भाजपा में कार्यकर्ता नहीं शिकायती ज्यादाः रावत
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर सोमवार को बारी-बारी जवाब दिया।
उन्होंने चुनाव आयोग में लगातार हो रही शिकायतें, त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट का इस समय आना, आबकारी नीति पर संशोधन कर विशेष लोगों को लाभ पहुंचाने जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी।
हरीश रावत का कहना है चुनावी माहौल में भाजपा के प्रचारक कम शिकातयकर्ता अधिक हैं। जिनका फोकस मुझ पर है और चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज करा रहे हैं।
उनका कहना है कि मैं पिछले दिनों जोशीमठ में था कुछ लोगों ने कहा अभी मुआवजा नहीं है। इस पर बतौर मुख्यमंत्री या तो मैं खामोश हो जाता। मैंने उनसे कहा कि चुनाव के बाद मैं यहां आकर जिन लोगों को मुआवजा नहीं मिला है उन्हें दूंगा। इसे भी मुद्दा बना दिया गया।
कुछ लोग अपनी जेब में हाथ क्यों डालते हैं
मुख्यमंत्री का कहना है कि हरिद्वार कुंभ घोटाले की बात आते ही कुछ लोग अपनी जेब में हाथ डालकर देखने लगते हैं। जबकि सरकार की मंशा विद्वेष या राजनीतिक दुर्भावना से कोई काम नहीं कर रही है।
उनका कहना है कि त्रिपाठी आयोग ने अंतरिम रिपोर्ट सौंपी है। सरकार की ओर रिपोर्ट को लेकर कोई कोशिश नहीं हो रही है आयोग स्वाभाविक रूप से काम कर रहा है।
उनका कहना है मैं व्यक्तिगत तौर पर सौहार्द का हिमायती हूं लेकिन कुंभ की रकम कहां लगी यह सवाल जरूर उठेंगे। कुछ लोग कोर्ट और मीडिया से अप्रोच कर रहे हैं पता नहीं कुंभ घोटाले का नाम आते ही कुछ लोग अपनी जेब में हाथ क्यों डालने लगते हैं।
आबकारी नीति के ट्रायल में हर्ज क्या
आबकारी नीति में संशोधन को लेकर भाजपा के निशाने पर आ रहे मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रदेश की हित में अगर कोई फैसला लेना पड़ रहा है तो उसके ट्रायल में हर्ज क्या है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही इसे पॉलिसी का हिस्सा बनाया जाएगा। उनका कहना है कि अगर कोई प्रदेश में इनवेस्टमेंट करना चाहता है और हमारे स्थानीय उत्पाद की खपत हो रही है इससे हमें हॉटीकल्चर और एक्ससाइज का राजस्व बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उनका कहना है कि अगर विपक्ष के पास यहां के फल और अन्य उत्पादों को की खपत और उत्पादन बढ़ाने का कोई दूसरा रास्ता है बताएं। किसी नए विचार से किसानों और रोजगार का रास्ता तो न रोकें। बदलाव की बात सोचने को बेईमानी कहना दुर्भवाना से प्रेरित है।
भूले-बिसरे ख्वाबों का बंच है घोषणा पत्र
मुख्यमंत्री ने भाजपा के घोषणा पत्र को भूले बिसरे ख्वाबों का बंच बताया है। उनका कहना है कि जोशी ने जो ग्राफ्ट किया है वह संशय और भ्रमित हैं या गुस्से में नहीं कहा जा सकता। सालों बाद भाजपा फिर राम मंदिर की बात कर रही है।
जब पार्टी को लगा कि मोदी का गुब्बारा ऊंचा नहीं उड़ पाएगा तो आधे अधूरे मन से मंदिर की बात कह रहे हैं। नदियों को जोड़ने को लेकर यूपीए सरकार ने पांच डीपीआर किए हैं इसी प्रकार स्वर्णीम चतुर्भुज योजना जिसमें एक्सप्रेस हाईवे को जोड़ने की योजना है इसे भी कांग्रेस अंजाम दे रही है।