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Dehradun News: सुरक्षित मातृत्व के दावे, चिकित्सक और संसाधन नहीं

Thu, 11 Apr 2024 03:21 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 11 Apr 2024 03:21 AM IST
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Claims of safe motherhood, no doctors and resources
सुरक्षित मातृत्व के लिए गर्भवतियों को सरकारी अस्पतालों में निशुल्क परामर्श और जांच की सुविधा दी जाती है, लेकिन पछवादून और जौनसार बावर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के पद रिक्त पड़े हैं। वहीं, गर्भस्थ शिशु की जांच के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन जैसी जरूरी मशीन भी उपलब्ध नहीं है। उप जिला अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा तो है, पर प्रसूता वार्ड में पर्याप्त बेड नहीं है।
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गर्भवतियों के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक और संसाधनों की कमी से सुरक्षित मातृत्व के दावे को पंख नहीं लग पा रहे हैं। महिलाएं निशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और जांच के लिए सरकारी अस्पताल में पहुंचती है, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही उनकी उम्मीद टूट रही है। पछवादून और जौनसार बावर में एक उप जिला अस्पताल और तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। सीएचसी चकराता, साहिया और सहसपुर में स्त्री रोग विशेषज्ञ और अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा दोनों ही नहीं है। सीएचसी सहसपुर में एक अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने के चलते मशीन का पंजीकरण रद्द कर दिर गया था। सीमांत तहसील क्षेत्र त्यूणी और तहसील मुख्यालय कालसी में केवल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। क्षेत्र में आबादी अधिक है, लेकिन यहां मानक के अनुसार स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ का पद ही नहीं है।
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सभी सीएचसी और पीएचसी से जुड़े क्षेत्रों से महिलाएं जांच और अल्ट्रासाउंड के लिए उप जिला अस्पताल विकासनगर आती हैं। कई महिलाओं को अस्पताल तक आने के लिए 135 किलोमीटर लंबी यात्रा करनी पड़ती है। उप जिला अस्पताल में सबसे अधिक ओपीडी महिला एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ की है। इसमें से 35 से 40 फीसदी गर्भवती या धात्री होती हैं। उप जिला अस्पताल में ओपीडी में परामर्श और जांच की सुविधा तो मिल जाती है, लेकिन यहां प्रसूता वार्ड में बेड की संख्या केवल छह है। ऐसे में प्रसव के लिए गर्भवतियों को भर्ती करने में दिक्कत आती है।
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सीएमओ डॉ. संजय जैन ने कहा कि सभी सीएचसी में विशेषज्ञों की तैनाती के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। फिजिशियन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ और सर्जन जैसे विशेषज्ञों के रिक्त पदों पर नियुक्ति विभाग की प्राथमिकता रहती है। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ उपलब्ध होने के साथ अस्पतालों में नियुक्ति कर दी जाएगी।
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