मोदी से पहले एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल कर रही हैं सफाई
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पीएम मोदी के गांधी जयंती से शुरू किए स्वच्छता अभियान की अलख अब भले ही भारत में जग रही है, लेकिन देश की पहली महिला एवरेस्ट विजेता बछेंद्री पाल इससे पहले ही तिब्बत में सफाई अभियान चलाकर लौट आई हैं।
तिब्बत की खरता वैली में मिशन की सात अन्य महिला पर्वतारोहियों संग बछेंद्री ने वर्षों से जमा कचरा साफ किया। उनका कहना है कि अब उनका अभियान कचरा फैलाकर पहाडों का दम घोंटने वालों के खिलाफ होगा।
मिशन पूरा कर दून लौटने के बाद इंदिरानगर पुलिस चौकी के पास स्थित आवास में बछेंद्री और उनकी साथियों प्रेमलता अग्रवाल, माधवी ने अमर उजाला को बताया कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट के चारों ओर खरता वैली विस्तृत है।
पर्वतारोही इसे नेस्तनाबूद करने पर आमादा
बछेंद्री और उनकी सहयोगी प्रेमलता अग्रवाल, माधवी बताती हैं कि 14000 फुट की ऊंचाई पर स्थित दुनिया की छत कहे जाने वाले तिब्बत के ल्हासा से दिखने वाला कुदरत का नजारा अनुपम था। बताया कि तिब्बत जहां रेगिस्तानी इलाका है, वहीं खरता वैली में हरियाली।
कहा कि मानवीय हस्तक्षेप, खासतौर पर ट्रैकिंग के लिए खरता वैली आने वाले पर्वतारोही इसे नेस्तनाबूद करने पर आमादा हैं। अभियान दल ने खरता वैली से कई किलो कचरा जिसमें प्लास्टिक बैग और अन्य सामान था उठाकर बेस कैंप पर पहुंचाकर निस्तारित किया।
बताया कि मिशन तिब्बत 14 सितंबर को काठमांडू से शुरू हुआ था। इसमें उत्तराखंड से माधवी शर्मा, नई दिल्ली से ज्योति शर्मा, तनु वर्मा, गुजरात से अनीता रेखी, कोलकाता से चेतना साहू, झारखंड से प्रेमलता अग्रवाल, शीतल इक्का शामिल थीं।
माधवी थीं सबसे नई
मिशन में राजपुर रोड की रहने वाली माधवी सबसे नई थीं। उत्तरकाशी के नेहरू इंस्टीट्यूट आफ माउंटेनियरिंग से एक माह का बेसिक कोर्स पूरा करने के बाद माधवी को इस ट्रैक का मौका मिला।
गाइड को सिखाया सबक
बछेंद्री ने बताया कि मिशन तिब्बत के दौरान साथ चल रहा गाइड खाने-पीने से लेकर रहन-सहन तक के टिप देने से नहीं चूक रहा था। टोकाटाकी से आजिज बछेंद्री ने जब गाइड को परिचय दिया तो वह लाइन पर आ गया। बछेंद्री कहती हैं कि जब कोई आपको अंडर इस्टीमेट करे तो उसे सबक सिखाना जरूरी है।