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दो मासूमों संग नदी में बही मां, बचाने गया बुजुर्ग भी बहा

Tue, 12 Aug 2014 10:48 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश
ब्यूरो / अमर उजाला, ऋषिकेश Updated Tue, 12 Aug 2014 10:48 AM IST
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children and mother flow in river at rishikesh

ऋषिकेश में भोगपुर-थानों मोटर मार्ग से करीब दो किलोमीटर अंदर सूर्यधार गांव में बरसाती नदी जाखन पार करते समय दो बच्चे और एक महिला बह गए।

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उन्हें बचाने आए स्थानीय बुजुर्ग को भी पानी की तेजधार बहा ले गई। ढूंढ खोज में निकले ग्रामीणों ने नदी से लगभग एक किमी आगे चारों के शव बरामद कर लिए। हादसे के बाद परिजनों में मातम छा गया।
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रेसकोर्स दून में तैनात पीआरडी जवान राकेश सिंह सिंधवाल निवासी सिंधवाल गांव, पट्टी मालकोट की पत्नी रेखा (30) दो बेटे सूरज 10 और आठ वर्षीय आर्यन को लेकर सोमवार सुबह इठारना गांव स्थित शिव मंदिर के लिए निकली थी।

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तेज बहाव की चपेट में आकर बहने लगे बच्चे

children and mother flow in river at rishikesh

बताया जा रहा है कि पैदल सफर तय करने के बाद तीनों नालीपानी सनगांव पहुंचे। यहां बीच में पड़ने वाली बरसाती नदी जाखन को पार कर रहे थे, तभी तेज बहाव की चपेट में आकर बच्चे बहने लगे।

महिला मदद के लिए चीखी चिल्लाई और बच्चों को बचाने का प्रयास करने लगी। चीख पुकार सुनकर गांव के महेंद्र सिंह कृषाली (75) सहायता के लिए आए और वह भी पानी के तेज बहाव में बहने लगे।

बताया जा रहा है जब तक आसपास के लोग बचाने के लिए दौड़े चारों नदी की तेज धारा में बह चुके थे। लोगों ने सनगांव से करीब एक किलोमीटर आगे सूर्यधार गांव से चारों को पानी से बाहर निकाला।

बेसुध हालत में 108 सेवा से राजकीय चिकित्सालय ऋषिकेश लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया।

मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया...

children and mother flow in river at rishikesh

हादसे के वक्त पीआरडी जवान राकेश सिंधवाल दून ड्यूटी पर था। रिश्तेदारों की सूचना पर शाम को सरकारी अस्पताल पहुंचा।

पत्नी और बच्चों के शव देखकर फफक पड़ा। रोते बिलखते राकेश को लोगों ने बमुश्किल संभाला।

राकेश बोला, मुझे अकेला क्यों छोड़ दिया, मुझे भी साथ ले जाते...। गमगीन माहौल देख अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखें भी छलक आईं। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक घर पर अब राकेश की बूढ़ी मां अकेली रह गई है।

काश विदालना नदी पर पुल बना होता...

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सिंधवाल गांव से इठारना करीब 12 किलोमीटर है, अधिकांश लोग पैदल ही आवाजाही करते हैं।

सिंधवाल गांव के पूर्व प्रधान राजपाल सिंह सिंधवाल ने बताया कि थानों-भोगपुर मोटर मार्ग पर विदालना नदी में पुल बना होता तो हादसा नहीं होता। तब बस से इठारना तक जाते, शार्टकट रास्ते का इस्तेमाल नहीं करते।

रखवाल गांव प्रधान दीपक चंद, भोगपुर प्रधान पूर्णानंद तिवाड़ी, केदार सिंह रावत ने बताया कि पट्टी मालकोट क्षेत्र अत्यधिक पिछड़ा हुआ है। कच्चे रास्ते हैं। नदी के ऊपर पुल नहीं है। यह हाल तब है, जब क्षेत्र राजधानी के करीब है।

शवों को पीएम के लिए भेजा
रानीपोखरी थाना उपनिरीक्षक जीतराम ढौंढियाल ने बताया कि परिजनों द्वारा शवों की शिनाख्त करने के बाद पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए दून भेज दिया है।

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