपथ लेने के बाद करोड़ों रुपये खर्च कर बने मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश नहीं करने का निर्णय लिया। जानकारों का कहना था कि बंगले में रहने के लिए जो सीएम आया उसकी कुर्सी कुछ माह के बाद छिन गई। ऐसे में हरीश रावत मुख्यमंत्री आवास छोड़कर बीजापुर राज्य अतिथि गृह को अपना घर बना लिया। दो वर्ष से नए सीएम का इंतजार कर रहे बंगले को उससे जुड़े मिथक टूटने से राहत मिली है कि अब उसमें रहने की अगला सीएम हिम्मत जुटा पाएगा।
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पूर्व सीएम हरीश रावत ने पदभार संभालने के बाद कहा कि वह मुख्यमंत्री आवास में तभी प्रवेश करेंगे जब उपचुनाव जीत लेंगे। उनकी जीत पक्की होने के बाद जब दोबारा पूछा गया तो वह बोले घर बड़ा है। भले ही बंगले से जुड़े मिथक को कभी उन्होंने स्वीकार नहीं किया कि वह प्रवेश करने वाले सीएम की कुर्सी चली जाती है। पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ने बड़े चाव से इस आवास को बनवाया था और सबसे पहले मुख्यमंत्री आवास में प्रवेश करने वाले वही थे। निशंक इस घर में प्रवेश करने के चार माह बाद भाजपा आलाकमान द्वारा पद से हटा दिए गए।
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इसके बाद भाजपा ने भुवन चंद्र खंडूड़ी को दोबारा भाजपा ने राज्य का सीएम बनाया, लेकिन करीब छह माह आवास में रहने के बाद उनकी सरकार आम चुनाव में हार गई। इतना ही नहीं खुद खंडूड़ी सीटिंग सीएम होने के बाद कोटद्वार से चुनाव हार गए। बंगले को अपना नया सीएम विजय बहुगुणा के रूप में मिला जो सर्वाधिक एक साल 11 माह बीताने के बाद पार्टी आलाकमान के द्वारा हटा दिए गए। इसके बाद हरीश रावत मुख्यमंत्री बने, लेकिन पहले दिन से उन्होंने इस बंगले का रुख नहीं किया।


सरकार पर बोझ बन गया बंगला
सीएम हरीश रावत बंगले में इसलिए नहीं गए कि इतने बड़े आवास में शिफ्ट करने से राज्य सरकार पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि बंगले को बनाने में करोड़ों खर्च हुए हैं, जबकि अब सीएम के नहीं रहने पर भी वहां सिक्योरिटी, रखरखाव और स्टाफ पर भारी भरकम खर्च हो रहा है। अब सीएम हरीश रावत के कार्यकाल पूरा नहीं करने पर मिथक को झूठा साबित हुआ, लेकिन हरीश रावत की कुर्सी समय से पहले चली गई।

मुख्यमंत्री बंगले में रहे यह
रमेश पोखरियाल निशंक 13 मई 2011 से 10 सितंबर 2011
भुवन चंद्र खंडूड़ी 11 सिंतबर से 13 मार्च 2012
विजय बहुगुणा 13 मार्च 2012 से जनवरी 2014

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