किशोरी के उत्पीड़न मामले में सिविल जज दीपाली को राहत नहीं, मुकदमा वापस लेने की अपील हुई खारिज
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नैनीताल की किशोरी के उत्पीड़न के आरोप में फसीं सिविल जज दीपाली शर्मा के खिलाफ चल रहे मुकदमे को वापस लेने की शासन की अपील को सीजेएम अरुण कुमार ने खारिज कर दिया।
सीजेएम की कोर्ट ने इसे जनहित से जुड़ा मामला न बताते हुए अपना आदेश सुनाया है। वहीं, कोर्ट ने जज दीपाली शर्मा को 21 दिसंबर को पेश होने के आदेश दिए हैं। बता दें कि सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने उत्तराखंड शासन के इस फैसले के खिलाफ सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पिछले वर्ष जनवरी में रोशनाबाद की जज कॉलोनी में रहने वाली सिविल जज सीनियर डिवीजन दीपाली शर्मा के घर से नैनीताल की एक किशोरी को मुक्त कराया गया था। हाईकोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई हुई थी। उस वक्त के जिला जज राजेंद्र सिंह चौहान तत्कालीन एसएसपी किशन कुमार वीके, एडीजे अमरिंदर सिंह इस पूरी कार्रवाई के दौरान मौजूद थे।
किशोरी के शरीर पर चोट के 20 निशान पाए गए थे
जिला जज की मौजूदगी में ही जिला अस्पताल में किशोरी का मेडिकल परीक्षण हुआ था, जिसमें उसके शरीर पर चोटों के 20 निशान पाए गए थे। उस वक्त एएसपी रचिता जुयाल की ओर से सिडकुल थाने में जज दीपाली शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। अप्रैल में सीओ कनखल रहे मनोज कात्याल ने दीपाली शर्मा के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी। मामले में हाईकोर्ट ने जज दीपाली शर्मा को निलंबित कर दिया था।
वहीं, बीते अगस्त में उत्तराखंड शासन ने जज के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लेने का फैसला लिया था। इस संबंध में अभियोजन पक्ष ने सीजेएम कोर्ट में प्रार्थनापत्र दायर किया था। जज के खिलाफ दर्ज मुकदमे को वापस लिए जाने के उत्तराखंड शासन के फैसले को चुनौती देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने बुधवार को सीजेएम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट में शासन के फैसले को लेकर हुई सुनवाई के बाद कोर्ट ने जज के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की उत्तराखंड शासन की अपील को निरस्त कर दिया। इस दौरान कोर्ट में मौजूद रहे सामाजिक कार्यकर्ता जेपी बडोनी ने इसकी पुष्टि की है।