जमीन मालिकों के लिए खुशखबरी, लैंड पूल स्कीम पर लगी मुहर
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मंगलवार को भूमि संयोजन योजना (लैंड पूल स्कीम) पर भी मुहर लगी। आवास विभाग ने इसकी नियमावली को अधिसूचित कर दिया है। नियमावली के तहत भू स्वामी भूमि का संयोजन (पूल) कर विकास प्राधिकरण को भूमि बेच सकेंगे। बदले में विकास प्राधिकरण जमीन का कुछ हिस्सा विकसित कर भू स्वामियों के अधिकार क्षेत्र में देगा।
भूमि संयोजन योजना को हाल ही में हुई कैबिनेट में रखा गया था। मंगलवार को आवास विभाग ने इस योजना की नियमावली को भी अधिसूचित किया। इस योजना के तहत जमीन लेने पर विकास प्राधिकरण भू स्वामियों को बेहतर रिटर्न देगा।
नियमावली में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भूमि पर पेयजल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन आदि की सुविधाओं का विकास किया जाता है तो उपयोगकर्ता को उसका शुल्क अदा करना होगा। इस नियमावली के तहत क्षतिपूर्ति की व्यवस्था भी की गई है। भूमि संयोजन के समय की प्रभावी सर्किल दर को आधार मानते हुए भू स्वामी को तीन गुना क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान रखा गया है।
आंध्र प्रदेश, गुजरात आदि की तर्ज पर है व्यवस्था
सचिव आवास आर मीनाक्षी सुंदरम के मुताबिक यह योजना आंध्र प्रदेश, गुजरात आदि में प्रभावी है। इन राज्यों में इस योजना का खासा लाभ वहां की सरकारों को मिला है। स्वीकार किया जा रहा है कि प्रदेश में विकास प्राधिकरणों के पास जमीन न के बराबर है। एमडीडीए की ओर से हाउसिंग के प्रोजेक्ट न के बराबर लाने की वजह भी यही मानी जा रही है।
भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया में कम से कम डेढ़ साल का समय लगता है। योजना के तहत विकास प्राधिकरण अर्जित की गई भूमि का पूरा नक्शा तैयार करेगा। प्राधिकरण ही सार्वजनिक सूचना जारी करेगा और आपत्तियां, सुझाव आदि मांगेगा।
भूमि मालिकों को फायदा
दी गई जमीन--------- आवासीय प्लाट के लिए आरक्षित--- व्यवसायिक उपयोग
250 से 5000 वर्ग मीटर---- 20 प्रतिशत----- चार प्रतिशत
5001 से 10,000 वर्ग मीटर--- 22 प्रतिशत--- छह प्रतिशत
दस हजार वर्ग मीटर से अधिक-- 27 प्रतिशत --- सात प्रतिशत