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दादा की गोद से पोतियों तक पहुंचा स्वाइन फ्लू
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 27 Feb 2015 02:09 AM IST
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स्वाइन फ्लू से संक्रमित होने के बाद रोगी के दूसरे लोगों से न घुलने-मिलने के संबंध में बराबर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। फिर भी राजधानी दून में एक व्यक्ति के एहतियात न बरतने से उसकी दो पोतियों को स्वाइन फ्लू हो गया।
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जानकारी के बावजूद करता रहा दुलार
रोगी को पता था कि वह स्वाइन फ्लू वायरस से संक्रमित है। इसके बावजूद वह पोतियों को गोद में बैठाकर लाड़-दुलार करता रहा। इससे दोनों बच्चियां रोग की गिरफ्त में आ गईं। दोनों का इलाज एक निजी डॉक्टर की देखरेख में हो रहा है। दोनों रोगी टेमी फ्लू दवा दून अस्पताल से ले रही हैं।
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दून अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों और ‘क्रोनिक’ मरीजों को संक्रमण जल्दी होता है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम होने से वायरस अधिक घातक साबित होता है। किसी को जुकाम-बुखार हो तो वह एहतियात बरते, जिससे दूसरे को संक्रमण न होने पाए।
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बच्चों में सबसे अधिक लक्षण
इसके अलावा दून अस्पताल और निजी अस्पतालों में जुकाम, बुखार, गले में खराश, सीने में जकड़न और खांसी सरीखे स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले रोगियों के आने का सिलसिला जारी है। बच्चों में सबसे अधिक लक्षण हैं।
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. जेपी देवशाली के मुताबिक इंफ्लुएंजा और स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण एक जैसे हैं। जांच में रोग पुष्ट होता है।