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शहरों में पेड़ों के स्थान देने की बने स्पष्ट नीति

Fri, 22 Jul 2022 11:30 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Fri, 22 Jul 2022 11:30 PM IST
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'Clear policy to give place of trees in cities'
जब देश समेत दुनिया के तमाम देशों में शहरीकरण के साथ ही आबादी बढ़ रही है, तब जंगलों और वृक्षों को नए सिरे से समाज में स्थापित करना होगा। यह बात आराधना इन्क्लेव के हरेला संवाद के अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु आहूजा ने कही।
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हरेला माह में जीएमएस रोड स्थितआराधना एन्क्लेव में स्थानीय लोगों और सांस्कृतिक संस्था धाद के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने सामूहिक तौर पर पौधरोपण किया। इसके बाद सामाजिक संवाद हुआ, जिसमें वक्ता हिमांशु आहूजा ने कहा कि शहरीकरण आधुनिक दुनिया का सबसे बड़ा यथार्थ है। पूरी दुनिया में शहरों की आबादी बढ़ रही है। इनके चलते सड़कों का जाल और बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान किया जा रहा है। ऐसे में शहरों में मौजूद ऐतिहासिक पेड़ अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रहे हैं, इसलिए अब शहरों से लेकर देहात तक वृक्षों को लेकर स्पष्ट नीति निर्माण की जरूरत है। कहा कि अब वक्त आ गया है कि कालोनियों के निर्माण के समय वृक्षों का स्थान सुनिश्चित हो।
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कहा कि दून में पिछले दो दशकों में आबादी घनत्व तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते वृक्षों की संख्या भी कम हुई है। शासन के साथ आम समाज में भी पौधरोपण को लेकर उदासीनता दिखती है। हम घरों के आगे पेड़ लगाने से बचते हैं, जबकि राजधानी दून की पहचान इसके घने पेड़ और नहरें रही है। वक्ताओं ने कहा कि यहां चिड़ियों और पक्षियों के निवास की एक समृद्ध परंपरा रही है। केएम शाही ने कहा कि औद्योगीकरण व शहरीकरण के लिए लाखों वृक्षों को काटना पड़ा है। इसकी भरपाई के लिए हमें अधिक से अधिक पौधे रोपित कर पृथ्वी को इसकी क्षतिपूर्ति करनी होगी। प्रभाकर देवरानी ने कहा कि पेड़ों और इंसानों का सह अस्तित्व है। पेड़ों से ही मनुष्य को जीवनदायिनी हवा मिलती है। पेड़ प्रदूषण को दूर करते हैं यदि पेड़ नहीं होंगे तो बहुत से वन्य प्राणी बेघर हो जाएंगे।
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विकास मित्तल, रेखा अग्रवाल, बी एस रावत, रजनीश कुमार, केएम शाही, प्रभाकर देवरानी, रुचि जैन, शालिनी अग्रवाल, ऋतु पंत, प्रतिभा शाही, प्रीति मिश्रा, सुधा देवरानी, आशा भाटी, ओमेंद्र सिंह भाटी पूर्व पार्षद, प्रवीण शर्मा, वैभव शर्मा, तन्मय मंमगाई, गणेश उनियाल, नीरज डंगवाल, महावीर सिंह रावत, दयानंद डोभाल, साकेत रावत, विनोद, शुभम आदि।

ट्रीज ऑफ दून अभियान में शामिल हों
क्या आपके घर के पास कोई पुराना पेड़ है, अगर है तो इसकी जानकारी दीजिए, ताकि ऐसे पेड़ों को ट्रीज ऑफ दून की यात्रा में शामिल किया सके। हरेला पर्व के दौरान पुराने पेड़ों की एक यात्रा 30 जुलाई को निकाली जाएगी। ट्रीज आफ दून के संयोजक हिमांशु आहूजा ने बताया कि अगर आपके पास कोई ऐसा वृक्ष है, जो बहुत पुुराना है, तो इसकी जानकारी दें, ताकि उसका डेटा बेस तैयार किया जा सके।
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